ओडिशा

चट्टामखाना बांध में नुकसान, स्वतंत्र जांच की मांग

Kavita2
8 Aug 2026 3:44 PM IST
चट्टामखाना बांध में नुकसान, स्वतंत्र जांच की मांग
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बलांगीर। ओडिशा के बलांगीर जिले में हाल ही में निर्मित चट्टामखाना बांध के ढांचे को बारिश के दौरान हुए कथित नुकसान ने परियोजना की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बलांगीर के विधायक कलिकेश नारायण सिंह देव ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से बांध को हुए नुकसान की तत्काल और स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

विधायक ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि हाल की बारिश के दौरान बांध की कट-ऑफ दीवार बह गई और बहाव की दिशा में बनाए गए तटबंधों को भी नुकसान पहुंचा। उनका कहना है कि हाल ही में पूरी हुई सार्वजनिक परियोजना के ढांचे को इतनी जल्दी नुकसान पहुंचना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने बांध के डिजाइन, निर्माण और मंजूरी की पूरी प्रक्रिया की समयबद्ध तरीके से तकनीकी जांच कराने का आग्रह किया है।

बारिश के बाद सामने आया नुकसान

विधायक के अनुसार, क्षेत्र में हाल की बारिश के दौरान चट्टामखाना बांध के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान पहुंचा। इनमें कट-ऑफ दीवार के बहने के साथ-साथ बहाव की दिशा में बनाए गए तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने की बात कही गई है।

कट-ऑफ दीवार बांध के महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्सों में शामिल होती है। इसका उद्देश्य पानी के अनियंत्रित रिसाव को रोकना और बांध की संरचना को स्थिरता प्रदान करना होता है। ऐसे में इस हिस्से को नुकसान पहुंचने की बात सामने आने के बाद परियोजना की तकनीकी मजबूती को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हाल ही में पूरी हुई परियोजना पर सवाल

कलिकेश नारायण सिंह देव ने अपने पत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया कि चट्टामखाना बांध हाल ही में पूरा हुआ है। इतनी कम अवधि में सार्वजनिक संपत्ति के महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान पहुंचने को उन्होंने गंभीर विषय बताया।

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि मामले की जांच केवल विभागीय स्तर तक सीमित न रहे, बल्कि स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों के माध्यम से कराई जाए। विधायक का कहना है कि जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि बांध के निर्माण में किसी तरह की तकनीकी कमी, डिजाइन संबंधी समस्या या निर्माण गुणवत्ता से जुड़ी खामी थी या नहीं।

डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया की जांच की मांग

विधायक ने बांध की पूरी परियोजना प्रक्रिया की जांच की मांग की है। इसमें डिजाइन तैयार करने से लेकर निर्माण कार्य और परियोजना को मंजूरी दिए जाने तक के विभिन्न चरणों को शामिल करने की बात कही गई है।

उनका कहना है कि जांच में यह भी देखा जाना चाहिए कि परियोजना के डिजाइन में क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, जल प्रवाह और संभावित भारी बारिश को पर्याप्त रूप से ध्यान में रखा गया था या नहीं।

इसके अलावा निर्माण के दौरान इस्तेमाल की गई सामग्री और अपनाई गई तकनीकी प्रक्रिया की भी जांच जरूरी बताई गई है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या तकनीकी कमी सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की गई है।

तय समय-सीमा में जांच पर जोर

सिंह देव ने मुख्यमंत्री से जांच को एक निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि हाल ही में निर्मित सार्वजनिक परियोजना को नुकसान पहुंचने के मामले में जल्द तथ्य सामने आना जरूरी है।

समय पर जांच होने से यह पता लगाया जा सकेगा कि नुकसान प्राकृतिक कारणों से हुआ या परियोजना की डिजाइन और निर्माण गुणवत्ता में कोई कमी थी। साथ ही, यदि किसी तरह की खामी पाई जाती है तो भविष्य में उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम भी उठाए जा सकेंगे।

सार्वजनिक धन और सुरक्षा का सवाल

बांध जैसी परियोजनाएं केवल स्थानीय विकास से जुड़ी नहीं होतीं, बल्कि इनमें बड़ी मात्रा में सार्वजनिक धन का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा इनसे आसपास के क्षेत्रों की जल व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा भी जुड़ी होती है।

ऐसे में परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में उसकी तकनीकी मजबूती का आकलन करना जरूरी हो जाता है। विधायक ने भी हालिया नुकसान को इसी व्यापक संदर्भ में गंभीर चिंता का विषय बताया है।

सरकार से कार्रवाई की उम्मीद

विधायक की मांग के बाद अब निगाह राज्य सरकार और संबंधित विभाग की अगली कार्रवाई पर है। यदि सरकार स्वतंत्र तकनीकी जांच के आदेश देती है तो विशेषज्ञों की टीम बांध के डिजाइन, निर्माण और क्षतिग्रस्त हिस्सों का तकनीकी परीक्षण कर सकती है।

जांच के दौरान परियोजना से जुड़े दस्तावेज, डिजाइन, निर्माण प्रक्रिया और संबंधित स्वीकृतियों की भी समीक्षा की जा सकती है। इससे नुकसान के वास्तविक कारणों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल चट्टामखाना बांध को बारिश के दौरान हुए नुकसान को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। बलांगीर विधायक ने मुख्यमंत्री से तत्काल स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग करते हुए स्पष्ट किया है कि हाल ही में पूरी हुई सार्वजनिक परियोजना में सामने आई कथित खामियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और यदि जांच के आदेश दिए जाते हैं तो विशेषज्ञों की रिपोर्ट में बांध को हुए नुकसान के पीछे क्या कारण सामने आते हैं।

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