
भुवनेश्वर। ओडिशा में आवासीय इमारतों और संपत्तियों का व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ राज्य सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य के हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट मंत्री डॉ. कृष्ण चंद्र महापात्रा ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार ऐसे मामलों की जांच कर रही है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। राज्य में अब तक करीब 6,000 नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
मंत्री डॉ. कृष्ण चंद्र महापात्रा ने बताया कि ये नोटिस उन लोगों को जारी किए गए हैं, जो आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित संपत्तियों का व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की ओर से ऐसे मामलों की लगातार पहचान की जा रही है। विभाग यह भी देख रहा है कि आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के कारण स्थानीय लोगों को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
महापात्रा के मुताबिक, विभाग ने करीब 300 ऐसे मकानों की भी पहचान की है, जहां व्यावसायिक गतिविधियों के चलते ट्रैफिक से संबंधित समस्याएं सामने आ रही हैं। इन स्थानों पर लोगों और वाहनों की आवाजाही बढ़ने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे मामलों को सार्वजनिक सुरक्षा और स्थानीय यातायात व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि ऐसी व्यावसायिक गतिविधियां आवासीय क्षेत्रों से संचालित नहीं होनी चाहिए, जिनसे ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हो या सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो। आवासीय क्षेत्रों की अपनी प्रकृति और उपयोग संबंधी नियम होते हैं। यदि वहां बड़े पैमाने पर कमर्शियल गतिविधियां शुरू हो जाती हैं, तो स्थानीय बुनियादी ढांचे और यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
राज्य सरकार की कार्रवाई में फिलहाल उन संपत्तियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां कमर्शियल गतिविधियों के कारण लोगों की आवाजाही और वाहनों की संख्या बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में ट्रैफिक की समस्या पैदा हो रही है। विभाग ऐसे मामलों की जांच करने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर रहा है।
डॉ. कृष्ण चंद्र महापात्रा ने कहा कि सरकार की कोशिश केवल कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है। सरकार कारोबार और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में काम कर रही है। एक तरफ नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है कि व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के हितों पर अनावश्यक प्रभाव न पड़े।
मंत्री के बयान से साफ है कि राज्य सरकार आवासीय संपत्तियों के कमर्शियल इस्तेमाल के मामलों को लेकर सतर्क है। हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट द्वारा ऐसे मामलों की जांच की जा रही है और परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। जिन संपत्तियों के इस्तेमाल से ट्रैफिक या सार्वजनिक सुरक्षा की समस्या पैदा हो रही है, उन पर विशेष नजर रखी जा रही है।
शहरी क्षेत्रों में कई बार आवासीय संपत्तियों का इस्तेमाल कार्यालय, दुकान या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाता है। ऐसी गतिविधियों के चलते संबंधित इलाके में वाहनों और लोगों की आवाजाही बढ़ सकती है। यदि किसी क्षेत्र की सड़कें और पार्किंग जैसी सुविधाएं मुख्य रूप से आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की गई हों, तो अतिरिक्त व्यावसायिक गतिविधियों से व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है।
इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों की पहचान शुरू की है। करीब 6,000 नोटिस जारी किए जाने से यह संकेत मिलता है कि विभाग बड़े स्तर पर ऐसे मामलों की समीक्षा कर रहा है। वहीं करीब 300 घरों की पहचान ट्रैफिक से जुड़ी समस्याओं के आधार पर किए जाने की बात कही गई है।
मंत्री महापात्रा ने कहा कि हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट प्रत्येक मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठा रहा है। सरकार सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करने के साथ यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आम नागरिकों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो।
फिलहाल विभाग की कार्रवाई जारी है। आने वाले समय में जांच के आधार पर और भी संपत्तियों के खिलाफ कदम उठाए जा सकते हैं। सरकार का जोर इस बात पर है कि आवासीय और व्यावसायिक उपयोग से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन हो और शहरी इलाकों में अनियोजित व्यावसायिक गतिविधियों के कारण ट्रैफिक तथा सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी परेशानियां न बढ़ें।





