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ओडिशा में कानी नदी का कहर, बार-बार टूट रहे तटबंधों से जाजपुर के हजारों लोग प्रभावित

Kavita2
31 July 2026 10:08 AM IST
ओडिशा में कानी नदी का कहर, बार-बार टूट रहे तटबंधों से जाजपुर के हजारों लोग प्रभावित
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जाजपुर (ओडिशा)। ओडिशा के जाजपुर जिले में बाढ़ ने एक बार फिर कानी नदी की कमजोर तटबंध व्यवस्था की पोल खोल दी है। बैतरणी नदी की सहायक धारा कानी नदी के तटबंध टूटने से दशरथपुर ब्लॉक के कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। लगातार बढ़ते जलस्तर और कमजोर तटबंधों के कारण हर साल मानसून के दौरान हजारों लोगों को बाढ़ की समस्या से जूझना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों और रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कई वर्षों से कानी नदी के किनारे बसे गांवों में तटबंध टूटने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पिछले 12 वर्षों में तटबंध टूटने की 20 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से 17 घटनाएं कानी नदी के किनारे हुई हैं, जबकि तीन बार बैतरणी नदी के तटबंध क्षतिग्रस्त हुए हैं। बार-बार हो रही इन घटनाओं ने नदी सुरक्षा और तटबंधों की मजबूती को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस बार बाढ़ के दौरान कानी नदी में पानी का दबाव बढ़ने के बाद कई स्थानों पर तटबंध कमजोर पड़ गए। पानी के तेज बहाव ने ग्रामीण इलाकों में प्रवेश कर लिया, जिससे लोगों के घर, खेत और सड़कें प्रभावित हुईं। कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

दशरथपुर ब्लॉक के स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल मानसून के दौरान उन्हें बाढ़ का डर सताता रहता है। तटबंध टूटने के बाद पानी तेजी से गांवों की ओर बढ़ता है, जिससे लोगों की मेहनत और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचता है। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से तटबंधों की मरम्मत और स्थायी समाधान की मांग की जा रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, तटबंधों की समय पर मरम्मत और मजबूतीकरण नहीं होने के कारण स्थिति हर साल गंभीर होती जा रही है। कई जगहों पर पुराने तटबंध कमजोर हो चुके हैं और तेज बारिश या नदी में अचानक बढ़े जलस्तर का दबाव नहीं झेल पाते। इसका सीधा असर नदी किनारे रहने वाले परिवारों पर पड़ता है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य शुरू किए गए हैं। प्रभावित इलाकों में अधिकारियों की टीमें भेजी गई हैं और स्थिति की निगरानी की जा रही है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत सामग्री उपलब्ध कराने और जलभराव वाले क्षेत्रों में जरूरी सहायता पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ओर से तटबंधों की स्थिति का निरीक्षण किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जहां भी तटबंधों को नुकसान पहुंचा है, वहां अस्थायी मरम्मत के साथ-साथ स्थायी समाधान की योजना पर भी काम किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा है कि बाढ़ की स्थिति सामान्य होने के बाद कमजोर हिस्सों की पहचान कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि नदी तटबंधों की सुरक्षा केवल आपातकालीन मरम्मत से संभव नहीं है। इसके लिए नियमित निगरानी, वैज्ञानिक अध्ययन और समय पर रखरखाव की आवश्यकता होती है। मानसून से पहले तटबंधों की स्थिति की जांच और कमजोर हिस्सों को मजबूत करना जरूरी है, ताकि बाढ़ के दौरान नुकसान को कम किया जा सके।

कानी नदी से जुड़ी समस्या केवल इस साल की नहीं है। पिछले कई वर्षों से स्थानीय लोग तटबंध टूटने की घटनाओं का सामना कर रहे हैं। बार-बार आने वाली बाढ़ से खेती प्रभावित होती है और ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ता है। किसानों को फसलों के नुकसान के साथ-साथ पशुओं और घरेलू सामान की सुरक्षा की चिंता भी बनी रहती है।

ग्रामीणों का कहना है कि हर मानसून में राहत कार्यों पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में पर्याप्त काम नहीं हो पाया है। उनका कहना है कि यदि तटबंधों को मजबूत नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में भी यही स्थिति दोहराई जा सकती है।

प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के साथ-साथ भविष्य के लिए मजबूत योजना तैयार करना है। कानी नदी के तटबंधों की लगातार टूटने वाली घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि केवल तत्काल मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि नदी प्रबंधन और तटबंध सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक योजना की जरूरत है।

फिलहाल जाजपुर जिले के दशरथपुर ब्लॉक में बाढ़ प्रभावित लोग प्रशासन से राहत और स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कानी नदी की बढ़ती चुनौती ने एक बार फिर ओडिशा में बाढ़ प्रबंधन और तटबंध सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है।

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