
भुवनेश्वर। ओडिशा में चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का असर लगातार देखने को मिल रहा है। तेज हवाओं और भारी बारिश ने राजधानी भुवनेश्वर में भी तबाही मचाई है। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को चंद्रशेखरपुर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत दमाना खेल मैदान में स्थापित लक्ष्मी पूजा पंडाल तेज हवाओं के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। पंडाल का विशाल सजावटी ढांचा गिर गया और देवी लक्ष्मी की प्रतिमा को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है। मैदान के पास बनाया गया प्रवेश द्वार भी धराशायी हो गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। घटना के बाद स्थानीय लोगों और पूजा आयोजन से जुड़े सदस्यों में चिंता का माहौल है।
तेज हवाओं के आगे नहीं टिक सका विशाल पूजा पंडाल
जानकारी के अनुसार, चक्रवात अर्नब के प्रभाव से मंगलवार से ही भुवनेश्वर और आसपास के इलाकों में बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी था। बुधवार को भी मौसम खराब रहा। इसी दौरान दमाना खेल मैदान में लक्ष्मी पूजा के लिए तैयार किया गया विशाल पंडाल तेज हवाओं की चपेट में आ गया।
हवा का दबाव बढ़ने से पंडाल का सजावटी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया। देखते ही देखते उसका एक बड़ा हिस्सा जमीन पर गिर पड़ा। घटना के बाद आयोजन स्थल पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।
विशाल पंडाल के गिरने से पूजा समिति को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, नुकसान की कुल राशि को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
देवी लक्ष्मी की प्रतिमा को भी पहुंचा नुकसान
बताया जा रहा है कि पंडाल के भीतर स्थापित देवी लक्ष्मी की प्रतिमा भी तेज हवाओं और ढांचे के गिरने के कारण प्रभावित हुई है।
भुवनेश्वर में इस वर्ष गजलक्ष्मी पूजा को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा था। शहर के पटिया स्थित क्लब टाउन मैदान में नॉर्थ भुवनेश्वर गजलक्ष्मी पूजा समिति की ओर से 80 फीट ऊंची देवी लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। यह आयोजन राजधानी के प्रमुख आकर्षणों में शामिल था।
हालांकि, दमाना के क्षतिग्रस्त पंडाल और पटिया की 80 फीट ऊंची प्रतिमा को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में स्थान का अंतर है। इसलिए दमाना में क्षतिग्रस्त प्रतिमा की ऊंचाई की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
सजावटी प्रवेश द्वार भी गिरा, समिति कार्यालय क्षतिग्रस्त
चक्रवाती हवाओं के कारण केवल मुख्य पूजा पंडाल ही प्रभावित नहीं हुआ, बल्कि उसके आसपास बनाए गए अस्थायी ढांचों को भी नुकसान पहुंचा।
प्राप्त विवरण के अनुसार, खेल मैदान के पास बनाया गया सजावटी प्रवेश द्वार तेज हवाओं के कारण गिर गया। इसके अलावा पंडाल के बगल में स्थित पूजा समिति का कार्यालय भी क्षतिग्रस्त हो गया।
पूजा समिति ने श्रद्धालुओं के स्वागत और आयोजन को भव्य बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की सजावट की थी। लेकिन अचानक बदले मौसम ने इन तैयारियों को प्रभावित कर दिया।
ऐसे बड़े अस्थायी ढांचों के क्षतिग्रस्त होने से आयोजकों के सामने सुरक्षा सुनिश्चित करने और कार्यक्रम स्थल को दोबारा व्यवस्थित करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
बड़ा हादसा टला, किसी के हताहत होने की खबर नहीं
इस घटना में सबसे राहत भरी बात यह रही कि किसी व्यक्ति की मौत या घायल होने की सूचना नहीं मिली है।
पूजा पंडाल में सामान्य दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। ऐसे में विशाल ढांचे का गिरना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता था।
तेज हवाओं के दौरान अस्थायी पंडाल, सजावटी प्रवेश द्वार और लोहे-बांस से तैयार संरचनाओं के गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
इस घटना ने एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में मौसम की चेतावनियों और सुरक्षा इंतजामों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता को सामने रखा है।
चक्रवात को लेकर पहले ही अलर्ट पर था प्रशासन
चक्रवात अर्नब की चेतावनी के बाद भुवनेश्वर नगर निगम ने पहले ही आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी थीं।
नगर निगम ने संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए थे। साथ ही कर्मचारियों की छुट्टियां 30 अक्टूबर तक रद्द कर दी गई थीं।
प्रशासन ने पूजा पंडालों में लगाए गए सजावटी द्वारों और अस्थायी संरचनाओं को हटाने के निर्देश भी दिए थे, ताकि तेज हवाओं के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका कम की जा सके।
निचले इलाकों में जलभराव रोकने के लिए पंप लगाने, नालियों की सफाई करने और बिजली आपूर्ति से संबंधित समस्याओं से निपटने की तैयारी भी की गई थी।
भारी बारिश से राजधानी का जनजीवन प्रभावित
चक्रवात अर्नब के कारण भुवनेश्वर के विभिन्न इलाकों में बारिश और तेज हवाओं से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।
रिपोर्टों के अनुसार, शहर के रसूलगढ़, पहाला, नयापल्ली, जयदेव विहार और नंदनकानन सहित कई क्षेत्रों में बारिश से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कई स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आई, जिससे सड़क यातायात प्रभावित हुआ। लगातार बारिश के कारण लोगों को दैनिक गतिविधियां पूरी करने में भी कठिनाई हुई।
मौसम की खराब स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव से जुड़ी व्यवस्थाओं को सतर्क रखा है।
ओडिशा में 30 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
चक्रवात अर्नब के व्यापक असर को देखते हुए ओडिशा सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में एहतियाती कदम उठाए हैं।
बुधवार तक राज्य के संवेदनशील इलाकों से 30 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। विशेष रूप से गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट, मलकानगिरी और नबरंगपुर जिलों में प्रशासन को सतर्क रखा गया है।
मौसम विभाग ने दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी। राहत और बचाव दलों को भी संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है।
पूजा आयोजनों में सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
भुवनेश्वर में लक्ष्मी पूजा पंडाल के क्षतिग्रस्त होने की घटना ने बड़े धार्मिक आयोजनों में अस्थायी ढांचों की सुरक्षा पर नए सिरे से ध्यान खींचा है।
विशाल पंडाल और प्रवेश द्वार त्योहारों की सुंदरता बढ़ाते हैं, लेकिन तेज बारिश तथा चक्रवाती हवाओं के दौरान इनके गिरने की आशंका बनी रहती है।
विशेषज्ञों की सामान्य सुरक्षा सलाह के अनुसार, खराब मौसम की चेतावनी मिलने पर ऐसे ढांचों की मजबूती की जांच और आवश्यकता पड़ने पर आयोजन स्थल खाली कराना जरूरी होता है।
फिलहाल इस घटना में किसी जनहानि की खबर नहीं है, लेकिन पंडाल और सजावटी संरचनाओं को पहुंचे नुकसान ने पूजा समितियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।





