ओडिशा

जाजपुर में कानी नदी का तटबंध टूटा, गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा

Kavita2
16 Aug 2026 9:44 AM IST
जाजपुर में कानी नदी का तटबंध टूटा, गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा
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जाजपुर। ओडिशा के जाजपुर जिले में लगातार बारिश और नदी में बढ़े जलप्रवाह के बीच रविवार तड़के कानी नदी के तटबंध का एक हिस्सा ढह गया। घटना तारपाडा पंचायत के अंतर्गत पटाना गांव के सामने हुई। बैतरणी नदी की शाखा कानी नदी में बाढ़ का पानी तेज रफ्तार से बहने के दौरान तटबंध की मिट्टी धंसने लगी और देखते ही देखते उसका बड़ा हिस्सा टूट गया। क्षतिग्रस्त हिस्सा करीब 30 फीट लंबा और 15 फीट चौड़ा बताया जा रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने तटबंध की मरम्मत का काम शुरू कर दिया, हालांकि लगातार हो रही बारिश के कारण इसमें परेशानी आ रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, शनिवार देर रात से क्षेत्र में बारिश का दौर जारी था और कानी नदी में पानी का बहाव काफी तेज हो गया था। रात के समय तटबंध के किनारे लगा एक पेड़ तेज बहाव की चपेट में आकर सबसे पहले बह गया। पेड़ के बहने के बाद उसके आसपास की मिट्टी कमजोर पड़ गई और धीरे-धीरे तटबंध का किनारा धंसने लगा।

रात के समय ही स्थानीय लोगों को तटबंध की स्थिति बिगड़ने का अंदेशा हो गया था। नदी में पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा था और तटबंध के किनारे की मिट्टी तेजी से कट रही थी। रविवार सुबह करीब पांच बजे पटाना गांव के सामने तटबंध का एक और बड़ा हिस्सा पूरी तरह ढह गया। इसके बाद आसपास के लोगों में चिंता बढ़ गई।

बताया जा रहा है कि तटबंध का क्षतिग्रस्त हिस्सा करीब 30 फीट लंबा और लगभग 15 फीट चौड़ा है। तटबंध टूटने के कारण नदी का पानी आसपास के निचले इलाकों की ओर बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों को डर है कि यदि नदी के जलस्तर में और वृद्धि हुई या क्षतिग्रस्त हिस्से का दायरा बढ़ा तो आसपास के खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में पानी प्रवेश कर सकता है।

घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तटबंध को बचाने की कोशिश शुरू की। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इसकी सूचना दी गई। विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और तटबंध के टूटे हिस्से को अस्थायी रूप से मजबूत करने का काम शुरू कराया।

स्थानीय लोगों और विभागीय कर्मचारियों ने मिलकर मिट्टी तथा अन्य उपलब्ध सामग्री की मदद से पानी के दबाव को कम करने और तटबंध को और अधिक टूटने से रोकने का प्रयास किया। हालांकि शनिवार रात से लगातार हो रही बारिश के कारण मरम्मत कार्य में दिक्कत आ रही है। गीली मिट्टी और तेज जलप्रवाह के कारण क्षतिग्रस्त हिस्से के पास काम करना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

बैतरणी नदी और उसकी शाखाओं में बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ने से जाजपुर जिले के कई निचले इलाके संवेदनशील हो जाते हैं। कानी नदी भी बैतरणी नदी की एक शाखा है। भारी बारिश के समय इसमें पानी का बहाव बढ़ने से तटबंधों पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में कमजोर स्थानों पर कटाव और तटबंध टूटने का खतरा बना रहता है।

पटाना गांव में हुई घटना के बाद आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। ग्रामीण नदी के जलस्तर और तटबंध की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यदि बारिश जारी रहती है और नदी में पानी बढ़ता है तो क्षतिग्रस्त हिस्से पर दबाव और बढ़ सकता है। इसलिए तटबंध की जल्द से जल्द मरम्मत करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तटबंध टूटने की घटना किसानों के लिए भी चिंता का कारण बन सकती है। यदि नदी का पानी खेतों में प्रवेश करता है तो खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। मॉनसून के दौरान क्षेत्र में धान सहित अन्य खरीफ फसलों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। लंबे समय तक खेतों में बाढ़ का पानी जमा रहने से फसल प्रभावित हो सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि तटबंध के जिस हिस्से में कटाव हुआ है, वहां पानी का दबाव काफी अधिक है। नदी का तेज बहाव लगातार मिट्टी को काट रहा है। इसलिए केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय स्थिति सामान्य होने के बाद प्रभावित हिस्से को मजबूत करने की आवश्यकता पड़ सकती है।

जल संसाधन विभाग के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती तटबंध में हुए कटाव को आगे बढ़ने से रोकना है। बारिश के बीच मरम्मत कार्य जारी रखना मुश्किल हो रहा है, लेकिन क्षतिग्रस्त हिस्से को खुला छोड़ने पर नदी का पानी मिट्टी को और काट सकता है। इसे देखते हुए अधिकारी और स्थानीय लोग तत्काल उपाय करने में जुटे हुए हैं।

ओडिशा में मॉनसून के दौरान नदियों के जलस्तर में तेजी से बदलाव देखने को मिलता है। विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी में कम दबाव की मौसम प्रणालियां बनने पर राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश होती है। लगातार बारिश से नदियों और उनकी शाखाओं में जलप्रवाह बढ़ जाता है, जिससे तटबंधों और निचले क्षेत्रों पर दबाव बढ़ता है।

जाजपुर जिले में भी नदी तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मॉनसून के दौरान बना रहता है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की ओर से ऐसे संवेदनशील तटबंधों की निगरानी महत्वपूर्ण होती है। पटाना गांव की घटना के बाद आसपास के अन्य कमजोर स्थानों पर भी निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

फिलहाल पटाना गांव के सामने कानी नदी के क्षतिग्रस्त तटबंध को बचाने के प्रयास जारी हैं। स्थानीय लोगों के साथ जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर काम कर रही है। लगातार बारिश मरम्मत कार्य में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। ग्रामीणों की नजर अब नदी के जलस्तर और मौसम पर टिकी है। अगर बारिश और जलप्रवाह बढ़ता है तो तटबंध के आसपास स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में प्रशासन के लिए क्षतिग्रस्त हिस्से की तत्काल मरम्मत और आसपास के गांवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता बनी हुई है।

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