
पुरी : दुनिया भर में भगवान श्री जगन्नाथ के करोड़ों श्रद्धालुओं को आधुनिक और सुरक्षित डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार को 'समर्पण' नामक सुरक्षित डिजिटल हुंडी (दान) प्लेटफ़ॉर्म का शुभारंभ किया। इस नई व्यवस्था के माध्यम से देश-विदेश में रहने वाले भक्त अब दुनिया के किसी भी हिस्से से श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी में ऑनलाइन दान कर सकेंगे। यह पहल मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता, जवाबदेही और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
इस डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का उद्घाटन पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के कार्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान किया गया। खास बात यह रही कि इसका शुभारंभ भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध वार्षिक रथ यात्रा से ठीक पहले किया गया, जिससे लाखों श्रद्धालुओं को उत्सव के दौरान डिजिटल माध्यम से अपनी श्रद्धा अर्पित करने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस अवसर पर कहा कि भगवान जगन्नाथ केवल ओडिशा ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। बड़ी संख्या में ऐसे भक्त हैं जो विदेशों या देश के दूरदराज़ क्षेत्रों में रहते हैं और विभिन्न कारणों से पुरी नहीं आ पाते। ऐसे श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 'समर्पण' डिजिटल हुंडी प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली श्रद्धालुओं को सुरक्षित, पारदर्शी और सुविधाजनक तरीके से मंदिर में दान करने का अवसर प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक संस्थानों के आधुनिकीकरण और डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्लेटफ़ॉर्म दुनिया भर में बसे भगवान जगन्नाथ के भक्तों और मंदिर प्रशासन के बीच एक मजबूत डिजिटल सेतु का कार्य करेगा। इससे दान प्रक्रिया सरल होने के साथ-साथ मंदिर के विकास कार्यों के लिए संसाधनों में भी वृद्धि होगी।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि 'समर्पण' प्लेटफ़ॉर्म को अत्याधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें ऑनलाइन भुगतान की सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है ताकि श्रद्धालु बिना किसी चिंता के अपनी श्रद्धानुसार दान कर सकें। डिजिटल भुगतान के सभी प्रमुख माध्यमों को इसमें शामिल किया गया है, जिससे देश और विदेश के उपयोगकर्ताओं को सुविधा मिलेगी। प्रत्येक दान का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहेगी।
अधिकारियों के अनुसार, अब तक कई श्रद्धालु मंदिर में दान करने के लिए व्यक्तिगत रूप से पुरी आते थे या अन्य माध्यमों का सहारा लेते थे। लेकिन नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद कोई भी श्रद्धालु अपने मोबाइल फोन, कंप्यूटर या अन्य इंटरनेट आधारित उपकरणों के माध्यम से घर बैठे कुछ ही मिनटों में दान कर सकेगा। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी तथा दान प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और विश्वसनीय बनेगी।
मंदिर प्रशासन का मानना है कि 'समर्पण' प्लेटफ़ॉर्म विशेष रूप से उन प्रवासी भारतीयों और विदेशी श्रद्धालुओं के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा, जिनकी भगवान जगन्नाथ के प्रति गहरी आस्था है, लेकिन वे नियमित रूप से पुरी नहीं आ पाते। अब वे किसी भी समय और किसी भी स्थान से मंदिर की सेवा में अपना योगदान दे सकेंगे।
रथ यात्रा जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। इस अवसर पर मंदिर में बड़ी मात्रा में दान भी प्राप्त होता है। डिजिटल हुंडी प्लेटफ़ॉर्म शुरू होने से उन श्रद्धालुओं को भी सुविधा मिलेगी जो भीड़ या अन्य कारणों से मंदिर तक नहीं पहुंच पाते। इससे नकद लेन-देन पर निर्भरता भी कम होगी और दान प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बनेगी।
धार्मिक मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत के प्रमुख मंदिरों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। ऑनलाइन दर्शन, ई-सेवा, डिजिटल प्रसाद बुकिंग और अब डिजिटल हुंडी जैसी सुविधाएं श्रद्धालुओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से धार्मिक गतिविधियों से जोड़ रही हैं। 'समर्पण' इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो परंपरा और तकनीक के समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के संचालन में पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। दान की राशि का उपयोग मंदिर के विकास, धार्मिक गतिविधियों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं तथा अन्य निर्धारित कार्यों के लिए नियमानुसार किया जाएगा। इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
रथ यात्रा से ठीक पहले इस नई डिजिटल सेवा की शुरुआत को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उम्मीद है कि देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु इस सुविधा का लाभ उठाकर भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे। 'समर्पण' केवल एक ऑनलाइन दान मंच नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से आस्था को वैश्विक स्तर पर जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरेगा। यह पहल डिजिटल इंडिया के विज़न को भी मजबूती प्रदान करती है और धार्मिक संस्थानों में तकनीक आधारित पारदर्शी सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम साबित हो सकती है।





