
सुंदरगढ़। ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां अचानक आई बाढ़ की स्थिति में एक पति-पत्नी ने पेड़ पर चढ़कर करीब तीन घंटे तक अपनी जान बचाई। समय रहते प्रशासन और राहत टीमों के पहुंचने से दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
यह घटना बणई थाना क्षेत्र के बीजादिह के पास स्थित ध्यातिकीपोशी गांव की बताई जा रही है। रुकुड़ा डैम से अचानक पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में तेज बहाव के साथ पानी भर गया, जिसके कारण दंपती बाढ़ के बीच फंस गए थे।
बागीचे में गए थे पति-पत्नी
जानकारी के अनुसार, क्षेत्रवासी प्रधान और उनकी पत्नी अपने बागीचे में परवल तोड़ने के लिए गए थे।
दोनों अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त थे, तभी अचानक रुकुड़ा डैम से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया।
बताया जा रहा है कि डैम के अधिकारियों ने बिना पूर्व सूचना के अचानक चार गेट खोल दिए, जिसके बाद निचले इलाकों में तेजी से पानी भरने लगा।
कुछ ही देर में जलमग्न हुआ इलाका
डैम से छोड़े गए पानी का बहाव इतना तेज था कि देखते ही देखते आसपास के क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन गए।
पति-पत्नी जब तक स्थिति को समझ पाते, तब तक पानी उनके चारों ओर फैल चुका था। तेज बहाव के कारण उनके लिए सुरक्षित स्थान तक पहुंचना मुश्किल हो गया।
अपनी जान बचाने के लिए दोनों ने पास के एक पेड़ का सहारा लिया और उस पर चढ़ गए।
तीन घंटे तक पेड़ पर बैठे रहे दंपती
बाढ़ के पानी के बीच फंसे पति-पत्नी करीब तीन घंटे तक पेड़ पर बैठे रहे।
इस दौरान दोनों लगातार मदद का इंतजार करते रहे। आसपास पानी का तेज बहाव होने के कारण कोई भी तुरंत उनके पास नहीं पहुंच पा रहा था।
ग्रामीणों को जब इस घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने प्रशासन को सूचना दी।
प्रशासन ने चलाया बचाव अभियान
सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।
टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला।
बाढ़ के पानी के बीच फंसे रहने के कारण दंपती की हालत कमजोर हो गई थी, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए गुरुंडिया अस्पताल भेजा गया।
अचानक पानी छोड़े जाने से ग्रामीणों में नाराजगी
घटना के बाद स्थानीय लोगों में डैम प्रबंधन को लेकर नाराजगी भी देखने को मिली।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी छोड़े जाने से पहले सूचना दी जाती तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।
अचानक पानी बढ़ने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
डैम प्रबंधन पर उठे सवाल
इस घटना के बाद रुकुड़ा डैम से पानी छोड़ने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बांध से पानी छोड़े जाने से पहले आसपास के गांवों को अलर्ट किया जाना चाहिए, ताकि लोग समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सकें।
प्रशासन ने लिया संज्ञान
प्रशासन ने घटना को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों ने पूरे मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए डैम प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई जा रही है।
बाल-बाल बची दंपती की जान
क्षेत्रवासी प्रधान और उनकी पत्नी के लिए यह घटना जिंदगी भर याद रहने वाली है।
कुछ ही मिनटों में सामान्य स्थिति से बाढ़ के हालात बनने के बाद दोनों ने पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाई।
यदि समय पर राहत टीम नहीं पहुंचती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
मानसून में बढ़ता है खतरा
बरसात के मौसम में बांधों और नदियों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए अचानक जलस्तर बढ़ना बड़ा खतरा बन जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बांधों से पानी छोड़ने से पहले स्थानीय लोगों को सूचना देना और चेतावनी जारी करना बेहद जरूरी होता है।





