
भुवनेश्वर। पड़ोसी आंध्र प्रदेश में गुरुवार को टकराए गहरे डिप्रेशन के प्रभाव से ओडिशा के कई हिस्सों, खासकर दक्षिणी जिलों में भारी बारिश हुई है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में बाढ़ और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान शुरू कर दिया है। राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए सरकार ने दो वरिष्ठ मंत्रियों को प्रभावित जिलों में तैनात किया है।
पंचायती राज एवं पेयजल मंत्री रबी नारायण नाइक को कोरापुट और मत्स्य पालन एवं पशु संसाधन विकास मंत्री गोकुलानंद मल्लिक को गजपति जिले में तैनात किया गया है। दोनों मंत्रियों को संबंधित जिलों में रहकर प्रशासन के साथ राहत और बचाव कार्यों की स्थिति की निगरानी करने को कहा गया है।
दक्षिणी ओडिशा में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है। गहरे डिप्रेशन के प्रभाव से बारिश की तीव्रता बढ़ने के बाद कई इलाकों में जलभराव हो गया है। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने और पहाड़ी ढलानों की मिट्टी कमजोर होने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
कोरापुट, गजपति, मलकानगिरी, रायगड़ा, कंधमाल और गंजाम जैसे दक्षिणी जिलों में बारिश का व्यापक असर देखने को मिला है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। पहाड़ी इलाकों में मिट्टी और चट्टानें सड़कों पर गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, जबकि कुछ स्थानों पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित हुआ है।
कोरापुट जिले में भारी बारिश के कारण कई सड़कें प्रभावित हुई हैं। घोडादारा के पास भूस्खलन से कोरापुट और बोरिगुम्मा के बीच वाहनों की आवाजाही बाधित हुई। सड़क पर बड़ी मात्रा में मिट्टी और मलबा गिरने के बाद उसे हटाने के लिए टीमों को लगाया गया। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में नए भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है।
रायगड़ा क्षेत्र में भी बारिश ने रेल और सड़क यातायात को प्रभावित किया है। कोरापुट-रायगड़ा रेलवे लाइन पर सिकिरापई और केउटगुडा के बीच सुरंग नंबर 29 के पास भूस्खलन के बाद ट्रैक पर मलबा आ गया। इसके चलते रेल परिचालन प्रभावित हुआ और ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर नियंत्रित करना पड़ा।
गजपति जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में भी प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। मोहना और आसपास के इलाकों में बारिश के कारण घाट सड़कों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में मत्स्य पालन मंत्री गोकुलानंद मल्लिक को जिले में तैनात किए जाने का उद्देश्य राहत और बचाव व्यवस्था के साथ विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाए रखना है।
राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को निचले और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने को कहा है। जिन स्थानों पर पानी तेजी से बढ़ रहा है या पहाड़ी ढलानों के खिसकने का खतरा है, वहां रहने वाले लोगों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
प्रशासन की प्राथमिकता जान-माल के नुकसान को रोकना है। इसके लिए संवेदनशील गांवों की पहचान कर स्थानीय अधिकारियों को सतर्क रखा गया है। जरूरत पड़ने पर लोगों को राहत शिविरों में भेजने और उनके लिए भोजन, पेयजल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
मलकानगिरी जिले में बाढ़ की स्थिति पहले से गंभीर बनी हुई है। कई निचले इलाकों में पानी भर गया है और कुछ पुलों के ऊपर से पानी बह रहा है। सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण प्रशासन को लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था करनी पड़ रही है।
दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि भारी बारिश के दौरान बाढ़ और भूस्खलन दोनों का खतरा रहता है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ जाती है और ढलानों से चट्टानें खिसक सकती हैं। दूसरी ओर निचले क्षेत्रों में नदी-नालों का पानी तेजी से फैलने से गांवों और सड़कों के जलमग्न होने की आशंका रहती है।
राज्य सरकार ने राहत और बचाव से जुड़े विभागों को अलर्ट पर रखा है। स्थानीय प्रशासन, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार तैनात किया जा रहा है। सड़क पर गिरे पेड़ों और भूस्खलन के मलबे को हटाकर संपर्क बहाल करने का काम भी जारी है।
बारिश से कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। जिन इलाकों में लंबे समय से पानी जमा है, वहां मिट्टी के मकानों की दीवारें कमजोर हो सकती हैं। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखना भी चुनौती है। बाढ़ के पानी से पेयजल स्रोत दूषित होने की आशंका रहती है, जबकि पेड़ गिरने से बिजली के तार और खंभे क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। प्रभावित क्षेत्रों में संबंधित विभागों को आवश्यक तैयारियां रखने को कहा गया है।
सरकार का विशेष ध्यान कोरापुट और गजपति जैसे पहाड़ी जिलों पर है। दो वरिष्ठ मंत्रियों की तैनाती को प्रशासनिक निगरानी और राहत कार्यों में तेजी लाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। मंत्री स्थानीय अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक संसाधनों और सहायता से संबंधित जरूरतों की जानकारी सरकार तक पहुंचाएंगे।
भारी बारिश के कारण सड़क और रेल यातायात पर पड़े प्रभाव से लोगों की परेशानी बढ़ी है। कई क्षेत्रों में यात्रियों को रास्ते खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है। प्रशासन प्रभावित मार्गों को जल्द से जल्द साफ करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन लगातार बारिश के कारण काम में बाधा आ सकती है।
फिलहाल राज्य सरकार दक्षिणी ओडिशा के प्रभावित जिलों की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। निचले और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने का काम जारी है। कोरापुट में रबी नारायण नाइक और गजपति में गोकुलानंद मल्लिक को तैनात कर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी मजबूत की गई है। बारिश जारी रहने की स्थिति में प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल निकासी के लिए तैयार रहने को कहा है।





