ओडिशा

बालेश्वर में फर्जी RTO ऑफिस का भंडाफोड़, चालकों से वसूली का आरोप; एक गिरफ्तार

Kavita2
3 Oct 2026 1:12 PM IST
बालेश्वर में फर्जी RTO ऑफिस का भंडाफोड़, चालकों से वसूली का आरोप; एक गिरफ्तार
x

बालेश्वर। ओडिशा के बालेश्वर जिले में पुलिस ने नेशनल हाईवे-16 पर चल रहे एक कथित फर्जी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) का भंडाफोड़ किया है। यह कार्रवाई बास्ता इलाके में लक्ष्मणनाथ टोल गेट के पास की गई, जहां कथित तौर पर ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारी बनकर वाहन चालकों से अवैध तरीके से पैसे वसूले जा रहे थे। पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि रैकेट में शामिल बताया जा रहा एक अन्य व्यक्ति मौके से फरार हो गया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान शंभू साहू के रूप में हुई है। वह पड़ोसी राज्य झारखंड के बारसोल थाना क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, इस पूरे मामले में एक अनधिकृत कार्यालय का इस्तेमाल किया जा रहा था, जहां पहुंचकर लोगों से कथित तौर पर ट्रांसपोर्ट विभाग से जुड़ी कार्रवाई के नाम पर रकम ली जाती थी।

अवैध वसूली की सूचना पर पुलिस ने की कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, जलेश्वर पुलिस को लक्ष्मणनाथ टोल गेट के आसपास वाहनों से अवैध रूप से पैसे वसूले जाने की शिकायत और सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने शुक्रवार को इलाके में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पहले एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया।

पूछताछ और मौके पर की गई जांच के दौरान पुलिस को एक ऐसे कार्यालय के बारे में जानकारी मिली, जिसे कथित तौर पर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय जैसा दिखाने की कोशिश की गई थी। पुलिस का आरोप है कि इस जगह का इस्तेमाल परिवहन विभाग के अधिकारियों की तरह पेश होकर वाहन चालकों से पैसे लेने के लिए किया जा रहा था।

ट्रांसपोर्ट विभाग के नाम पर बनाया गया था सेटअप

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित फर्जी कार्यालय का इस्तेमाल लोगों के बीच यह विश्वास पैदा करने के लिए किया जा रहा था कि वहां ट्रांसपोर्ट विभाग से संबंधित वास्तविक कामकाज होता है। हाईवे पर गुजरने वाले वाहनों और उनके चालकों को कथित तौर पर रोककर विभिन्न मदों में रकम वसूले जाने की बात सामने आई है।

इस तरह के मामलों में आमतौर पर वाहन दस्तावेज, परमिट, टैक्स या अन्य परिवहन संबंधी प्रक्रियाओं का हवाला देकर पैसे लेने की कोशिश की जाती है। हालांकि इस मामले में वास्तव में किस-किस बहाने से रकम वसूली जा रही थी और कितने समय से यह गतिविधि चल रही थी, इसकी पूरी जानकारी पुलिस जांच के बाद सामने आएगी।

एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा फरार

छापेमारी के दौरान पुलिस ने शंभू साहू को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उससे कथित फर्जी कार्यालय और वहां होने वाली गतिविधियों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में लगी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और उनकी भूमिका क्या थी।

पुलिस के मुताबिक, एक अन्य व्यक्ति, जिसे इस रैकेट से जुड़ा बताया जा रहा है, कार्रवाई के दौरान मौके से भागने में सफल रहा। उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फरार आरोपी की पहचान और उसकी भूमिका क्या थी तथा क्या वह लंबे समय से इस गतिविधि में शामिल था।

हाईवे पर चल रहा था कथित फर्जी RTO

लक्ष्मणनाथ टोल गेट के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-16 पर इस तरह का कथित फर्जी RTO कार्यालय सामने आना अपने आप में गंभीर मामला माना जा रहा है। NH-16 ओडिशा के महत्वपूर्ण राजमार्गों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में भारी वाणिज्यिक वाहन और अन्य वाहन नियमित रूप से गुजरते हैं।

ऐसे में पुलिस अब यह भी जांच कर सकती है कि कथित आरोपी केवल स्थानीय स्तर पर वसूली कर रहे थे या हाईवे से गुजरने वाले बाहरी राज्यों के वाहन चालकों को भी निशाना बनाया जाता था। जांच में यह पहलू भी महत्वपूर्ण होगा कि इस गतिविधि से कितने लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ और अब तक कितनी रकम की वसूली की गई।

पुलिस जुटा रही दस्तावेज और अन्य सबूत

मामले की जांच के दौरान पुलिस कथित कार्यालय से मिले दस्तावेजों, रसीदों, रजिस्टर, मोबाइल फोन और अन्य सामग्री की जांच कर सकती है। इन साक्ष्यों के जरिए पुलिस को कथित फर्जी कार्यालय के संचालन और उससे जुड़े लोगों के बारे में जानकारी मिल सकती है।

पुलिस यह भी जांच करेगी कि क्या किसी सरकारी विभाग के असली दस्तावेज, मुहर, पहचान पत्र या अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके अलावा यह पता लगाना भी जरूरी है कि आरोपियों ने वाहन चालकों को अपने प्रभाव में लेने के लिए किस तरह की व्यवस्था तैयार की थी।

कितने समय से चल रहा था रैकेट, जांच जारी

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कथित फर्जी RTO कार्यालय कितने समय से संचालित हो रहा था। पुलिस अब इसकी अवधि और नेटवर्क का दायरा पता करने में जुटी है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या आरोपियों के पास किसी तरह की स्थानीय मदद थी या वे अकेले ही इस गतिविधि को संचालित कर रहे थे।

गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर पुलिस रैकेट से जुड़े दूसरे लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर सकती है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले में और जानकारी सामने आने की संभावना है।

वाहन चालकों के बीच भी चर्चा

NH-16 पर स्थित लक्ष्मणनाथ टोल गेट के पास कथित फर्जी RTO कार्यालय के खुलासे के बाद वाहन चालकों और स्थानीय लोगों के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चा है। राजमार्ग पर गुजरने वाले चालकों के लिए यह जानना जरूरी है कि कोई व्यक्ति यदि खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पैसे की मांग करता है, तो उसकी पहचान और अधिकार की पुष्टि की जा सकती है।

पुलिस की कार्रवाई के बाद अब इस तरह की अवैध वसूली पर निगरानी बढ़ाए जाने की उम्मीद है। खासकर ऐसे स्थान जहां बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं, वहां फर्जी सरकारी कार्यालय या अवैध जांच के नाम पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल बालेश्वर पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है। एक अन्य संदिग्ध के फरार होने की बात सामने आई है, जिसकी तलाश जारी है। पुलिस की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि कथित फर्जी RTO का नेटवर्क कितना बड़ा था, कितने समय से सक्रिय था और वाहन चालकों से कुल कितनी रकम वसूली गई। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

Next Story