
जाजपुर। ओडिशा के जाजपुर जिले में लगातार बारिश और बैतरणी नदी के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर बाढ़ की स्थिति गंभीर कर दी है। बैतरणी नदी की शाखा ‘कानी’ के तटबंध में शुक्रवार सुबह नई दरार पड़ने से दशरथपुर ब्लॉक के बड़े हिस्से में बाढ़ का पानी फैल गया। नई दरार 100 फीट से ज्यादा लंबी बताई जा रही है। इसके कारण तारापदा और कसापा पंचायतों के कई इलाके पानी में डूब गए हैं, जबकि अहियास बाजार क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है।
बताया जा रहा है कि तटबंध उसी स्थान के आसपास दोबारा टूटा है, जहां 28 जुलाई को आई बाढ़ के दौरान दरार पड़ी थी। पुराने क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की उम्मीद की थी, लेकिन लगातार बारिश और नदी में बढ़े पानी के दबाव के बीच तटबंध फिर प्रभावित हो गया।
शुक्रवार सुबह तटबंध टूटने के बाद बड़ी मात्रा में पानी आसपास के गांवों और निचले इलाकों की ओर बहने लगा। देखते ही देखते कई सड़कें, खेत और रिहायशी क्षेत्र पानी से घिर गए। स्थानीय लोगों के लिए आवागमन मुश्किल हो गया है। लगातार बढ़ते पानी के कारण स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।
क्षेत्र में बने डिप्रेशन के प्रभाव से पिछले चार दिनों से लगातार बारिश हो रही है। शुक्रवार को भी बारिश जारी रहने के कारण नदियों और जल स्रोतों का स्तर बढ़ा हुआ है। पहले से जलभराव का सामना कर रहे क्षेत्रों में नई दरार से पहुंचे बाढ़ के पानी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
सबसे ज्यादा प्रभाव तारापदा और कसापा पंचायतों पर पड़ा है। यहां बड़े इलाके बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। कई गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भर गया है। निचले क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के घरों के आसपास पानी पहुंचने से दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। स्थानीय लोग जलस्तर पर लगातार नजर रख रहे हैं।
अहियास बाजार क्षेत्र में भी बाढ़ का पानी फिर घुस गया है। बाजार और आसपास के इलाकों में पानी पहुंचने के कारण दुकानदारों और स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ गई है। यदि बारिश और नदी का जलस्तर इसी तरह बना रहता है तो पानी का फैलाव दूसरे निचले क्षेत्रों तक भी हो सकता है।
कानी नदी के तटबंध का यह हिस्सा पहले से संवेदनशील बना हुआ था। रिपोर्टों के मुताबिक 28 जुलाई को आई बाढ़ में इसी क्षेत्र में तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ था। इसके बाद करीब 45 दिनों तक टूटे हुए हिस्से से समय-समय पर बाढ़ का पानी बहता रहा। इससे आसपास के गांवों और कृषि भूमि पर लगातार खतरा बना हुआ था।
जल संसाधन विभाग ने 7 सितंबर को क्षतिग्रस्त हिस्से को बंद करने का काम पूरा किया था। इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि आने वाले दिनों में नदी का पानी आबादी वाले क्षेत्रों तक नहीं पहुंचेगा। लेकिन सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई लगातार बारिश और बढ़े जल दबाव के कारण तटबंध दोबारा टूट गया।
इस बार बनी दरार का आकार 100 फीट से अधिक बताया जा रहा है। इतने बड़े हिस्से से पानी तेजी से आसपास के क्षेत्रों में फैल रहा है। तटबंध में बड़ी दरार होने के कारण इसे तत्काल नियंत्रित करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर तब जब बारिश जारी हो और नदी में पानी का दबाव लगातार बना रहे।
बाढ़ का सीधा असर कृषि क्षेत्रों पर भी पड़ने की आशंका है। दशरथपुर ब्लॉक के कई इलाकों में खेती प्रमुख आजीविका है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। लगातार बारिश से पहले ही खेतों में काफी पानी मौजूद था और अब तटबंध टूटने से नदी का अतिरिक्त पानी कृषि भूमि में पहुंच रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित होना भी बड़ी समस्या बन सकता है। यदि पानी का स्तर और बढ़ता है तो गांवों से मुख्य सड़कों तक पहुंचने वाले मार्ग बंद हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बीमार लोगों, बुजुर्गों और बच्चों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में परेशानी हो सकती है।
स्थानीय प्रशासन और जल संसाधन विभाग के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती टूटे हुए तटबंध से पानी के बहाव को नियंत्रित करना है। साथ ही उन क्षेत्रों की पहचान करना जरूरी होगा जहां जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्रभावित और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए स्थिति के अनुसार राहत और निकासी की व्यवस्था की जा सकती है।
लगातार बारिश के कारण राहत और मरम्मत कार्य में भी मुश्किलें आ सकती हैं। तटबंध के टूटे हिस्से तक भारी सामग्री और मशीनरी पहुंचाने के लिए सुरक्षित रास्ता जरूरी होता है। तेज बहाव की स्थिति में कर्मचारियों के लिए भी काम करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि मरम्मत के कुछ ही दिनों बाद तटबंध फिर टूट गया। 7 सितंबर को जिस हिस्से को बंद किया गया था, उसके आसपास दोबारा दरार आने से मरम्मत की मजबूती और नदी के बढ़ते दबाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि तटबंध दोबारा टूटने के तकनीकी कारणों का पता विस्तृत निरीक्षण के बाद ही चल सकेगा।
बैतरणी नदी और उसकी शाखाओं में जलस्तर बढ़ने की स्थिति में जाजपुर के कई निचले इलाके बाढ़ के प्रति संवेदनशील रहते हैं। ऐसे में लगातार बारिश होने पर नदी के तटबंधों पर दबाव बढ़ जाता है। वर्तमान स्थिति में कानी नदी के क्षतिग्रस्त तटबंध के आसपास विशेष निगरानी की आवश्यकता है।
प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित गांवों में लोगों की सुरक्षा, आवागमन और जरूरी सुविधाओं को बनाए रखना है। पानी बढ़ने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा सकती है। ग्रामीणों को भी नदी, नालों और टूटे तटबंध के आसपास जाने से बचने की जरूरत है।
फिलहाल दशरथपुर ब्लॉक में स्थिति बारिश और बैतरणी नदी के जलस्तर पर निर्भर है। 100 फीट से अधिक लंबी नई दरार से पानी लगातार आसपास के गांवों और निचले इलाकों की ओर फैल रहा है। तारापदा और कसापा पंचायतों के साथ अहियास बाजार क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बारिश जारी रहने की स्थिति में प्रशासन के लिए राहत, निगरानी और तटबंध की दोबारा मरम्मत बड़ी चुनौती बनी रहेगी।





