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ओडिशा के नए राज्यपाल ब्रजमोहन राम का शपथग्रहण कल
रांची/भुवनेश्वर: ओडिशा के नवनियुक्त राज्यपाल ब्रजमोहन राम रविवार, 18 अक्टूबर को शपथ लेकर अपना नया दायित्व संभालेंगे। उनके कार्यक्रम के अनुसार, वह शनिवार, 17 अक्टूबर को रांची से ओडिशा के लिए रवाना होंगे। शपथग्रहण समारोह भुवनेश्वर में आयोजित होगा। ब्रजमोहन राम ने गुरुवार को रांची के मोराबादी स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में पदभार ग्रहण करने की तारीख बताई थी। उन्होंने राज्य के समग्र विकास और सभी वर्गों के साथ समन्वय बनाकर काम करने को अपनी प्राथमिकता बताया है।
उनके शपथग्रहण समारोह में झारखंड से भी अतिथियों की भागीदारी होगी। फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और पदाधिकारियों को समारोह का आमंत्रण दिया गया है। चैंबर की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, ब्रजमोहन राम ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान स्वयं उन्हें 18 अक्टूबर के कार्यक्रम में आने का निमंत्रण दिया। इससे कारोबारी और उद्यमी समुदाय का भी इस समारोह से जुड़ाव सामने आया है। हालांकि, राज्य से जाने वाले कुल अतिथियों की आधिकारिक सूची उपलब्ध नहीं हुई है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर को ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया था। वह डॉ. हरि बाबू कम्भम्पति का स्थान लेंगे। नई जिम्मेदारी मिलने के साथ उनका सार्वजनिक जीवन एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। विधानसभा और लोकसभा में जनप्रतिनिधि की भूमिका निभा चुके ब्रजमोहन राम अब संवैधानिक पद संभालेंगे। उनकी नियुक्ति झारखंड के राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। विशेष रूप से पलामू और लातेहार से उनके लंबे जुड़ाव के कारण स्थानीय स्तर पर इस नियुक्ति में दिलचस्पी है।
ब्रजमोहन राम का जन्म एक जनवरी, 1958 को चंदवा में हुआ था। उस समय यह क्षेत्र तत्कालीन बिहार के पलामू जिले का हिस्सा था। वर्तमान में चंदवा झारखंड के लातेहार जिले में आता है। उन्होंने रांची विश्वविद्यालय से संबद्ध लोहरदगा के बीएस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। अविभाजित बिहार से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर राज्य गठन के बाद भी झारखंड की राजनीति से जुड़ा रहा। उनकी पहचान लंबे समय तक पलामू क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता के रूप में रही है।
वह 1991 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। इसके बाद उन्होंने संसदीय राजनीति में कदम रखा और पलामू लोकसभा क्षेत्र से लगातार तीन चुनाव जीते। वर्ष 1996, 1998 और 1999 के लोकसभा चुनावों में मिली जीत के बाद वह क्रमशः 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा के सदस्य बने। उनका संसदीय कार्यकाल 2004 तक रहा। इस दौरान उन्होंने ऊर्जा, रेलवे, परिवहन और पर्यटन से संबंधित संसदीय समितियों में जिम्मेदारियां निभाईं। वह कोयला मंत्रालय की सलाहकार समिति तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण से जुड़ी समितियों के भी सदस्य रहे।
नई भूमिका को लेकर ब्रजमोहन राम ने शिक्षा, रोजगार, किसानों की समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विषयों पर ध्यान देने की बात कही है। उनके मुताबिक, बिजली और पानी जैसी जरूरतों सहित जनहित के मुद्दों पर संवैधानिक दायरे में रहकर काम करना उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा। उन्होंने विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं और समाज के सभी वर्गों के साथ बेहतर तालमेल की आवश्यकता भी बताई। उनके इस वक्तव्य से पदभार संभालने से पहले उनके काम की प्राथमिकताओं की झलक मिली है।
इधर, नियुक्ति के बाद उनसे मुलाकात करने वालों में झारखंड चैंबर का प्रतिनिधिमंडल भी शामिल रहा। चैंबर अध्यक्ष तुलसी पटेल ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि संस्था के सदस्य का संवैधानिक पद पर पहुंचना व्यवसायियों और उद्यमियों के लिए गौरव का विषय है। मुलाकात में उपाध्यक्ष विकास विजयवर्गीय, सह सचिव अमित शर्मा और कोषाध्यक्ष नवजोत अलंग भी मौजूद थे। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के व्यापार और उद्योग जगत की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दीं।
ब्रजमोहन राम ने चैंबर से अपने जुड़ाव पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संस्था के माध्यम से व्यवसायियों और उद्यमियों की जो समस्याएं उनके संज्ञान में आएंगी, उनके समाधान में सहयोग का प्रयास करेंगे। इसी मुलाकात के दौरान शपथग्रहण समारोह का आमंत्रण भी दिया गया। अब 18 अक्टूबर को शपथ लेने के साथ वह औपचारिक रूप से ओडिशा के राज्यपाल का कार्यभार संभालेंगे।
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