
भुवनेश्वर। ओडिशा के कटक जिले में स्थित प्रसिद्ध मां भट्टारिका मंदिर इन दिनों बाढ़ की चपेट में आ गया है। महानदी का जलस्तर बढ़ने के कारण बड़ंबा क्षेत्र में स्थित मंदिर परिसर में पानी प्रवेश कर गया है। स्थिति गंभीर होने के बाद प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है। इसके तहत मंदिर परिसर में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
प्रशासन के अनुसार, लगातार बारिश और महानदी में बढ़ते जलस्तर के कारण मां भट्टारिका मंदिर परिसर में करीब दो फीट तक पानी भर गया है। अचानक आई बाढ़ की स्थिति से मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
मंदिर क्षेत्र में बाढ़ का पानी पहुंचने के बाद बंदोबस्त विभाग (एंडोमेंट डिपार्टमेंट) ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जब तक बाढ़ की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक वे मंदिर दर्शन के लिए न आएं। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए उठाया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
मंदिर के पुजारियों के अनुसार, बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद मां भट्टारिका की प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। जलस्तर कम होने और स्थिति सामान्य होने के बाद प्रतिमा को दोबारा मूल गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। मंदिर प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर जरूरी कदम उठा रहा है।
प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों के लोगों और श्रद्धालुओं को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित इलाके में जाने से बचने की अपील की गई है। अधिकारियों ने बताया कि जलस्तर में लगातार बदलाव हो रहा है, इसलिए किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जा सकता।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए श्रद्धालुओं को पास स्थित सिंहनाथ मंदिर जाने से भी मना किया गया है। प्रशासन का कहना है कि आसपास के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है और नदी किनारे जाने से खतरा बढ़ सकता है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
महानदी के किनारे स्थित मां भट्टारिका मंदिर ओडिशा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। हालांकि मानसून के मौसम में महानदी का जलस्तर बढ़ने के कारण मंदिर परिसर में कई बार बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने से मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में परेशानी होती है। प्रशासन द्वारा समय-समय पर सुरक्षा उपाय किए जाते हैं, लेकिन तेज बारिश और नदी के उफान के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। धारा 163 लागू रहने तक मंदिर परिसर में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और बाढ़ की स्थिति सामान्य होने तक धैर्य बनाए रखें।





