
Odisha ओडिशा: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने रविवार को जानकारी दी है कि बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम और उससे सटे उत्तरी ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों में बना निम्न दबाव क्षेत्र अब डिप्रेशन में बदल गया है। इस सिस्टम के सक्रिय होने के बाद पूर्वी भारत के कई हिस्सों में मौसम तेजी से प्रभावित हुआ है और लगातार भारी बारिश दर्ज की जा रही है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार यह डिप्रेशन अगले 24 घंटे में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। अनुमान है कि यह सिस्टम बालासोर के पास चांदबली और दीघा के बीच उत्तरी ओडिशा के तटीय क्षेत्र को पार कर सकता है। इसके बाद यह जमीन पर चलकर आगे 24 घंटे तक उत्तरी ओडिशा और उत्तरी छत्तीसगढ़ की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है।
मौसम विभाग का कहना है कि इस सिस्टम के प्रभाव से ओडिशा में पिछले 24 घंटे से लगातार भारी बारिश हो रही है। कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने लगी है और नदी-नालों का जलस्तर भी बढ़ने लगा है।
राज्य में सबसे अधिक वर्षा कंधमाल जिले के खजूरीपाड़ा में रिकॉर्ड की गई, जहां 276 mm बारिश दर्ज हुई। इसके अलावा बलांगीर जिले के तुरीकेला में 264 mm बारिश हुई। अन्य प्रभावित क्षेत्रों में फूलबानी में 224.4 mm, फिरिंगिया में 223.6 mm, जी. उदयगिरी में 220 mm, लाखबाली में 217 mm, बालीगुडा में 210 mm, टिटिलागढ़ में 205.4 mm और चाकापाड़ में 204.6 mm बारिश रिकॉर्ड की गई।
इन भारी बारिश के आंकड़ों से साफ है कि कई जिलों में स्थिति गंभीर बनी हुई है और लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बाधित होने और जलभराव की आशंका बढ़ गई है। प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
ओडिशा सरकार और स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखनी शुरू कर दी है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव टीमों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपत्ति स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
मौसम विभाग ने रविवार के लिए बरगढ़, संबलपुर और नुआपाड़ा जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में एक-दो जगहों पर बहुत भारी बारिश और बहुत भारी बारिश की संभावना बताई गई है। रेड अलर्ट का मतलब है कि इन क्षेत्रों में मौसम बहुत गंभीर हो सकता है और बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है।
आंकड़ों के अनुसार इस तरह के डिप्रेशन सिस्टम मानसून सीजन में तटीय क्षेत्रों के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकते हैं, क्योंकि ये कम समय में बहुत ज्यादा बारिश ला सकते हैं। लगातार बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ता है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाता है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने और सुरक्षित जगहों पर रहें। साथ ही मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है क्योंकि समुद्र की स्थिति भी खराब हो सकती है।
कई जिलों में स्कूलों और अन्य विद्यालयों को लेकर भी सावधानी बरती जा रही है, और जरूरत पड़ने पर छुट्टियों की घोषणा की जा सकती है।
अगर मौसम विभाग लगातार इस सिस्टम की निगरानी कर रहा है और अगले 24 से 48 घंटे ओडिशा और आसपास के राज्यों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।





