ओडिशा

खेत की सोलर फेंसिंग में फंसा मिला हाथी का शव, करंट से मौत की आशंका

Kavita2
21 Oct 2026 10:21 AM IST
खेत की सोलर फेंसिंग में फंसा मिला हाथी का शव, करंट से मौत की आशंका
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सुंदरगढ़। ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में एक हाथी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। जिले के बिसरा ब्लॉक की बांधामुंडा पंचायत अंतर्गत डुमेरता गांव में बुधवार सुबह एक खेत में लगभग सात साल का हाथी मृत अवस्था में पाया गया। हाथी का शव खेत में लगी सोलर फेंसिंग यानी सौर ऊर्जा से संचालित बाड़ के तारों में फंसा हुआ था। इस स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि हाथी की मौत बिजली का झटका लगने से हुई होगी। हालांकि, मौत के वास्तविक कारण की अभी पुष्टि नहीं हुई है। सूचना मिलने के बाद राउरकेला वन प्रभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।

बुधवार सुबह खेत में मिला हाथी का शव

जानकारी के अनुसार, घटना सुंदरगढ़ जिले के डुमेरता गांव की है। बुधवार सुबह एक खेत में हाथी का शव मिलने से मामला सामने आया।

मृत हाथी की उम्र लगभग सात वर्ष बताई जा रही है। उसके दो दांत भी थे।

हाथी खेत में लगाई गई सोलर फेंसिंग के तारों में फंसा हुआ मिला। इस कारण उसकी मौत को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

प्रारंभिक तौर पर बिजली का झटका लगने की आशंका व्यक्त की जा रही है, लेकिन वन विभाग ने अभी तक मौत के कारण की पुष्टि नहीं की है।

घटना की जानकारी मिलने के बाद वन अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर परिस्थितियों की जांच शुरू की।

सोलर फेंसिंग के तारों में फंसा था हाथी

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि हाथी का शव खेत में लगी सौर बाड़ के तारों में फंसा मिला।

खेतों की सुरक्षा के लिए कई स्थानों पर सोलर फेंसिंग का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य जंगली जानवरों को फसलों तक पहुंचने से रोकना होता है।

ऐसी प्रणालियों में सामान्यतः नियंत्रित विद्युत स्पंदन का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि जानवरों को नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें खेत से दूर रखा जा सके।

हालांकि, यदि किसी बाड़ में तकनीकी खराबी हो या उसे असुरक्षित तरीके से बिजली की आपूर्ति की जाए, तो वह जानवरों और मनुष्यों के लिए खतरनाक हो सकती है।

डुमेरता गांव में लगी बाड़ की तकनीकी स्थिति क्या थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

करंट लगने से मौत की आशंका

हाथी के सोलर फेंसिंग में फंसे मिलने के कारण उसकी मौत बिजली के झटके से होने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि, केवल तारों में फंसा शव मिलने से करंट लगने को मौत का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता।

यह पता लगाना जरूरी होगा कि घटना के समय बाड़ में बिजली प्रवाहित हो रही थी या नहीं।

इसके अलावा बाड़ की वायरिंग, बिजली आपूर्ति और सुरक्षा उपकरणों की स्थिति भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

वन विभाग की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि हाथी की मौत बिजली के झटके से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।

राउरकेला वन प्रभाग की टीम पहुंची

घटना की सूचना मिलते ही राउरकेला वन प्रभाग की टीम डुमेरता गांव पहुंची।

वन अधिकारियों ने हाथी की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।

जांच का मुख्य उद्देश्य मौत के वास्तविक कारण का पता लगाना है।

अधिकारियों के सामने यह सवाल भी है कि हाथी सोलर फेंसिंग के संपर्क में कैसे आया और क्या बाड़ की व्यवस्था में कोई तकनीकी समस्या थी।

हालांकि, वन विभाग की ओर से जांच के अंतिम निष्कर्ष अभी जारी नहीं किए गए हैं।

मौत का सही कारण अभी स्पष्ट नहीं

हाथी की मौत को लेकर फिलहाल कई संभावनाएं बनी हुई हैं।

शव जिस स्थिति में मिला है, उससे बिजली का झटका लगने की आशंका जरूर पैदा हुई है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

वन्यजीवों की संदिग्ध मौत के मामलों में पोस्टमॉर्टम और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य महत्वपूर्ण होते हैं।

इनसे मौत के कारण और उससे जुड़ी परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इस मामले में पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया और उसकी रिपोर्ट के संबंध में अभी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

हाथियों के लिए खतरा बन सकती है असुरक्षित बाड़

कृषि क्षेत्रों में जंगली जानवरों की आवाजाही रोकने के लिए विभिन्न प्रकार की बाड़ लगाई जाती हैं।

इनमें सौर ऊर्जा आधारित बाड़ भी शामिल हैं।

सुरक्षा मानकों के अनुसार लगाई गई फेंसिंग का उद्देश्य जानवरों को दूर रखना होता है, न कि उन्हें गंभीर चोट पहुंचाना।

लेकिन यदि किसी विद्युत बाड़ को गलत तरीके से लगाया जाए या उसमें अनधिकृत बिजली कनेक्शन जोड़ दिया जाए, तो जानलेवा हादसे का खतरा बढ़ सकता है।

हालांकि, डुमेरता गांव की बाड़ में ऐसी किसी अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है।

इसलिए जांच पूरी होने से पहले खेत मालिक या किसी अन्य व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

मानव-हाथी संघर्ष की चुनौती

ओडिशा के कई वन क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही और कृषि भूमि के आसपास उनकी मौजूदगी एक महत्वपूर्ण वन्यजीव प्रबंधन चुनौती रही है।

जंगलों के आसपास बसे गांवों में हाथी कभी-कभी भोजन और पानी की तलाश में खेतों तक पहुंच जाते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में किसानों को फसलों की सुरक्षा की चिंता रहती है, जबकि वन विभाग के सामने हाथियों और स्थानीय लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती होती है।

मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए सुरक्षित और वैज्ञानिक उपायों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जाता है।

डुमेरता गांव की घटना ने भी खेतों के आसपास वन्यजीव सुरक्षा के सवाल को सामने रखा है।

सात साल के हाथी की मौत से चिंता

मृत हाथी की उम्र लगभग सात वर्ष बताई जा रही है।

हाथियों का जीवनकाल लंबा होता है और सात वर्ष की उम्र में वे विकास की अवस्था में होते हैं।

इस उम्र के हाथी की मौत वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से चिंताजनक है।

हाथी पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे वन क्षेत्रों में बीजों के फैलाव और प्राकृतिक वनस्पति के विकास में योगदान देते हैं।

इसलिए हाथियों की असामान्य मौत के मामलों की गंभीरता से जांच करना आवश्यक है।

खेतों की सुरक्षा के साथ वन्यजीव संरक्षण जरूरी

कृषि भूमि को जंगली जानवरों से बचाना किसानों के लिए महत्वपूर्ण है।

लेकिन सुरक्षा के लिए अपनाए जाने वाले उपाय ऐसे होने चाहिए, जिनसे जानवरों की जान को खतरा न हो।

वन्यजीव विशेषज्ञ सामान्यतः सुरक्षित फेंसिंग, निगरानी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अन्य गैर-घातक उपायों को महत्व देते हैं।

इसके साथ ही बिजली से संचालित किसी भी बाड़ की नियमित जांच और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक होता है।

इस घटना में संबंधित फेंसिंग सुरक्षित थी या नहीं, इसका निर्धारण जांच के बाद ही किया जा सकेगा।

जांच रिपोर्ट से सामने आएगी सच्चाई

राउरकेला वन प्रभाग की टीम हाथी की मौत से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

अधिकारियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि हाथी की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई।

यदि जांच में बिजली का झटका लगने की पुष्टि होती है, तो बाड़ की तकनीकी स्थिति और बिजली आपूर्ति की जांच महत्वपूर्ण हो जाएगी।

वहीं, यदि मौत का कोई अन्य कारण सामने आता है, तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।

फिलहाल वन विभाग की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।

वन विभाग की जांच पर टिकी निगाहें

सुंदरगढ़ जिले के बिसरा ब्लॉक स्थित डुमेरता गांव में सात वर्षीय हाथी की संदिग्ध मौत ने वन्यजीव सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

हाथी खेत की सोलर फेंसिंग में फंसा मिला था, जिसके चलते करंट लगने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि, मौत का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। राउरकेला वन प्रभाग की जांच और संबंधित चिकित्सकीय निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि हाथी की मौत बिजली के झटके से हुई थी या किसी अन्य वजह से।

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