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ओडिशा में मां माणिकेश्वरी की भव्य छतर यात्रा, हजारों श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब

Kavita2
19 Oct 2026 10:50 AM IST
ओडिशा में मां माणिकेश्वरी की भव्य छतर यात्रा, हजारों श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब
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भवानीपटना। ओडिशा के कालाहांडी जिले के मुख्यालय भवानीपटना में सोमवार, 19 अक्टूबर को मां माणिकेश्वरी की प्रसिद्ध वार्षिक छतर यात्रा धार्मिक श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई। इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। सुबह पांच बजे जेनाखाल से शुरू हुई शोभायात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर मां माणिकेश्वरी मंदिर पहुंची। इस दौरान पूरे शहर में भक्तिमय माहौल बना रहा। मां माणिकेश्वरी के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। छतर यात्रा कालाहांडी जिले के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में से एक मानी जाती है।

सुबह पांच बजे शुरू हुई ऐतिहासिक छतर यात्रा

सोमवार तड़के भवानीपटना में मां माणिकेश्वरी की छतर यात्रा की शुरुआत पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुई। सुबह पांच बजे जेनाखाल से देवी का पवित्र छतर निकाला गया।

छतर यात्रा के स्वागत के लिए मार्ग के दोनों ओर हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई, श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ता गया। भक्तों ने मां माणिकेश्वरी के जयकारे लगाकर अपनी आस्था व्यक्त की।

पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच निकली शोभायात्रा ने भवानीपटना को भक्तिमय बना दिया।

सुबह 7:44 बजे मंदिर पहुंची शोभायात्रा

निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए पवित्र छतर सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर मां माणिकेश्वरी मंदिर पहुंचा। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी के छतर के दर्शन के लिए मौजूद रहे।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छतर को मां माणिकेश्वरी की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण श्रद्धालु इसके दर्शन को विशेष महत्व देते हैं।

मंदिर परिसर में पवित्र छतर के पहुंचने के साथ ही यात्रा का प्रमुख चरण संपन्न हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने देवी की आराधना की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की।

ओडिशा के साथ पड़ोसी राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु

मां माणिकेश्वरी की प्रसिद्ध छतर यात्रा में केवल ओडिशा ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

इस वर्ष भी छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न क्षेत्रों से भक्त भवानीपटना पहुंचे।

श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि देवी के प्रति विश्वास और पारंपरिक संस्कृति से जुड़ने का विशेष अवसर होता है।

कालाहांडी क्षेत्र में मां माणिकेश्वरी के प्रति गहरी आस्था है। कई परिवार वर्षों से इस वार्षिक यात्रा में शामिल होते रहे हैं।

पारंपरिक घुमुरा वाद्य की धुन पर निकली यात्रा

छतर यात्रा की सबसे प्रमुख विशेषताओं में पारंपरिक घुमुरा वाद्य की प्रस्तुति शामिल है।

घुमुरा ओडिशा की प्रसिद्ध लोक परंपराओं से जुड़ा वाद्य और नृत्य रूप है। इसका कालाहांडी की सांस्कृतिक पहचान से गहरा संबंध है।

यात्रा के दौरान पारंपरिक संगीत और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व रहता है। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच पवित्र छतर को मंदिर तक लाया जाता है।

यह परंपरा क्षेत्र की लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का माध्यम है।

कालाहांडी की आराध्य देवी हैं मां माणिकेश्वरी

मां माणिकेश्वरी को कालाहांडी क्षेत्र की आराध्य देवी माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से उनका संबंध कालाहांडी के राजपरिवार और क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं से रहा है।

स्थानीय लोगों की मान्यता है कि देवी अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

मां माणिकेश्वरी मंदिर कालाहांडी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। विशेष रूप से नवरात्रि और दशहरा के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है।

छतर यात्रा के समय पूरे भवानीपटना में विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है।

आदिवासी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का अनूठा संगम

छतर यात्रा की विशेषता यह भी है कि इसमें आदिवासी परंपराओं और शक्ति उपासना का संगम दिखाई देता है।

कालाहांडी क्षेत्र अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, लोकनृत्य और धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है।

छतर यात्रा इन्हीं सांस्कृतिक विशेषताओं को प्रदर्शित करती है। इसमें देवी की पूजा के साथ पारंपरिक संगीत और स्थानीय रीति-रिवाजों को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है।

यह आयोजन क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी भूमिका निभाता है।

सुरक्षा के लिए 15 प्लाटून पुलिस बल तैनात

छतर यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए।

प्रशासन की ओर से 15 प्लाटून पुलिस बल और 95 पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई। इसके अलावा भीड़ की निगरानी के लिए 25 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

प्रशासन का उद्देश्य धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना था।

धार्मिक पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण आयोजन

मां माणिकेश्वरी की छतर यात्रा का धार्मिक महत्व होने के साथ पर्यटन की दृष्टि से भी विशेष स्थान है।

इस आयोजन के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु भवानीपटना पहुंचते हैं। इससे स्थानीय व्यापार, परिवहन, होटल और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को भी आर्थिक गतिविधियों का अवसर मिलता है।

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने में ऐसे पारंपरिक उत्सव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कालाहांडी की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक धार्मिक आयोजनों की पहचान इस यात्रा के माध्यम से दूर-दूर तक पहुंचती है।

आस्था और परंपरा के साथ संपन्न हुआ आयोजन

सोमवार को आयोजित मां माणिकेश्वरी की छतर यात्रा ने एक बार फिर कालाहांडी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की।

हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और देवी के प्रति अटूट आस्था इस आयोजन की प्रमुख विशेषताएं रहीं।

जेनाखाल से मां माणिकेश्वरी मंदिर तक निकली इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपराओं का पालन किया और देवी से सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।

यह वार्षिक आयोजन आज भी कालाहांडी के लोगों को उनकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।

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