
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने अवैध रेत खनन और उसकी ढुलाई के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। जनवरी से 31 अगस्त 2026 के बीच राज्य के अलग-अलग जिलों में रेत स्रोतों पर छापेमारी कर अवैध गतिविधियों की जांच की गई। इस दौरान कई मामले दर्ज किए गए और संबंधित लोगों से जुर्माना वसूला गया। राज्य के खान एवं इस्पात विभाग की ओर से अवैध खनन पर निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। ओडिशा के खान निदेशालय की जिम्मेदारियों में अवैध खनन और खनिजों की तस्करी की रोकथाम तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों का प्रवर्तन भी शामिल है।
यह जानकारी ओडिशा विधानसभा में काकटपुर से बीजू जनता दल विधायक तुषारकांति बेहरा की ओर से पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में दी गई। परिवहन, वाणिज्य, इस्पात एवं खान मंत्री विभूति भूषण जेना ने सदन को बताया कि राज्यभर में कथित अवैध रेत खनन और रेत की ढुलाई के खिलाफ अधिकारियों ने कार्रवाई की है।
सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान अलग-अलग जिलों में रेत के स्रोतों पर छापे मारे गए। इन छापों के दौरान अवैध खनन और परिवहन से जुड़े मामलों की पहचान की गई। संबंधित मामलों में नियमानुसार जुर्माना लगाने के साथ राशि जब्त करने की कार्रवाई भी की गई।
खोरधा में सबसे अधिक जुर्माना
अवैध रेत खनन और ढुलाई के खिलाफ की गई कार्रवाई में खोरधा जिला जुर्माने के मामले में सबसे ऊपर रहा। जिले में कार्रवाई के दौरान कुल 11.19 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। यह आंकड़ा राज्य में अवैध रेत गतिविधियों के खिलाफ प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई की व्यापकता को दर्शाता है।
खोरधा राजधानी भुवनेश्वर सहित तेजी से विकसित हो रहे शहरी और आसपास के क्षेत्रों वाला जिला है। निर्माण गतिविधियों के लिए रेत की मांग लगातार बनी रहती है। ऐसे में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन पर नियंत्रण प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय है।
ओडिशा सरकार का खान एवं इस्पात विभाग खनिजों से संबंधित प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ अवैध खनन की रोकथाम और नियंत्रण की जिम्मेदारी भी निभाता है। विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर अवैध खनन की रोकथाम और खनिजों की तस्करी पर नियंत्रण को निदेशालय के प्रमुख कार्यों में शामिल किया गया है।
कोरापुट में सबसे ज्यादा छापे
रेत स्रोतों पर सबसे ज्यादा छापेमारी कोरापुट जिले में की गई। अधिकारियों ने जिले में 294 रेत स्रोतों पर छापे मारे। इन कार्रवाइयों के बाद 11 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा जुर्माने और संबंधित राशि के तौर पर 2.37 करोड़ रुपये जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है।
कोरापुट में बड़ी संख्या में रेत स्रोतों पर कार्रवाई किए जाने से स्पष्ट है कि प्रशासन ने जिले में रेत के स्रोतों की निगरानी को प्राथमिकता दी। छापेमारी के दौरान सामने आए मामलों में संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की गई।
सरकार के अनुसार, कार्रवाई का उद्देश्य रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन पर रोक लगाना है। इससे प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन को नियंत्रित करने और सरकारी राजस्व को होने वाले संभावित नुकसान को रोकने में भी मदद मिल सकती है।
बालेश्वर में 291 स्रोतों पर छापे
बालेश्वर जिले में भी अवैध रेत खनन के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई। इस्पात एवं खान विभाग के अधिकारियों ने जिले में 291 रेत स्रोतों पर छापे मारे। इन छापों के बाद 234 मामले दर्ज किए गए और 1.55 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया।
बालेश्वर में छापों की संख्या और दर्ज मामलों के आंकड़ों में अंतर भी सामने आया है। इसका मतलब है कि सभी निरीक्षणों के दौरान मामला दर्ज होना जरूरी नहीं था, जबकि जिन मामलों में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि या कार्रवाई का आधार मिला, उनमें संबंधित प्रक्रिया अपनाई गई।
सरकार की कार्रवाई का एक प्रमुख हिस्सा अवैध रेत परिवहन पर नजर रखना भी है। रेत के स्रोत से लेकर उसके परिवहन तक नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए विभागीय स्तर पर जांच की जाती है।
गंजाम में 180 रेत स्रोतों की जांच
गंजाम जिले में अधिकारियों ने 180 रेत स्रोतों पर छापे मारे। इस कार्रवाई के दौरान 1.85 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूले जाने की जानकारी विधानसभा में दी गई है। गंजाम भी राज्य के उन जिलों में शामिल रहा जहां रेत स्रोतों पर बड़ी संख्या में कार्रवाई की गई।
अलग-अलग जिलों में छापेमारी की संख्या और वसूले गए जुर्माने में अंतर रहा। इससे पता चलता है कि कार्रवाई का स्वरूप स्थानीय परिस्थितियों और सामने आए मामलों के आधार पर अलग-अलग रहा। सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में खोरधा में सबसे अधिक जुर्माना, जबकि कोरापुट में सबसे अधिक रेत स्रोतों पर छापेमारी की जानकारी सामने आई है।
अवैध खनन पर लगातार निगरानी
ओडिशा में खनिज संसाधनों के प्रबंधन और अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए विभागीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था मौजूद है। आधिकारिक खनिज पोर्टल पर लाइसेंस, परमिट, ट्रांसपोर्टर और खनिज परिवहन से संबंधित विभिन्न व्यवस्थाएं संचालित की जाती हैं।
रेत जैसे लघु खनिजों के अवैध उत्खनन से पर्यावरणीय प्रभाव के साथ सरकारी राजस्व पर भी असर पड़ सकता है। इसी वजह से रेत स्रोतों की निगरानी, अनुमति के अनुसार खनन और वैध परिवहन सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए अहम है।
जनवरी से अगस्त 2026 के बीच हुई कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं कि राज्य सरकार ने इस अवधि में कई जिलों में रेत स्रोतों को लेकर जांच और प्रवर्तन अभियान चलाया। खोरधा में 11.19 करोड़ रुपये का जुर्माना, कोरापुट में 294 स्रोतों पर छापे, बालेश्वर में 291 स्रोतों पर कार्रवाई और गंजाम में 180 स्रोतों पर छापेमारी इस अभियान के प्रमुख आंकड़े हैं।
विधानसभा में दिए गए लिखित जवाब के बाद अवैध रेत खनन और परिवहन पर राज्य सरकार की कार्रवाई के आंकड़े सार्वजनिक चर्चा में आए हैं। आने वाले समय में भी रेत स्रोतों की निगरानी और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई जारी रहने की संभावना है। फिलहाल सरकार की ओर से सामने रखे गए आंकड़ों में अलग-अलग जिलों में की गई छापेमारी, दर्ज मामलों और वसूले गए जुर्माने का विवरण सामने आया है।





