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कोटिया की सीमा पर गूगल मैप्स में गड़बड़ी, सुधार की कवायद तेज

Kavita2
22 Aug 2026 10:10 AM IST
कोटिया की सीमा पर गूगल मैप्स में गड़बड़ी, सुधार की कवायद तेज
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भुवनेश्वर। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के केंद्र में रहे कोरापुट जिले के कोटिया क्षेत्र को लेकर अब डिजिटल मैपिंग पर भी सवाल उठने लगे हैं। गूगल मैप्स पर कोटिया की प्रशासनिक सीमा और क्षेत्रीय पहचान कथित तौर पर गलत तरीके से प्रदर्शित किए जाने के बाद यह मामला संवेदनशील रूप लेता जा रहा है। ओडिशा सरकार ने डिजिटल मैपिंग प्लेटफॉर्म पर इलाके की सीमा को सही तरीके से प्रदर्शित कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

कोटिया क्षेत्र पहले से ही ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच सीमा और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर विवाद का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी क्षेत्र की सीमा का गलत चित्रण केवल तकनीकी त्रुटि तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे स्थानीय लोगों के बीच क्षेत्रीय पहचान और प्रशासनिक स्थिति को लेकर भ्रम पैदा होने की आशंका भी जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि इस मुद्दे को सबसे पहले दंडकारण्य विकास महामंच ने प्रमुखता से उठाया। संगठन की ओर से गूगल इंडिया और गूगल एलएलसी से संपर्क कर कोटिया क्षेत्र से संबंधित डिजिटल नक्शे में आवश्यक सुधार करने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि संवेदनशील सीमा क्षेत्र होने के कारण डिजिटल मैपिंग में प्रशासनिक सीमाओं का सटीक और आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुरूप प्रदर्शित होना बेहद जरूरी है।

मामला केवल गूगल के स्तर तक सीमित नहीं रहा। संगठन ने भारत के सर्वेयर जनरल को भी ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की। ज्ञापन के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया गया कि आधिकारिक सर्वेक्षण और प्रशासनिक सीमाओं के आधार पर डिजिटल मैपिंग में मौजूद विसंगतियों को दूर कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

कोटिया का विवाद ऐतिहासिक रूप से जटिल रहा है। कोरापुट जिले का यह सीमावर्ती इलाका कई गांवों और बस्तियों से मिलकर बना है, जहां ओडिशा और आंध्र प्रदेश दोनों की ओर से प्रशासनिक पहुंच और प्रभाव को लेकर लंबे समय से तनाव रहा है। विभिन्न समय पर दोनों राज्यों की सरकारों की ओर से अपने-अपने प्रशासनिक अधिकारों को लेकर दावे किए जाते रहे हैं। यही वजह है कि कोटिया में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन, बिजली और अन्य सरकारी सुविधाओं से जुड़े कदम भी अक्सर सीमा विवाद के संदर्भ में देखे जाते हैं।

इस पृष्ठभूमि में डिजिटल मैपिंग की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। आज गूगल मैप्स जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आम नागरिकों से लेकर सरकारी एजेंसियों, कारोबारियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों तक बड़ी संख्या में लोग करते हैं। ऐसे में किसी संवेदनशील सीमा क्षेत्र को लेकर नक्शे में दिखाई देने वाली जानकारी लोगों की धारणा को प्रभावित कर सकती है। स्थानीय स्तर पर यह चिंता भी सामने आई है कि यदि डिजिटल नक्शे में प्रशासनिक पहचान स्पष्ट नहीं होगी, तो बाहरी लोगों के बीच क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।

ओडिशा सरकार की ओर से अब यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है कि कोटिया की प्रशासनिक सीमा और क्षेत्रीय पहचान आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुरूप डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित हो। इसके लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा आवश्यक दस्तावेजों और आधिकारिक मानचित्रों के आधार पर सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, विवादित या संवेदनशील सीमा क्षेत्रों के डिजिटल मानचित्रण में विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित सीमाएं कई बार उपयोगकर्ताओं के लिए आधिकारिक सीमा का अंतिम प्रमाण नहीं होतीं, लेकिन आम जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता काफी अधिक होती है। इसलिए ऐसे क्षेत्रों में नक्शे की जानकारी को प्रमाणिक सरकारी स्रोतों से लगातार मिलान करना जरूरी है।

कोटिया मामले में भी यही सवाल प्रमुख है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित जानकारी किस आधिकारिक स्रोत के आधार पर तैयार की गई है और उसमें बदलाव की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है। ओडिशा सरकार और संबंधित संगठनों की कोशिश अब यही है कि आधिकारिक सीमांकन से जुड़ी जानकारी को डिजिटल मैपिंग कंपनियों तक पहुंचाया जाए और किसी भी प्रकार की गलत प्रस्तुति को सुधारा जाए।

सीमा विवाद के बीच कोटिया में डिजिटल पहचान का यह मुद्दा सामने आने से राज्य सरकार के लिए चुनौती और बढ़ गई है। एक ओर उसे क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकार और विकास योजनाओं को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट रखनी है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध जानकारी को भी आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुरूप कराने की जरूरत है।

फिलहाल इस मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर है। यदि गूगल मैप्स पर प्रदर्शित सीमा में आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर संशोधन किया जाता है, तो इसे कोटिया की प्रशासनिक और क्षेत्रीय पहचान को डिजिटल माध्यम पर स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम ने यह बहस भी तेज कर दी है कि संवेदनशील सीमा क्षेत्रों की डिजिटल मैपिंग में सरकारी संस्थाओं और निजी तकनीकी कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय कितना जरूरी है।

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