ओडिशा

पत्नी के रहते दूसरी शादी करने पहुंचा दूल्हा, मंदिर में मचा हंगामा

Kavita2
24 Oct 2026 11:55 AM IST
पत्नी के रहते दूसरी शादी करने पहुंचा दूल्हा, मंदिर में मचा हंगामा
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जाजपुर। ओडिशा के जाजपुर जिले में दूसरी शादी करने पहुंचे एक युवक को उस समय मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जब उसकी पहली पत्नी अचानक मंदिर पहुंच गई और शादी का विरोध करने लगी। यह मामला जिले के जारका स्थित त्रिनाथ मंदिर का है, जहां केंद्रपाड़ा जिले के पट्टामुंडई निवासी बिभुदेंदु पाढ़ी दूसरी महिला से विवाह करने की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान उसकी पहली पत्नी सुचिस्मिता पांडा अपने परिवार के सदस्यों के साथ मौके पर पहुंची और विवाह रुकवा दिया। महिला ने आरोप लगाया कि उसका पति बिना कानूनी तलाक लिए दूसरी शादी कर रहा था। घटना की जानकारी मिलने के बाद धर्मशाला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को हिरासत में लेकर थाने चली गई।

मंदिर परिसर में अचानक हुए इस घटनाक्रम से कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया। विवाह की तैयारियों के बीच पहली पत्नी के पहुंचने और गंभीर आरोप लगाने से दोनों पक्षों के बीच विवाद खड़ा हो गया। पुलिस अब शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

मंदिर में चल रही थीं दूसरी शादी की तैयारियां

मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रपाड़ा जिले के पट्टामुंडई इलाके का रहने वाला बिभुदेंदु पाढ़ी जाजपुर जिले के जारका स्थित त्रिनाथ मंदिर में एक महिला से विवाह करने पहुंचा था।

मंदिर में शादी की तैयारियां चल रही थीं। इसी बीच उसकी पहली पत्नी सुचिस्मिता पांडा को कथित तौर पर विवाह की जानकारी मिल गई।

इसके बाद सुचिस्मिता अपने परिवार के कुछ सदस्यों के साथ मंदिर पहुंच गई। वहां उसने बिभुदेंदु को दूसरी महिला से विवाह करने की तैयारी करते देखा।

महिला ने तत्काल शादी का विरोध शुरू कर दिया। उसने आरोप लगाया कि बिभुदेंदु पहले से विवाहित है और दोनों के बीच अब तक कानूनी रूप से तलाक नहीं हुआ है।

इस विरोध के बाद मंदिर में मौजूद लोगों के बीच हलचल मच गई और विवाह की प्रक्रिया रुक गई।

पहली पत्नी ने लगाया बिना तलाक दूसरी शादी का आरोप

सुचिस्मिता पांडा ने आरोप लगाया कि बिभुदेंदु पाढ़ी उसका कानूनी रूप से विवाहित पति है।

उसका कहना है कि दोनों के बीच वैवाहिक संबंध समाप्त करने के लिए अभी तक किसी सक्षम अदालत से तलाक का अंतिम आदेश नहीं मिला है।

ऐसी स्थिति में पति द्वारा दूसरी महिला से विवाह करने की तैयारी को लेकर उसने आपत्ति जताई।

महिला ने कहा कि जब तक पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त नहीं हो जाती, तब तक दूसरी शादी करने का अधिकार नहीं है।

हालांकि, महिला के आरोपों और दोनों के वैवाहिक दस्तावेजों की जांच पुलिस द्वारा की जानी बाकी है। मामले की वास्तविक कानूनी स्थिति संबंधित रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

पहली पत्नी की शिकायत पर पहुंची धर्मशाला पुलिस

मंदिर में विवाद की सूचना मिलने के बाद धर्मशाला थाना पुलिस सक्रिय हुई। पुलिसकर्मी त्रिनाथ मंदिर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत की।

पहली पत्नी की शिकायत को देखते हुए पुलिस बिभुदेंदु पाढ़ी को अपने साथ थाने ले गई और पूछताछ के लिए हिरासत में रखा।

पुलिस के सामने मुख्य सवाल यह है कि बिभुदेंदु और सुचिस्मिता के बीच पहली शादी की वर्तमान कानूनी स्थिति क्या है।

इसके लिए विवाह संबंधी दस्तावेजों, अदालत में चल रहे मामलों और संभावित तलाक आदेश की जांच महत्वपूर्ण होगी।

हालांकि, युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिए जाने और उसके खिलाफ औपचारिक गिरफ्तारी की कार्रवाई होने में कानूनी अंतर है। उपलब्ध जानकारी में अभी उसकी औपचारिक गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

हाईकोर्ट में भी चल रहा है दोनों के बीच मामला

बिभुदेंदु पाढ़ी और सुचिस्मिता पांडा के बीच वैवाहिक विवाद से संबंधित एक मामला ओडिशा हाईकोर्ट में भी दर्ज है।

उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, सुचिस्मिता पांडा बनाम बिभुदेंदु पाढ़ी मामले में 9 अक्टूबर 2026 को सुनवाई हुई थी।

यह मामला एक वैवाहिक कार्यवाही के स्थानांतरण से संबंधित याचिका का है। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता ने स्थानांतरण अनुरोध पर आपत्ति नहीं होने की जानकारी दी थी।

हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उपस्थित नहीं होने के कारण अदालत ने मामले की सुनवाई नवंबर के अंतिम सप्ताह तक स्थगित कर दी।

इस आदेश में दोनों के तलाक को अंतिम मंजूरी मिलने का उल्लेख नहीं है। फिर भी केवल इस न्यायिक आदेश से उनकी संपूर्ण वैवाहिक स्थिति का अंतिम निर्धारण नहीं किया जा सकता।

बिना तलाक दूसरी शादी करने पर क्या कहता है कानून?

भारत में पहली शादी कानूनी रूप से कायम रहने के दौरान दूसरी शादी करने का मामला संबंधित विवाह कानून और पक्षकारों पर लागू व्यक्तिगत कानून के आधार पर तय होता है।

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत सामान्यतः पहली शादी के वैध रूप से समाप्त हुए बिना दूसरी शादी नहीं की जा सकती।

ऐसी स्थिति में संबंधित कानूनी शर्तें पूरी होने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 82 के तहत द्विविवाह का मामला बन सकता है।

हालांकि, इसके लिए पहली शादी का वैध होना, उसका कानूनी रूप से जारी रहना और दूसरी शादी के आवश्यक वैवाहिक संस्कार या कानूनी औपचारिकताएं पूरी होना महत्वपूर्ण तथ्य हैं।

केवल दूसरी शादी की तैयारी करने और दूसरी शादी विधिवत संपन्न हो जाने में भी अंतर है। इसलिए पुलिस को यह पता लगाना होगा कि मंदिर में विवाह की प्रक्रिया किस चरण तक पहुंची थी।

दूसरी महिला की जानकारी की भी हो सकती है जांच

इस मामले में दूसरी शादी करने के लिए मंदिर पहुंची महिला की जानकारी भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि उसे बिभुदेंदु की पहली शादी और वैवाहिक विवाद की जानकारी थी या नहीं।

इसके अलावा यह भी देखा जा सकता है कि विवाह के संबंध में दोनों पक्षों के परिवारों के बीच क्या बातचीत हुई थी।

हालांकि, फिलहाल दूसरी महिला के खिलाफ किसी तरह की कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।

पुलिस जांच में संबंधित लोगों के बयान और दस्तावेज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पारिवारिक विवाद के बीच रुकी शादी

इस पूरे घटनाक्रम में पहली पत्नी सुचिस्मिता पांडा की शिकायत के बाद प्रस्तावित दूसरी शादी रुक गई।

मामले में पहली पत्नी का दावा है कि उसके और बिभुदेंदु के बीच वैवाहिक संबंध अब भी कानूनन कायम हैं। इसी आधार पर उसने दूसरी शादी का विरोध किया।

दूसरी ओर, बिभुदेंदु की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हो सकी है।

अब पुलिस को दोनों पक्षों की बात सुनने और आवश्यक रिकॉर्ड देखने के बाद तय करना होगा कि इस मामले में किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

पुलिस की जांच पर टिकी नजर

जारका के त्रिनाथ मंदिर में हुई इस घटना ने एक बार फिर वैवाहिक विवाद और दूसरी शादी से जुड़े कानूनी सवालों को चर्चा में ला दिया है।

मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू पहली शादी की कानूनी स्थिति और दूसरी शादी की वास्तविक प्रक्रिया है।

धर्मशाला पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि बिभुदेंदु पाढ़ी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आधार बनता है या नहीं।

फिलहाल पहली पत्नी की शिकायत पर युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी है। पूरे मामले में आगे की कार्रवाई वैवाहिक दस्तावेजों, संबंधित पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

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