
Odisha ओडिशा: ओडिशा सरकार ने इबोला वायरस को लेकर अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है और स्वास्थ्य व्यवस्था को अलर्ट मोड पर रखा गया है। हाल ही में युगांडा से बेंगलुरु पहुंची एक महिला में इबोला जैसे लक्षण पाए जाने के बाद उसे आइसोलेशन में रखा गया है। उसके सैंपल की पुष्टि के लिए परीक्षण हेतु नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे भेजा गया है, जहां से अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
इसी के मद्देनजर ओडिशा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने राज्य में संभावित संक्रमण से निपटने के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग ने AIIMS भुवनेश्वर को निर्देश दिया है कि भुवनेश्वर एयरपोर्ट से आने वाले संदिग्ध इबोला मामलों के लिए आइसोलेशन और उपचार व्यवस्था के तहत 6 से 8 बेड आरक्षित रखे जाएं। इस संबंध में संस्थान के निदेशक को औपचारिक संदेश भी भेजा गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, किसी भी संक्रामक बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए शुरुआती पहचान, क्वारंटाइन और आइसोलेशन सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं। इसी रणनीति के तहत राज्य में एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों की निगरानी को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि किसी भी संदिग्ध मरीज को तुरंत चिन्हित किया जा सके।
निर्देशों के अनुसार, यदि भुवनेश्वर एयरपोर्ट पर कोई भी यात्री इबोला जैसे लक्षणों के साथ पाया जाता है या उसे संदिग्ध माना जाता है, तो उसे तुरंत AIIMS भुवनेश्वर भेजा जाएगा। वहां उसे विशेष निगरानी में रखा जाएगा और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि संक्रमण के किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रखा जा रहा है और सभी संबंधित संस्थानों को अलर्ट पर रखा गया है। एयरपोर्ट, अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि किसी भी संदिग्ध मामले में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला एक गंभीर और संक्रामक वायरस है, जो समय पर पहचान और उचित इलाज न मिलने पर खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में सरकार की यह तैयारी एहतियाती कदम के रूप में देखी जा रही है।
फिलहाल राज्य में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग किसी भी संभावित जोखिम को देखते हुए सतर्कता बरत रहा है और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत कर रहा है।





