
भुवनेश्वर। ओडिशा में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। राज्य की विजिलेंस टीम ने नुआपाड़ा जिले के सुनाबेड़ा वन्यजीव प्रभाग में पदस्थ एक वरिष्ठ सहायक को करीब 2.60 करोड़ रुपये के सरकारी धन की हेराफेरी के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान बाबूलू सुना के रूप में हुई है, जो प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) कार्यालय के स्थापना अनुभाग में वरिष्ठ सहायक-सह-प्रभारी के पद पर कार्यरत था। विजिलेंस के अनुसार, आरोपी पिछले छह महीने से फरार था और उसे बलांगीर से गिरफ्तार किया गया।
विजिलेंस की जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कथित तौर पर सरकारी कर्मचारियों के कैरियर प्रगति लाभ से संबंधित योजनाओं के नाम पर फर्जी बिल तैयार किए और सरकारी धन का दुरुपयोग किया। जांच एजेंसी के मुताबिक, वर्ष 2023 से कुल 2,60,21,306 रुपये की वित्तीय अनियमितता का पता चला है।
छह महीने से फरार आरोपी बलांगीर से गिरफ्तार
ओडिशा विजिलेंस के अनुसार, आरोपी बाबूलू सुना पिछले छह महीने से फरार चल रहा था।
विजिलेंस टीम उसकी तलाश कर रही थी। इसी बीच उसे बलांगीर में गिरफ्तार किया गया।
आरोपी नुआपाड़ा जिले के सुनाबेड़ा वन्यजीव प्रभाग में वरिष्ठ सहायक-सह-प्रभारी के रूप में कार्यरत था।
उसके खिलाफ सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से संबंधित मामला दर्ज है।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को विशेष न्यायाधीश, सतर्कता, भवानीपटना की अदालत में पेश करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
हालांकि गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से किसी नकदी या दस्तावेज की बरामदगी का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
फर्जी बिल बनाकर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप
विजिलेंस के अनुसार, आरोपी पर संशोधित सुनिश्चित कैरियर प्रगति से संबंधित एमएसीपी और आरएसीपी योजनाओं के तहत फर्जी बिल तैयार करने का आरोप है।
इन योजनाओं का संबंध पात्र सरकारी कर्मचारियों को निर्धारित नियमों के अनुसार वित्तीय उन्नयन का लाभ देने से है।
आरोप है कि बाबूलू सुना ने इन योजनाओं से संबंधित बिलों में कथित अनियमितताएं कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया।
जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपी ने स्थापना अनुभाग में अपनी जिम्मेदारी और पद का अनुचित लाभ उठाया।
हालांकि फर्जी बिलों की कुल संख्या और उनसे संबंधित कर्मचारियों का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।
वर्ष 2023 से चल रही थी कथित वित्तीय अनियमितता
ओडिशा विजिलेंस ने बताया कि वित्तीय रिकॉर्ड के विस्तृत सत्यापन और जांच के दौरान सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का पता चला।
जांच के अनुसार, वर्ष 2023 से कुल 2,60,21,306 रुपये की रकम में अनियमितता हुई।
आरोपी पर स्थापना अनुभाग में अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है।
यह रकम लगभग 2.60 करोड़ रुपये है।
इतनी बड़ी राशि से जुड़ी कथित अनियमितता ने सरकारी वित्तीय प्रक्रियाओं और भुगतान व्यवस्था की निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि जांच में सामने आई रकम किन-किन वित्तीय वर्षों में और कितनी किस्तों में निकाली गई, इसका पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है।
डीएफओ कार्यालय के स्थापना अनुभाग में था पदस्थ
आरोपी बाबूलू सुना सुनाबेड़ा वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी कार्यालय में कार्यरत था।
वह स्थापना अनुभाग में वरिष्ठ सहायक-सह-प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहा था।
सरकारी कार्यालयों में स्थापना अनुभाग सामान्यतः कर्मचारियों की सेवा संबंधी जानकारी, वेतन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े कार्यों का संचालन करता है।
ऐसे अनुभागों में वित्तीय लाभ से संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों का महत्व होता है।
विजिलेंस का आरोप है कि बाबूलू सुना ने अपनी पदस्थापना का अनुचित लाभ उठाते हुए कथित वित्तीय गड़बड़ी की।
हालांकि इस मामले में अन्य कर्मचारियों या अधिकारियों की संलिप्तता की कोई पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।
क्या हैं एमएसीपी और आरएसीपी योजनाएं?
एमएसीपी और आरएसीपी जैसी कैरियर प्रगति व्यवस्थाओं का उद्देश्य निर्धारित शर्तों के अनुसार पात्र कर्मचारियों को वित्तीय उन्नयन प्रदान करना होता है।
ऐसी व्यवस्थाओं में कर्मचारियों की सेवा अवधि, पात्रता और संबंधित प्रशासनिक नियमों के आधार पर वित्तीय लाभ निर्धारित किए जाते हैं।
इन लाभों की स्वीकृति और भुगतान के लिए आवश्यक अभिलेखों तथा बिलों का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है।
इस मामले में विजिलेंस का आरोप है कि इन्हीं योजनाओं से संबंधित फर्जी बिल तैयार करके सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
हालांकि संबंधित कर्मचारियों को वास्तविक रूप से कोई लाभ मिला था या नहीं, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
रिकॉर्ड के सत्यापन से सामने आई गड़बड़ी
ओडिशा विजिलेंस के अनुसार, वित्तीय अनियमितताओं का पता विस्तृत सत्यापन और जांच के बाद चला।
जांच एजेंसी ने संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल के आधार पर आरोपी की कथित भूमिका सामने आने की जानकारी दी है।
सरकारी धन के भुगतान से जुड़े मामलों में बिल, स्वीकृति आदेश और अन्य वित्तीय दस्तावेज महत्वपूर्ण होते हैं।
इनके आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि किसी भुगतान की स्वीकृति नियमानुसार हुई थी या नहीं।
हालांकि विजिलेंस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि कथित फर्जी बिल किस तरीके से तैयार किए गए और भुगतान किस माध्यम से किया गया।
इस संबंध में जांच के आगे बढ़ने पर अतिरिक्त जानकारी सामने आ सकती है।
सरकारी धन की सुरक्षा पर उठे सवाल
सरकारी कार्यालय में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता सामने आने से आंतरिक निगरानी और भुगतान सत्यापन की व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कर्मचारियों को मिलने वाले वित्तीय लाभों का भुगतान निर्धारित नियमों और आवश्यक अनुमोदन के आधार पर किया जाता है।
ऐसी स्थिति में फर्जी बिलों के माध्यम से धन निकालने के आरोप गंभीर माने जाते हैं।
इस मामले में जांच एजेंसी को यह स्थापित करना होगा कि कथित अनियमित भुगतान कैसे हुए और किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित वित्तीय प्रक्रियाओं में निर्धारित नियंत्रणों का पालन हुआ था या नहीं।
विशेष विजिलेंस अदालत में पेश किया जाएगा आरोपी
गिरफ्तारी के बाद बाबूलू सुना को विशेष न्यायाधीश, सतर्कता, भवानीपटना की अदालत में पेश किए जाने की जानकारी दी गई है।
अदालत में मामले से संबंधित कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
विजिलेंस की जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण होंगे।
हालांकि आरोपी के खिलाफ लगाई गई विशिष्ट कानूनी धाराओं और अदालत में उसकी पेशी के परिणाम की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
आगे की जांच में सामने आ सकते हैं नए तथ्य
ओडिशा विजिलेंस की कार्रवाई के बाद इस मामले में वित्तीय रिकॉर्ड और कथित फर्जी बिलों से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।
जांच एजेंसी को यह स्पष्ट करना होगा कि वर्ष 2023 से कथित तौर पर 2.60 करोड़ रुपये से अधिक की रकम का दुरुपयोग किस प्रकार किया गया।
इसके साथ ही संबंधित भुगतान प्रक्रिया और अभिलेखों की जांच से मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी अन्य व्यक्ति की गिरफ्तारी या संलिप्तता की पुष्टि नहीं की गई है।
छह महीने बाद गिरफ्तारी, अब अदालत में चलेगी प्रक्रिया
नुआपाड़ा जिले के सुनाबेड़ा वन्यजीव प्रभाग में करीब 2.60 करोड़ रुपये के सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद ओडिशा विजिलेंस ने बड़ी कार्रवाई की है।
आरोपी वरिष्ठ सहायक बाबूलू सुना को छह महीने तक फरार रहने के बाद बलांगीर से गिरफ्तार किया गया।
विजिलेंस के अनुसार, आरोपी ने वर्ष 2023 से अपने पद का कथित दुरुपयोग करते हुए एमएसीपी और आरएसीपी योजनाओं के नाम पर फर्जी बिल तैयार किए।
जांच में कुल 2,60,21,306 रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आने का दावा किया गया है।
अब अदालत की कार्यवाही और जांच के अगले चरण में इस कथित घोटाले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि होगी।





