
भुवनेश्वर: ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र की मंगलवार को हंगामेदार शुरुआत हुई। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस के विधायकों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बीजद ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में कथित त्रुटियों का मुद्दा उठाया, जबकि कांग्रेस विधायकों ने माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) यानी MMDR संशोधन कानून को वापस लेने की मांग की। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 1:10 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
प्रश्नकाल शुरू होते ही हंगामा
सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह शुरू हुई। शुरुआती औपचारिक कार्यवाही और शोक प्रस्ताव के बाद जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी सदस्य अपनी मांगों को लेकर मुखर हो गए। बीजद और कांग्रेस के विधायक तख्तियां और पोस्टर लेकर सदन के वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे।
विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने प्रदर्शन कर रहे विधायकों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील की। इसके बावजूद नारेबाजी जारी रही। स्थिति सामान्य नहीं होने पर अध्यक्ष ने कार्यवाही दोपहर 1:10 बजे तक स्थगित कर दी।
पाठ्यपुस्तकों की गलतियों पर बीजद का विरोध
बीजू जनता दल के विधायकों ने पहली से आठवीं कक्षा तक की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में कथित त्रुटियों का मुद्दा उठाया। पार्टी का आरोप है कि किताबों में कई गलतियां सामने आने के बावजूद सरकार ने समय रहते पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
बीजद के सदस्यों ने स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की भी मांग की और कहा कि पाठ्यपुस्तकों से जुड़े मामले की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। पार्टी की युवा और छात्र इकाइयों ने भी 22 और 23 सितंबर को विधानसभा के बाहर प्रदर्शन की घोषणा की थी।
बीजद नेताओं का आरोप है कि नई शिक्षा नीति के तहत उपलब्ध कराई गई किताबों में त्रुटियां थीं और किताबें मिलने में भी देरी हुई। ये विपक्ष के आरोप हैं, जिन पर सरकार का पक्ष और संबंधित विभाग की कार्रवाई भी इस विवाद के आकलन में महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस ने उठाया MMDR संशोधन का मुद्दा
दूसरी ओर कांग्रेस सदस्यों ने MMDR संशोधन कानून को लेकर विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस विधायकों ने कानून को वापस लेने की मांग करते हुए सदन में नारेबाजी की।
विपक्षी दलों का तर्क है कि हालिया संशोधन का असर खनिज संपदा से जुड़े राज्य के अधिकारों और राजस्व पर पड़ सकता है। यह विपक्ष का राजनीतिक और नीतिगत दावा है, जिस पर सत्तापक्ष का अलग रुख है।
MMDR संशोधन इस सत्र से पहले ही विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल था। बीजद ने भी इस विषय पर विधानसभा में चर्चा की मांग की है।
दोपहर में सदन शुरू हुआ तो फिर नारेबाजी
पहली बार स्थगित होने के बाद दोपहर में सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन विपक्षी सदस्यों का विरोध जारी रहा। बीजद और कांग्रेस के विधायक अपनी मांगों को लेकर फिर नारे लगाने लगे।
लगातार विरोध के कारण सदन में सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही को शाम 4 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। पहले दिन लगातार स्थगन के कारण मानसून सत्र की शुरुआत राजनीतिक टकराव के साथ हुई।
विपक्ष ने पहले ही बनाई थी रणनीति
मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही बीजद ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी थी। पार्टी विधायक दल की बैठक में MMDR संशोधन, पाठ्यपुस्तकों की त्रुटियां और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया गया था।
इसके अलावा कानून-व्यवस्था, बाढ़ प्रबंधन, महंगाई, वित्तीय प्रबंधन और बजट खर्च जैसे मुद्दों को भी सरकार के सामने उठाने की बात कही गई थी।
कांग्रेस ने भी MMDR संशोधन को प्रमुख मुद्दा बनाया है। इस कारण सत्र शुरू होने से पहले ही यह संकेत मिल गया था कि विधानसभा में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
अध्यक्ष ने मांगा था सभी दलों का सहयोग
सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग मांगा था। सर्वदलीय बैठक में भी सदन के कामकाज को व्यवस्थित ढंग से चलाने पर चर्चा हुई थी।
इसके बावजूद पहले ही दिन प्रश्नकाल के दौरान विरोध और नारेबाजी के कारण कार्यवाही बाधित हुई।
नौ कार्य दिवस का है मानसून सत्र
ओडिशा विधानसभा का मानसून सत्र 22 सितंबर से शुरू होकर 3 अक्टूबर तक चलना निर्धारित है। इस दौरान नौ कार्य दिवस रखे गए हैं। सत्र छोटा होने के बावजूद कई राजनीतिक और नीतिगत मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच बहस होने की संभावना है।
पाठ्यपुस्तकों की कथित त्रुटियों और MMDR संशोधन के अलावा किसानों की समस्याएं, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, बाढ़ प्रबंधन और अन्य राज्य स्तरीय मुद्दे भी विपक्ष के एजेंडे में हैं।
पहले दिन ही सरकार-विपक्ष आमने-सामने
मानसून सत्र के पहले दिन के घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि आने वाले दिनों में भी सदन में कई मुद्दों पर तीखी राजनीतिक बहस हो सकती है। बीजद पाठ्यपुस्तक विवाद को लेकर सरकार पर दबाव बना रही है, जबकि कांग्रेस MMDR संशोधन को वापस लेने की मांग उठा रही है।
वहीं विधानसभा अध्यक्ष की ओर से सदन को सुचारू रूप से चलाने के लिए विपक्षी सदस्यों से सहयोग की अपील की गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इन मुद्दों पर सदन में क्या जवाब देती है और विपक्ष आगे किस तरह अपनी मांगों को उठाता है।





