ओडिशा

Fire team बनी देवदूत, बचाई जानें

Kanchan Paikara
5 July 2026 4:12 PM IST
Fire team बनी देवदूत, बचाई जानें
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Odisha ओडिशा : बौध जिले में लगातार चार दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। इसी बीच सालुंकी नदी के उफनते पानी में दो महिलाएं फंस गईं, जिनकी जान कई घंटों तक एक पेड़ के सहारे टिकी रही। यह घटना इलाके में दहशत और चिंता का कारण बन गई है।
जानकारी के अनुसार, फंसी हुई महिलाओं की पहचान लक्ष्मीपाड़ा गांव की यशोबंती नायक और उनकी रिश्तेदार कुमारी माझी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों महिलाएं पलझर डैम के डाउनस्ट्रीम इलाके में जलावन के लिए लकड़ियां इकट्ठा करने गई थीं। इसी दौरान अचानक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और देखते ही देखते पूरा क्षेत्र पानी से घिर गया।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि दोनों महिलाएं नदी के बीच मौजूद एक पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाने के लिए मजबूर हो गईं। तेज बहाव और उफनती धारा के बीच वे घंटों तक उसी पेड़ से चिपकी रहीं। जैसे ही यह जानकारी स्थानीय लोगों तक पहुंची, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और तुरंत प्रशासन को सूचित किया गया।
सूचना मिलते ही फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची और बचाव अभियान शुरू किया गया। हालांकि, लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया। तेज बहाव के चलते टीम को काफी सावधानी से काम करना पड़ा ताकि किसी तरह की अनहोनी न हो।
स्थानीय लोगों के अनुसार, नदी का जलस्तर अचानक और तेजी से बढ़ा, जिससे महिलाओं को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। आसपास के ग्रामीणों ने भी बचाव कार्य में मदद की और सुरक्षित दूरी से रेस्क्यू टीम का सहयोग किया।
फायर ब्रिगेड की टीम ने नाव और सुरक्षा उपकरणों की मदद से महिलाओं को सुरक्षित निकालने की कोशिश शुरू की। काफी प्रयासों के बाद दोनों महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे राहत की सांस ली गई। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने राहत और बचाव टीम की सराहना की।
प्रशासन की ओर से बताया गया है कि लगातार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं, ऐसे में लोगों को नदी किनारे जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले कुछ दिनों तक मौसम और जलस्तर पर नजर रखी जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर बारिश के मौसम में सुरक्षा और सतर्कता की जरूरत को उजागर किया है। ग्रामीण इलाकों में लोग अब भी दैनिक जरूरतों के लिए नदी और जंगल क्षेत्रों पर निर्भर रहते हैं, जिससे इस तरह की घटनाओं का खतरा बना रहता है।
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