
बालेश्वर। ओडिशा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत विजिलेंस विभाग ने शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को बड़ी कार्रवाई की है। बालेश्वर जिले के बालियापाल में पदस्थ महिला सब-रजिस्ट्रार मनीषा मिश्रा को जमीन की रजिस्ट्री कराने के बदले कथित तौर पर सात हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। मनीषा मिश्रा ओडिशा राजस्व सेवा (ORS) की अधिकारी हैं। विजिलेंस विभाग के अनुसार, उन्होंने एक व्यक्ति से जमीन के बिक्री विलेख का पंजीकरण करने के एवज में पहले दस हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में सात हजार रुपये लेते समय विजिलेंस टीम ने उन्हें पकड़ लिया।
जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला बालेश्वर जिले के बालियापाल सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से जुड़ा है। शिकायतकर्ता अपनी जमीन की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों का पंजीकरण कराना चाहता था। इसके लिए उसने सब-रजिस्ट्रार मनीषा मिश्रा से संपर्क किया था। लेकिन आरोप है कि नियमों के अनुसार दस्तावेजों का पंजीकरण संभव होने के बावजूद अधिकारी ने प्रक्रिया पूरी करने से इनकार कर दिया और इसके बदले अवैध राशि की मांग की।
ओडिशा विजिलेंस के अनुसार, संबंधित जमीन का क्षेत्रफल लगभग 0.14 एकड़ बताया गया है। राजस्व अभिलेखों में इस भूमि को 'बज्याप्ति स्थितिवान' (Bajyapti Sthitiban) श्रेणी में दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता का कहना था कि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार, ऐसी भूमि को निर्धारित परिस्थितियों में 'स्थितिवान' मानकर उसका पंजीकरण किया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता ने सरकारी दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए सब-रजिस्ट्रार से कई बार दस्तावेजों का पंजीकरण करने का अनुरोध किया। इसके बावजूद कथित तौर पर उसकी मांग स्वीकार नहीं की गई। आरोप है कि मनीषा मिश्रा ने रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए दस हजार रुपये की रिश्वत मांगी। इससे परेशान होकर शिकायतकर्ता ने विजिलेंस विभाग की मदद लेने का फैसला किया।
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने मामले की जानकारी एकत्र की और रिश्वत की मांग से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की। इसके बाद संबंधित अधिकारी को पकड़ने के लिए योजना तैयार की गई। शुक्रवार को शिकायतकर्ता निर्धारित राशि लेकर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचा। आरोप है कि मनीषा मिश्रा ने उससे सात हजार रुपये स्वीकार किए। इसी दौरान पहले से निगरानी कर रही विजिलेंस टीम ने उन्हें पकड़ लिया।
विजिलेंस विभाग ने बताया कि अधिकारी को रिश्वत की रकम लेते हुए पकड़ा गया है। इसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित आगे की प्रक्रिया शुरू की गई। इस कार्रवाई से राजस्व विभाग के कार्यालयों में कामकाज की पारदर्शिता और सरकारी सेवाओं के लिए कथित रिश्वत की मांग का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
जमीन की रजिस्ट्री एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है। किसी संपत्ति की खरीद-बिक्री के दौरान बिक्री विलेख का पंजीकरण कराया जाता है, ताकि लेनदेन से संबंधित दस्तावेज सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो सकें। इस प्रक्रिया में संबंधित कार्यालय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। नागरिकों को निर्धारित सरकारी शुल्क और नियमों के अनुसार पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
लेकिन कई बार दस्तावेजों के सत्यापन, जमीन की श्रेणी और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं के कारण लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे मामलों में यदि किसी अधिकारी द्वारा अनुचित लाभ की मांग की जाती है, तो शिकायतकर्ता को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ सकती है।
बालियापाल का यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें जमीन की राजस्व श्रेणी को लेकर विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित भूमि का पंजीकरण सरकारी दिशानिर्देशों के अंतर्गत संभव था। इसके बावजूद रजिस्ट्री की प्रक्रिया रोकने और रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, संबंधित भूमि के सभी दस्तावेजों और पंजीकरण की वैधानिक पात्रता की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि आवश्यक होगी।
विजिलेंस की कार्रवाई के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या संबंधित कार्यालय में अन्य लोगों को भी इस प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी अन्य शिकायतकर्ता या अतिरिक्त मामले की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए जांच के निष्कर्ष सामने आने से पहले किसी व्यापक अनियमितता का दावा करना उचित नहीं होगा।
ओडिशा विजिलेंस विभाग सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई करता है। रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोपों से जुड़े मामलों में विभाग शिकायतों की जांच तथा आवश्यक साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाता है। किसी सरकारी कर्मचारी के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद जांच का उद्देश्य आरोपों से संबंधित तथ्य और साक्ष्य जुटाना होता है।
इस तरह के मामलों में शिकायतकर्ता की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। यदि कोई अधिकारी निर्धारित सरकारी कार्य के बदले रिश्वत मांगता है, तो नागरिक संबंधित भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी से शिकायत कर सकते हैं। शिकायत के आधार पर जांच एजेंसी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक कार्रवाई कर सकती है।
मनीषा मिश्रा के खिलाफ सामने आए मामले में विजिलेंस विभाग की कार्रवाई एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक कदम है। हालांकि, किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाना या रिश्वत लेते पकड़े जाने का आरोप लगना न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए जाने के समान नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
राजस्व विभाग से जुड़े कार्यालयों में आम नागरिकों का नियमित संपर्क होता है। जमीन खरीदने, बेचने, संपत्ति के दस्तावेज तैयार कराने और विभिन्न राजस्व संबंधी कार्यों के लिए लोगों को इन कार्यालयों की सेवाएं लेनी पड़ती हैं। ऐसे में सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना आवश्यक माना जाता है।
प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार रोकने के लिए ऑनलाइन सेवाओं, समयबद्ध कार्यप्रणाली और शिकायत निवारण व्यवस्था का महत्व लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि नागरिकों को किसी आवेदन की वर्तमान स्थिति और उसके निस्तारण की समयसीमा की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध हो, तो अनावश्यक देरी और अवैध मांगों की आशंका कम की जा सकती है।
फिलहाल बालियापाल की सब-रजिस्ट्रार मनीषा मिश्रा के खिलाफ सात हजार रुपये की कथित रिश्वत लेने का मामला सामने आने से राजस्व विभाग में हलचल है। विजिलेंस विभाग की आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि रिश्वत की मांग और स्वीकार करने से जुड़े साक्ष्य क्या हैं तथा मामले में आगे कौन-सी कानूनी कार्रवाई की जाती है।





