
कोरापुट। ओडिशा के कोरापुट जिले में नदी में 10 फीट लंबा मगरमच्छ दिखाई देने का दावा करते हुए वायरल की गई तस्वीर फर्जी निकली। वन विभाग की जांच में सामने आया कि तस्वीर वास्तविक नहीं थी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से तैयार की गई थी। तस्वीर वायरल होने के बाद आसपास के गांवों में दहशत फैल गई थी। मामले की जांच करते हुए वन विभाग ने तस्वीर का संबंध बडापाडा गांव के दो भाइयों से जोड़ा और दोनों को बोरिगुम्मा पुलिस के हवाले कर दिया।
मामला कोरापुट जिले के जेपोर सदर ब्लॉक की जयंतीगिरी पंचायत के अंतर्गत आने वाली बडापाडा नदी से जुड़ा है। वायरल तस्वीर में नदी में एक विशाल मगरमच्छ होने का दावा किया गया था। सोशल मीडिया पर तस्वीर तेजी से फैलने के बाद किसानों और स्थानीय ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया।
जेपोर के सहायक वन संरक्षक (ACF) डॉ. अमित प्रकाश नायक ने मामले की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि नदी में किसी मगरमच्छ की मौजूदगी नहीं मिली। जांच में वायरल तस्वीर AI से बनाई गई पाई गई।
31 अगस्त को वायरल हुई थी तस्वीर
जानकारी के मुताबिक 31 अगस्त को सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल होने लगी। इसके साथ दावा किया गया कि बडापाडा नदी में करीब 10 फीट लंबा मगरमच्छ देखा गया है।
तस्वीर सामने आने के बाद आसपास के गांवों में इसकी चर्चा शुरू हो गई। नदी और उसके आसपास जाने वाले किसानों तथा स्थानीय लोगों में डर फैल गया। ग्रामीण इलाकों में नदी का उपयोग खेती और अन्य दैनिक जरूरतों के लिए किया जाता है, इसलिए विशाल मगरमच्छ की मौजूदगी की खबर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी।
कुछ मीडिया संस्थानों ने भी चलाई खबर
वायरल तस्वीर की सत्यता की पुष्टि होने से पहले कुछ मीडिया संस्थानों ने भी इसके आधार पर खबरें प्रसारित कर दीं। इससे मगरमच्छ होने का दावा और तेजी से लोगों तक पहुंचा।
मामला वन विभाग के संज्ञान में आने के बाद अधिकारियों ने इसकी वास्तविकता की जांच शुरू की। विभाग के लिए यह पता लगाना जरूरी था कि नदी में वास्तव में मगरमच्छ मौजूद है या सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाई जा रही है।
वन विभाग की जांच में नहीं मिला मगरमच्छ
वन विभाग के अधिकारियों ने बडापाडा नदी और संबंधित क्षेत्र की जांच की। विभाग के मुताबिक नदी में मगरमच्छ होने की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद वायरल तस्वीर की भी पड़ताल की गई।
जांच में सामने आया कि सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही तस्वीर वास्तविक नहीं है। वन विभाग के अनुसार इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया गया था।
इसके बाद विभाग ने स्पष्ट किया कि लोगों को वायरल तस्वीर से डरने की जरूरत नहीं है और नदी में 10 फीट लंबा मगरमच्छ मिलने का दावा गलत है।
AI से बनाई गई थी तस्वीर
AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच वास्तविक दिखने वाली तस्वीरें तैयार करना आसान हुआ है। ऐसे चित्र कई बार पहली नजर में असली तस्वीर जैसे दिखाई देते हैं। बडापाडा नदी के मामले में भी कथित मगरमच्छ की तस्वीर ने स्थानीय लोगों को भ्रमित कर दिया।
वन विभाग की जांच के बाद तस्वीर के AI से तैयार होने की बात सामने आने पर पूरा मामला फर्जी सूचना फैलाने से जुड़ा पाया गया।
दो भाइयों तक पहुंची जांच
वन विभाग ने तस्वीर की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए जांच आगे बढ़ाई। अधिकारियों के मुताबिक जांच बडापाडा गांव के रहने वाले दो भाइयों पूर्णा भूमिया और सुरेंद्र भूमिया तक पहुंची।
दोनों को वन विभाग ने बोरिगुम्मा पुलिस के हवाले कर दिया। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तस्वीर किस उद्देश्य से बनाई गई और इसे सोशल मीडिया पर किस तरह प्रसारित किया गया।
यह भी जांच का विषय है कि तस्वीर को सबसे पहले किस अकाउंट या माध्यम से साझा किया गया और उसके बाद यह कितने लोगों तक पहुंची।
आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज
मामले में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के संबंधित प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने आगे की जांच शुरू कर दी है।
जांच में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। वायरल तस्वीर से जुड़े मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और शेयरिंग की कड़ी की पड़ताल के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि फर्जी तस्वीर किस तरह तैयार और प्रसारित की गई।
किसानों में फैल गई थी दहशत
इस फर्जी तस्वीर का सबसे बड़ा असर आसपास रहने वाले किसानों और ग्रामीणों पर पड़ा। मगरमच्छ की मौजूदगी की खबर के कारण नदी के आसपास जाने वाले लोगों में डर पैदा हो गया था।
विशाल मगरमच्छ की सूचना को वास्तविक मान लेने पर लोग नदी के किनारे जाने से बच सकते थे। खेती और दैनिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका थी।
वन विभाग की जांच और स्पष्टीकरण के बाद ग्रामीणों को राहत मिली कि नदी में मगरमच्छ होने का वायरल दावा सही नहीं था।
AI तस्वीरों ने बढ़ाई फेक न्यूज की चुनौती
यह घटना AI से तैयार तस्वीरों और उनके जरिए फैलने वाली गलत सूचनाओं की चुनौती को भी सामने लाती है। नई तकनीक से ऐसी तस्वीरें तैयार की जा सकती हैं, जो देखने में वास्तविक लगें। बिना सत्यापन इन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने से कुछ ही समय में अफवाह फैल सकती है।
प्राकृतिक आपदा, वन्यजीव, दुर्घटना या कानून-व्यवस्था से संबंधित फर्जी तस्वीरें विशेष रूप से संवेदनशील होती हैं, क्योंकि इनके कारण लोगों में डर या भ्रम पैदा हो सकता है।
वायरल तस्वीरों के सत्यापन की जरूरत
बडापाडा नदी का मामला यह भी दिखाता है कि सोशल मीडिया पर सामने आने वाली सनसनीखेज तस्वीरों की पुष्टि किए बिना उन पर भरोसा करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
किसी वन्यजीव की मौजूदगी से जुड़ी सूचना सामने आने पर वन विभाग या स्थानीय प्रशासन से पुष्टि की जा सकती है। इसी तरह मीडिया संस्थानों के लिए भी वायरल तस्वीरों की सत्यता जांचना महत्वपूर्ण है।
पुलिस की जांच जारी
फिलहाल पूर्णा भूमिया और सुरेंद्र भूमिया को बोरिगुम्मा पुलिस के हवाले किया गया है और मामले में आगे की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि तस्वीर बनाने और वायरल करने के पीछे क्या उद्देश्य था और इसमें अन्य लोगों की भूमिका थी या नहीं।
वन विभाग ने फिलहाल यह साफ कर दिया है कि बडापाडा नदी में 10 फीट लंबे मगरमच्छ की मौजूदगी का दावा गलत था। जिस तस्वीर से पूरे इलाके में दहशत फैली, वह वास्तविक वन्यजीव की तस्वीर नहीं बल्कि AI से तैयार की गई फर्जी तस्वीर थी।





