
भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के प्रभाव से ओडिशा के कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बढ़ गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को दक्षिणी ओडिशा के पांच जिलों में अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड की आशंका जताई है। भुवनेश्वर क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक डॉ. मनोरमा मोहंती ने बताया कि मलकानगिरी, कोरापुट, रायगड़ा, गंजाम और गजपति जिले विशेष रूप से संवेदनशील हैं। इन इलाकों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश के कारण निचले क्षेत्रों में अचानक जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिणी ओडिशा में हवाओं की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि तेज झोंकों के साथ यह 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है। राज्य प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए राहत एवं बचाव दलों को सतर्क कर दिया है।
ओडिशा के इन पांच जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा
मौसम विभाग ने दक्षिणी ओडिशा के मलकानगिरी, कोरापुट, रायगड़ा, गंजाम और गजपति जिलों में अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई है।
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक डॉ. मनोरमा मोहंती के अनुसार, चक्रवात अर्नब के कारण इन जिलों में बहुत भारी बारिश हो सकती है। लगातार बारिश से नदियों, नालों और अन्य जल स्रोतों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
विशेष रूप से पहाड़ी और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कम समय में अत्यधिक बारिश होने से अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में लोगों को स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है हवाओं की रफ्तार
आईएमडी के अनुसार, चक्रवात के प्रभाव से दक्षिणी ओडिशा के कई हिस्सों में तेज हवाएं चलने की संभावना है।
शुरुआती चरण में हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान था, जबकि झोंकों के साथ इसकी रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती थी।
28 अक्टूबर की सुबह से दक्षिणी जिलों में हवाओं की गति बढ़कर 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की चेतावनी जारी की गई।
कुछ स्थानों पर तेज झोंकों के साथ हवा की अधिकतम रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने, कमजोर संरचनाओं को नुकसान पहुंचने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा है।
आंध्र प्रदेश में लैंडफॉल के बाद कमजोर पड़ा चक्रवात
मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार, चक्रवात अर्नब ने बुधवार तड़के आंध्र प्रदेश और यनम तट के पास लैंडफॉल किया।
इसके बाद तूफान की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आने लगी। बुधवार सुबह 8:30 बजे तक यह अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान से कमजोर होकर भीषण चक्रवाती तूफान की श्रेणी में आ गया।
हालांकि, तूफान के कमजोर होने के बावजूद ओडिशा में भारी बारिश का खतरा बना हुआ है।
मौसम विभाग का कहना है कि चक्रवात के प्रभाव से दक्षिणी ओडिशा में व्यापक वर्षा हो सकती है। इसके कारण अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं की आशंका बनी रहेगी।
भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 28 अक्टूबर को ओडिशा में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
मलकानगिरी, कोरापुट, रायगड़ा, गजपति और गंजाम जिलों में कुछ स्थानों पर 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है।
इसके अलावा पुरी, कालाहांडी, कंधमाल, नबरंगपुर और अन्य जिलों में भी भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार, 29 अक्टूबर को भी राज्य के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश का खतरा रहेगा।
30 अक्टूबर को बारिश की तीव्रता में कमी आने का अनुमान है। हालांकि, मौसम की स्थिति में बदलाव के अनुसार चेतावनियां संशोधित की जा सकती हैं।
पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का भी खतरा
दक्षिणी ओडिशा के कई जिले पहाड़ी और वन क्षेत्रों से घिरे हुए हैं। इनमें कोरापुट, रायगड़ा, गजपति और मलकानगिरी जैसे जिले शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश होने से पहाड़ियों की मिट्टी कमजोर पड़ सकती है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक बारिश के कारण संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं भी हो सकती हैं।
इससे ग्रामीण सड़कों, पुलों और आवागमन के रास्तों पर असर पड़ सकता है।
प्रशासन को पहाड़ी रास्तों और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने की सलाह दी गई है।
आठ जिलों में स्कूल बंद, राहत टीमें तैनात
चक्रवात के खतरे को देखते हुए ओडिशा सरकार ने कई एहतियाती कदम उठाए हैं।
राज्य के आठ जिलों में 28 अक्टूबर को शिक्षण संस्थानों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है।
राज्य सरकार ने लगभग 48 हजार लोगों को संभावित प्रभावित क्षेत्रों से निकालने की योजना बनाई है।
प्रशासन ने 135 स्थायी चक्रवात आश्रय स्थलों और लगभग 1,600 अस्थायी राहत केंद्रों की व्यवस्था की है।
आपदा से निपटने के लिए 294 राहत एवं बचाव टीमों को अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात किया गया है।
समुद्र में ऊंची लहरें, मछुआरों को चेतावनी
चक्रवात अर्नब के कारण ओडिशा के तटीय इलाकों में समुद्र की स्थिति खराब बनी हुई है।
मौसम विभाग ने दक्षिणी ओडिशा के तट के पास समुद्र में ऊंची लहरें उठने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है।
मछुआरों को 27 से 29 अक्टूबर के दौरान ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय समुद्री क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दी गई है।
समुद्र में मौजूद मछुआरों को सुरक्षित स्थानों पर लौटने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
चक्रवात के दौरान समुद्र तटों, बंदरगाहों और निचले तटीय क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
किसानों के लिए भी बढ़ी चिंता
भारी बारिश और तेज हवाओं से कृषि गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका है।
विशेष रूप से धान और अन्य खरीफ फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसलें खराब होने का जोखिम बढ़ता है।
तेज हवाओं के कारण तैयार फसलें गिर सकती हैं, जबकि लगातार बारिश से कटाई और परिवहन कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
मौसम विभाग ने किसानों को खेतों में अनावश्यक रूप से जाने से बचने और कृषि विभाग की सलाह का पालन करने को कहा है।
अगले 24 से 48 घंटे महत्वपूर्ण
चक्रवात अर्नब के प्रभाव से ओडिशा के दक्षिणी जिलों में बुधवार और गुरुवार को मौसम चुनौतीपूर्ण बना रह सकता है।
मौसम विभाग ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे भारी बारिश के दौरान नदी-नालों को पार करने की कोशिश न करें और जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखें।
फिलहाल दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि फ्लैश फ्लड का अलर्ट संभावित खतरे की चेतावनी है। इससे यह नहीं माना जाना चाहिए कि सभी पांच जिलों में बाढ़ आ चुकी है।





