
संबलपुर। ओडिशा के संबलपुर स्थित गंगाधर मेहेर यूनिवर्सिटी यानी GMU में इस साल भी स्टूडेंट यूनियन के विभिन्न पदों के लिए सीधे चुनाव नहीं कराए जाएंगे। पिछले वर्षों की व्यवस्था को जारी रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र परिषद के अध्यक्ष और अन्य प्रतिनिधियों के चयन के लिए निर्धारित चयन प्रक्रिया अपनाएगा। इसके तहत विश्वविद्यालय के सभी छात्र सीधे मतदान नहीं करेंगे, बल्कि तय पात्रता पूरी करने वाले विद्यार्थियों में से प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधियों के चयन की इस व्यवस्था के कारण सामान्य प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव जैसा मतदान नहीं होगा। यानी प्रत्येक छात्र को अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के लिए सीधे वोट देने का अवसर नहीं मिलेगा। इसके स्थान पर योग्य छात्रों का एक निर्धारित समूह चयन प्रक्रिया में भाग लेगा और छात्र परिषद के प्रतिनिधियों का चुनाव करेगा।
इस व्यवस्था में छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों और उपस्थिति को विशेष महत्व दिया गया है। चयन प्रक्रिया में भाग लेने के लिए कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रखी गई है। जिन विद्यार्थियों की उपस्थिति इससे कम होगी, वे इस प्रक्रिया में शामिल होने के पात्र नहीं होंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन की इस शर्त का उद्देश्य नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने वाले और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े छात्रों को प्रतिनिधित्व की प्रक्रिया में प्राथमिकता देना है। छात्र परिषद में शामिल होने या प्रतिनिधियों के चयन में भूमिका निभाने के लिए उपस्थिति एक महत्वपूर्ण आधार होगी।
प्रथम वर्ष के पोस्ट ग्रेजुएट यानी PG छात्रों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। उनके मामले में केवल उपस्थिति ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक प्रदर्शन यानी अंक भी पात्रता निर्धारित करने में भूमिका निभाएंगे। इस तरह प्रथम वर्ष के PG विद्यार्थियों के लिए चयन प्रक्रिया में भागीदारी उनकी उपस्थिति और प्राप्त अंकों से जुड़ी होगी।
गंगाधर मेहेर यूनिवर्सिटी में प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव के बजाय चयन की व्यवस्था पहले भी अपनाई जाती रही है। इस साल भी उसी प्रणाली को जारी रखने का फैसला किया गया है। इससे यह साफ हो गया है कि कैंपस में अध्यक्ष और अन्य प्रतिनिधियों के चयन के लिए सभी विद्यार्थियों के बीच सामान्य मतदान नहीं कराया जाएगा।
छात्र परिषद विश्वविद्यालय में छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम होती है। छात्र प्रतिनिधि विद्यार्थियों की शैक्षणिक, सांस्कृतिक और कैंपस से संबंधित समस्याओं को प्रशासन के सामने रखते हैं। इसके साथ ही विभिन्न विश्वविद्यालय गतिविधियों में छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने में भी परिषद की भूमिका रहती है।
ऐसे में प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया छात्रों के बीच महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रत्यक्ष चुनाव में जहां सभी योग्य मतदाता छात्र अपना वोट डालते हैं, वहीं GMU की मौजूदा व्यवस्था में निर्धारित पात्रता वाले छात्रों के जरिए प्रतिनिधियों का चयन होगा।
75 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता के कारण बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी प्रक्रिया से बाहर रह सकते हैं, जिनकी उपस्थिति तय मानक से कम है। दूसरी ओर नियमित रूप से कक्षाओं में आने वाले विद्यार्थियों के लिए इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका रहेगा।
विश्वविद्यालय की ओर से पात्र छात्रों का निर्धारण शैक्षणिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए विभागवार उपस्थिति का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होगा। PG प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के मामले में अंकों का रिकॉर्ड भी देखा जाएगा।
इसके बाद योग्य छात्रों को चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इन्हीं छात्रों की भागीदारी से अध्यक्ष और अन्य प्रतिनिधियों के नाम तय किए जाएंगे।
प्रत्यक्ष चुनाव नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय में पारंपरिक छात्र राजनीति की गतिविधियां भी सीमित रहने की संभावना है। सामान्य तौर पर छात्र संघ चुनाव के दौरान नामांकन, प्रचार, छात्र सभाएं, पोस्टर और मतदान जैसी गतिविधियां देखने को मिलती हैं। GMU में चयन आधारित व्यवस्था होने के कारण प्रक्रिया का स्वरूप इससे अलग रहेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए चयन प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करना महत्वपूर्ण होगा। किन छात्रों को पात्र माना गया, उपस्थिति का आकलन किस अवधि के आधार पर हुआ और PG प्रथम वर्ष में अंकों के लिए क्या मापदंड अपनाए गए, जैसे सवाल छात्रों के लिए अहम होंगे।
छात्रों के बीच भी इस व्यवस्था को लेकर अलग-अलग विचार हो सकते हैं। कुछ विद्यार्थी शैक्षणिक प्रदर्शन और नियमित उपस्थिति के आधार पर प्रतिनिधित्व को बेहतर व्यवस्था मान सकते हैं, जबकि प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव के समर्थक सभी छात्रों को मतदान का अधिकार देने के पक्ष में हो सकते हैं।
फिलहाल विश्वविद्यालय ने पिछले वर्षों की तरह प्रत्यक्ष चुनाव के बजाय चयन प्रक्रिया जारी रखने का रास्ता चुना है।
गंगाधर मेहेर यूनिवर्सिटी पश्चिमी ओडिशा के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल है। यहां विभिन्न स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। इस वजह से छात्र परिषद का गठन कैंपस की गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
छात्र प्रतिनिधि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक सुविधाओं, छात्रावास, पुस्तकालय, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य छात्र हित से जुड़े मुद्दों को उठाने में भूमिका निभाते हैं। इसलिए अध्यक्ष और अन्य प्रतिनिधियों का चयन छात्रों के लिए सीधे तौर पर मायने रखता है।
इस साल भी चयन प्रक्रिया लागू होने से विद्यार्थियों को सबसे पहले अपनी पात्रता पर ध्यान देना होगा। 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले छात्र इसमें शामिल नहीं हो पाएंगे। प्रथम वर्ष के PG छात्रों को उपस्थिति के साथ अपने शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर निर्धारित मापदंड भी पूरे करने होंगे।
विश्वविद्यालय की ओर से चयन प्रक्रिया की विस्तृत समय-सारिणी और अन्य नियमों के आधार पर आगे छात्र प्रतिनिधियों के नाम तय किए जाएंगे।
यह व्यवस्था प्रत्यक्ष चुनाव से अलग है, क्योंकि इसमें विश्वविद्यालय के सभी छात्रों की समान रूप से सीधी मतदान भागीदारी नहीं होगी। पात्रता के आधार पर चुना गया सीमित समूह ही प्रतिनिधियों के चयन में हिस्सा लेगा।
ऐसे में इस बार भी GMU कैंपस में मतपेटियों और सीधे मतदान के बजाय चयन आधारित छात्र परिषद का गठन होगा।
छात्रों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण बात अपनी उपस्थिति और शैक्षणिक रिकॉर्ड की स्थिति देखना होगी। जिन छात्रों की उपस्थिति कम से कम 75 प्रतिशत है, वे निर्धारित अन्य शर्तों के अनुसार प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।
वहीं प्रथम वर्ष के PG छात्रों के लिए अंक भी महत्वपूर्ण आधार होंगे। विश्वविद्यालय इसी व्यवस्था के आधार पर योग्य विद्यार्थियों को चयन प्रक्रिया में शामिल करेगा।
कुल मिलाकर गंगाधर मेहेर यूनिवर्सिटी ने इस वर्ष भी छात्र संघ पदाधिकारियों के लिए सीधे चुनाव नहीं कराने का फैसला बरकरार रखा है। अध्यक्ष और अन्य प्रतिनिधियों का चयन निर्धारित प्रक्रिया से होगा, जिसमें 75 प्रतिशत उपस्थिति प्रमुख पात्रता शर्त होगी। प्रथम वर्ष के PG छात्रों के लिए उनके अंक भी योग्यता तय करने में भूमिका निभाएंगे।





