
भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस और बीजू जनता दल (BJD) के विधायकों ने माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन कानून यानी MMDR संशोधन कानून और स्कूली पाठ्यपुस्तकों में सामने आई गलतियों को लेकर सरकार को घेरा। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण प्रश्नकाल प्रभावित हुआ और डिप्टी स्पीकर भबानी शंकर भोई ने सदन की कार्यवाही शाम 4 बजे तक स्थगित कर दी।
प्रश्नकाल शुरू होते ही कांग्रेस के विधायक अपनी सीटों से खड़े होकर MMDR संशोधन कानून का विरोध करने लगे। कुछ ही देर में कांग्रेस सदस्य सदन के वेल में पहुंच गए और स्पीकर के आसन के पास नारेबाजी शुरू कर दी। कांग्रेस विधायकों ने केंद्र सरकार से संशोधित कानून वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि इस कानून का असर खनिज संपदा से समृद्ध ओडिशा पर पड़ेगा।
MMDR संशोधन कानून अगस्त 2026 में संसद से पारित हुआ था। संशोधन में राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों और खनिज वाली भूमि पर कर या उपकर लगाने की शक्तियों से संबंधित नए प्रावधान किए गए हैं। विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक पहले भी इस कानून पर आपत्ति जता चुके हैं और उनका दावा है कि इससे ओडिशा को बड़ा राजस्व नुकसान हो सकता है। दूसरी ओर भाजपा नेताओं और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि विपक्ष इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर रहा है।
सदन में कांग्रेस के साथ BJD विधायकों ने भी MMDR संशोधन कानून का मुद्दा उठाया। BJD सदस्यों ने इसके अलावा राज्य की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में सामने आई बड़ी संख्या में गलतियों को लेकर भी विरोध किया। इन दोनों मुद्दों को लेकर विपक्षी विधायकों की नारेबाजी के कारण सदन में हंगामे की स्थिति बन गई।
ओडिशा में नई स्कूली पाठ्यपुस्तकों में गलतियों का मामला पिछले कुछ समय से विवाद का विषय बना हुआ है। कक्षा एक से आठ तक की 55 नई पाठ्यपुस्तकों में करीब 1,700 गलतियां सामने आने के बाद मामले की जांच कराई गई। जांच समिति ने पाया कि इनमें केवल प्रिंटिंग की गलतियां ही नहीं थीं, बल्कि सामग्री, अवधारणाओं, तथ्यों, तस्वीरों और भाषा से जुड़ी त्रुटियां भी थीं। समिति ने समीक्षा और अकादमिक जांच की प्रक्रिया में कमियां बताई हैं।
पाठ्यपुस्तक विवाद को लेकर BJD की युवा और छात्र इकाइयां भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर चुकी हैं। बुधवार को बड़ी संख्या में BJD कार्यकर्ताओं ने विधानसभा के बाहर धरना दिया था और स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग की थी। सरकार की ओर से इस मामले में सात प्रमुख शिक्षा अधिकारियों को निलंबित किया गया है और विवादित किताबों को वापस लिया गया है। नई पाठ्यपुस्तकों के वितरण की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
गुरुवार को विधानसभा के भीतर इन मुद्दों की गूंज सुनाई दी। विपक्षी सदस्यों के लगातार विरोध और नारेबाजी के कारण सामान्य तरीके से प्रश्नकाल चलाना मुश्किल हो गया। हंगामा नहीं थमने पर डिप्टी स्पीकर भबानी शंकर भोई ने सदन की कार्यवाही शाम चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद भी कांग्रेस विधायकों का प्रदर्शन जारी रहा। विधायक विधानसभा परिसर में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास पहुंचे और वहां MMDR संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने हाथों में बैनर लेकर कानून वापस लेने की मांग दोहराई।
MMDR संशोधन कानून पिछले कई सप्ताह से ओडिशा की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। BJD का दावा है कि नए प्रावधानों के कारण राज्य को सालाना करीब 12 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। नवीन पटनायक ने इससे पहले भाजपा सांसदों को पत्र लिखकर कानून में किए गए संशोधनों को वापस लेने के लिए पहल करने की मांग की थी। हालांकि यह 12 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का आंकड़ा BJD का दावा है, न कि इस स्तर पर स्थापित सरकारी नुकसान का आंकड़ा।
विवाद की पृष्ठभूमि में जुलाई 2024 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी महत्वपूर्ण है, जिसमें राज्यों की खनिज अधिकारों और खनिज वाली भूमि पर कर लगाने की शक्ति को मान्यता दी गई थी। इसके बाद 2026 में पारित MMDR संशोधन में इस क्षेत्र में राज्यों की कर लगाने की शक्तियों पर नई शर्तें और प्रतिबंध जोड़े गए। इसी को लेकर ओडिशा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव जारी है।
मॉनसून सत्र के तीसरे दिन का घटनाक्रम बताता है कि खनिज कानून और पाठ्यपुस्तक विवाद आने वाले दिनों में भी विधानसभा के भीतर प्रमुख मुद्दे बने रह सकते हैं। कांग्रेस जहां MMDR संशोधन कानून को वापस लेने की मांग पर अड़ी है, वहीं BJD खनिज कानून के साथ स्कूली किताबों की गलतियों को लेकर भी सरकार से जवाब मांग रही है। ऐसे में सत्र के आगे के दिनों में इन दोनों मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।





