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GI टैग वाली कलबुर्गी तोगरी दाल अब मालदीव पहुंची, 1 मीट्रिक टन की पहली खेप भेजी गई

Kavita2
27 Sept 2026 11:34 AM IST
GI टैग वाली कलबुर्गी तोगरी दाल अब मालदीव पहुंची, 1 मीट्रिक टन की पहली खेप भेजी गई
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नई दिल्ली। कर्नाटक की GI यानी जियोग्राफिकल इंडिकेशन का दर्जा प्राप्त कलबुर्गी तोगरी दाल अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कलबुर्गी की इस प्रसिद्ध दाल का मालदीव को निर्यात शुरू किया गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को इसकी जानकारी साझा की।

पीयूष गोयल के मुताबिक एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी APEDA ने 24 सितंबर को मालदीव के लिए एक मीट्रिक टन कलबुर्गी तोगरी दाल की खेप भेजी। इस निर्यात को GI-सर्टिफाइड कृषि उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।

केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर कहा कि GI प्रमाणित कलबुर्गी दाल का मालदीव को निर्यात वैश्विक बाजार में इस उत्पाद के लिए नए अवसर पैदा करने की दिशा में अहम कदम है। इस पहल के जरिए स्थानीय कृषि उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

कलबुर्गी तोगरी दाल को GI टैग मिलने के बाद इसकी पहचान केवल स्थानीय या घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रही है। GI टैग किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से जुड़े ऐसे उत्पादों को दिया जाता है, जिनकी खास पहचान, गुणवत्ता या प्रतिष्ठा उस क्षेत्र से संबंधित होती है। कलबुर्गी तोगरी दाल भी अपनी क्षेत्रीय पहचान के कारण इस श्रेणी में शामिल है।

मालदीव को भेजी गई एक मीट्रिक टन की खेप को कृषि उत्पादों के निर्यात के लिहाज से एक शुरुआती कदम माना जा रहा है। इसके जरिए कलबुर्गी तोगरी दाल को विदेशी उपभोक्ताओं और बाजारों तक पहुंचाने की संभावना बढ़ेगी। आगे इस तरह के निर्यात से उत्पाद की मांग बढ़ने पर किसानों और उससे जुड़े संगठनों को नए बाजार मिल सकते हैं।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में GI प्रमाणित कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की दिशा में भी पहल की जा रही है।

पीयूष गोयल ने अपने पोस्ट में कहा कि इस पहल का उद्देश्य भारत के GI-सर्टिफाइड कृषि उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार का विस्तार करना है। साथ ही कृषि उत्पादों के निर्यात में किसान उत्पादक संगठनों यानी FPO के नेतृत्व वाले ब्रांड्स की भागीदारी को मजबूत करना भी इसका एक प्रमुख उद्देश्य है।

FPO यानी किसान उत्पादक संगठन किसानों को एक साथ लाकर कृषि उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन में सामूहिक भूमिका निभाने का अवसर देते हैं। ऐसे संगठनों के जरिए किसानों के उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने और ब्रांड के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जा सकती है।

कलबुर्गी तोगरी दाल के निर्यात में FPO आधारित ब्रांडिंग को बढ़ावा देने की बात भी महत्वपूर्ण है। इससे कृषि उत्पादों की बिक्री केवल स्थानीय मंडियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें संगठित तरीके से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेश करने की संभावना बनती है।

मालदीव भारत के करीब स्थित प्रमुख पड़ोसी देशों में शामिल है। दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में व्यापारिक संबंध हैं। ऐसे में भारतीय कृषि उत्पादों के लिए मालदीव का बाजार निर्यात के नए अवसर उपलब्ध करा सकता है।

कलबुर्गी तोगरी दाल की एक मीट्रिक टन खेप 24 सितंबर को मालदीव भेजी गई। इस निर्यात के जरिए GI टैग वाले क्षेत्रीय कृषि उत्पाद को विदेशी बाजार में पहुंचाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।

कृषि उत्पादों के निर्यात से किसानों को अपने उत्पादों के लिए व्यापक बाजार मिल सकता है। यदि किसी उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बनती है तो उत्पादन, पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग से जुड़े स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है।

GI टैग वाले उत्पादों की विशेषता यह होती है कि उनकी पहचान किसी खास क्षेत्र से जुड़ी होती है। ऐसे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी भौगोलिक पहचान के साथ प्रस्तुत करने से उनकी अलग ब्रांड वैल्यू बनाने की संभावना रहती है।

कलबुर्गी तोगरी दाल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचाने की पहल इसी दिशा में देखी जा रही है। मालदीव को भेजी गई पहली खेप के बाद भविष्य में अन्य देशों में भी ऐसे उत्पादों के लिए बाजार तलाशने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

APEDA कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली प्रमुख संस्था है। इसके माध्यम से भारतीय कृषि उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने और निर्यातकों को विभिन्न स्तरों पर सहयोग देने की दिशा में काम किया जाता है।

इस पहल में GI-सर्टिफाइड कृषि उत्पादों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। भारत के अलग-अलग राज्यों में कई ऐसे कृषि उत्पाद हैं, जिन्हें GI टैग प्राप्त है। इन्हें वैश्विक बाजार में पहचान दिलाने के लिए निर्यात और ब्रांडिंग को महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

कलबुर्गी तोगरी दाल के मालदीव निर्यात से कर्नाटक के इस क्षेत्रीय उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़े किसानों और संगठनों के लिए भी नए बाजारों तक पहुंच का रास्ता खुल सकता है।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार इस पहल का व्यापक उद्देश्य भारत के GI प्रमाणित कृषि उत्पादों का अंतरराष्ट्रीय बाजार बढ़ाना है। इसके साथ ही FPO के नेतृत्व वाले ब्रांड्स की निर्यात में भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

एक मीट्रिक टन की शुरुआती खेप भले ही मात्रा के लिहाज से सीमित हो, लेकिन यह GI-सर्टिफाइड कृषि उत्पादों को विदेशी बाजार से जोड़ने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आगे मांग और बाजार की प्रतिक्रिया के आधार पर निर्यात की मात्रा बढ़ सकती है।

इससे किसानों के उत्पादों को नए खरीदार मिलने के साथ कृषि क्षेत्र में पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। खासकर FPO के जरिए उत्पादों को संगठित ब्रांड के रूप में बाजार में उतारने से किसानों की सामूहिक भागीदारी मजबूत हो सकती है।

फिलहाल 24 सितंबर को भेजी गई एक मीट्रिक टन कलबुर्गी तोगरी दाल की खेप मालदीव पहुंचाने की पहल GI उत्पादों के निर्यात विस्तार की दिशा में एक कदम है। केंद्र का लक्ष्य ऐसे उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक अवसर तैयार करना और कृषि निर्यात में किसान संगठनों की भूमिका को मजबूत करना है।

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