
भुवनेश्वर। ओडिशा के लांजीगढ़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक सिबाजी माझी का मंगलवार देर रात निधन हो गया। उन्होंने कालाहांडी जिले के बीजेपुर इलाके में स्थित अपने पैतृक गांव दानारगुडा में अंतिम सांस ली। वह कुछ समय से सीने में दर्द की समस्या से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था।
सिबाजी माझी के निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। उनके समर्थकों और स्थानीय लोगों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में क्षेत्र के विकास और खासकर आदिवासी समुदायों के हितों के लिए महत्वपूर्ण काम किए।
सीने में दर्द के बाद चल रहा था इलाज
जानकारी के अनुसार, सिबाजी माझी को सीने में दर्द की शिकायत के बाद पहले भवानीपटना के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत को देखते हुए बाद में उन्हें बेहतर इलाज के लिए भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।
इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी थी, जिसके बाद वह अपने पैतृक गांव लौट आए थे। हालांकि, मंगलवार देर रात उनकी तबीयत बिगड़ गई और उनका निधन हो गया।
उनके परिवार और समर्थकों के लिए यह एक बड़ा झटका है। स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
लांजीगढ़ विधानसभा क्षेत्र के पहले विधायक बने
सिबाजी माझी ने राजनीति में अपनी पहचान उस समय बनाई, जब लांजीगढ़ विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ था। वह इस नवगठित विधानसभा सीट के पहले विधायक बने थे।
उन्होंने वर्ष 2009 से 2014 तक लांजीगढ़ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं को विधानसभा में उठाया और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
लांजीगढ़ और थुआमूल रामपुर जैसे इलाके भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण और आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास एक बड़ी चुनौती रहा है।
आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर दिया जोर
विधायक रहते हुए सिबाजी माझी ने आदिवासी और दूरदराज के इलाकों के विकास को प्राथमिकता दी। उन्होंने स्थानीय लोगों की समस्याओं को समझते हुए विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने का काम किया।
उनके कार्यकाल में क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने, लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और पिछड़े इलाकों के विकास पर ध्यान दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि माझी ने हमेशा क्षेत्र के गरीब, आदिवासी और वंचित वर्गों की आवाज उठाई।
अनुसूचित जाति-जनजाति परिषद के पहले अध्यक्ष
कालाहांडी जिले में विशेष अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति परिषद के गठन के बाद सिबाजी माझी को इसका पहला अध्यक्ष बनाया गया था।
इस जिम्मेदारी के दौरान उन्होंने जिले के आदिवासी और दलित समुदायों के विकास से जुड़े मुद्दों पर काम किया। उन्होंने शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी।
उनके प्रयासों का उद्देश्य पिछड़े समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराना था।
राजनीतिक क्षेत्र में रही अलग पहचान
सिबाजी माझी भले ही लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में नहीं रहे, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रही, जिन्होंने स्थानीय मुद्दों को महत्व दिया।
उनके समर्थकों का कहना है कि वह जमीन से जुड़े नेता थे और आम लोगों की समस्याओं को समझते थे। आदिवासी क्षेत्रों में उनकी पकड़ और लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता उनकी राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
नेताओं और लोगों ने जताया दुख
पूर्व विधायक के निधन की खबर के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने शोक व्यक्त किया।
लोगों ने उन्हें क्षेत्र के विकास और समाज के कमजोर वर्गों के लिए काम करने वाले नेता के रूप में याद किया। उनके निधन को क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति बताया जा रहा है।
अंतिम विदाई की तैयारियां
परिवार और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में सिबाजी माझी का अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में शोक का माहौल है।
सिबाजी माझी का राजनीतिक जीवन भले ही सीमित अवधि का रहा, लेकिन उन्होंने अपने कार्यों के जरिए लांजीगढ़ और कालाहांडी के लोगों के बीच एक अलग पहचान बनाई। आदिवासी और वंचित समुदायों के विकास के लिए उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।





