ओडिशा

ठाकुरमुंडा CHC में 36 घंटे तक पड़ा रहा शव, पोस्टमार्टम नहीं होने पर उठे सवाल

Kavita2
6 Oct 2026 11:10 AM IST
ठाकुरमुंडा CHC में 36 घंटे तक पड़ा रहा शव, पोस्टमार्टम नहीं होने पर उठे सवाल
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ओडिशा : मयूरभंज जिले के ठाकुरमुंडा कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) में कथित प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक 40 वर्षीय व्यक्ति का शव 36 घंटे से अधिक समय तक अस्पताल परिसर में ही पड़ा रहा, लेकिन उसे पोस्टमार्टम के लिए नहीं भेजा गया। घटना सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मृतक की पहचान बहाल्डा क्षेत्र के टेंटाला गांव निवासी श्याम मारंडी के रूप में हुई है। मिली जानकारी के अनुसार, श्याम मारंडी को 4 अक्टूबर को दोपहर करीब 2 बजे ठाकुरमुंडा CHC में भर्ती कराया गया था। उनकी तबीयत खराब होने के कारण अस्पताल में इलाज शुरू किया गया।

बताया जा रहा है कि इलाज के दौरान उसी दिन शाम के समय श्याम अपने बिस्तर से उठे थे। उन्हें पेशाब करने के लिए जाना था। हालांकि वह बाथरूम की ओर जाने के बजाय अस्पताल परिसर में बने एक रैंप की तरफ बढ़ गए। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वह नीचे गिर पड़े।

गिरने के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई। अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें संभालने का प्रयास किया, लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई। इसके बाद सामान्य प्रक्रिया के तहत शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाना था, ताकि मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सके। लेकिन आरोप है कि शव को लंबे समय तक अस्पताल से पोस्टमार्टम केंद्र नहीं भेजा गया।

करीब 36 घंटे से ज्यादा समय तक शव अस्पताल में पड़े रहने की बात सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। मृतक के परिजनों के लिए भी यह स्थिति बेहद परेशान करने वाली रही। किसी व्यक्ति की मौत के बाद पोस्टमार्टम और आगे की कानूनी प्रक्रिया समय पर पूरी होना जरूरी होता है, लेकिन इस मामले में देरी को लेकर अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

घटना में सबसे अहम सवाल यह है कि मरीज की मौत के तुरंत बाद संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की। यदि मौत अस्पताल परिसर में गिरने से हुई थी, तो मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को देकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई जल्द शुरू की जानी चाहिए थी।

यह भी सवाल उठ रहा है कि अस्पताल में भर्ती मरीज किस तरह रैंप की ओर पहुंच गया और गिरने से पहले उसकी निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी। श्याम की स्थिति ऐसी थी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, ऐसे में मरीजों की सुरक्षा और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी भी स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों की होती है।

ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में कम्युनिटी हेल्थ सेंटर लोगों के इलाज के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल होते हैं। ऐसे केंद्रों में मरीजों को प्राथमिक और आपात चिकित्सा सेवाएं देने के साथ-साथ किसी गंभीर घटना की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई करना भी जरूरी है। इस तरह के मामलों में देरी होने पर न केवल परिजनों की परेशानी बढ़ती है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठते हैं।

श्याम मारंडी की मौत के बाद शव को लंबे समय तक अस्पताल में रखे जाने की घटना ने स्थानीय स्तर पर नाराजगी और चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि इस तरह की स्थिति किसी भी मृतक और उसके परिवार के प्रति संवेदनशील व्यवस्था का संकेत नहीं मानी जा सकती।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने में इतनी लंबी देरी आखिर किस कारण हुई। यह भी सामने नहीं आया है कि मामले में किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की गई है या नहीं।

मामले की पूरी सच्चाई प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी होगा कि मरीज के गिरने की परिस्थितियां क्या थीं, उसकी मौत के बाद अस्पताल स्तर पर कौन-कौन सी कार्रवाई की गई और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में 36 घंटे से अधिक की देरी क्यों हुई।

श्याम मारंडी की मौत और इसके बाद शव के लंबे समय तक अस्पताल में पड़े रहने के मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही और संवेदनशीलता की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।

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