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इस्कॉन की अलग-अलग रथ यात्राओं पर विवाद, SJTA राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मांगेगा हस्तक्षेप

Kavita2
14 July 2026 12:51 PM IST
इस्कॉन की अलग-अलग रथ यात्राओं पर विवाद, SJTA राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मांगेगा हस्तक्षेप
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पुरी : पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने इस्कॉन (ISKCON) द्वारा भारत के बाहर अलग-अलग तारीखों पर आयोजित की जा रही रथ यात्राओं को लेकर आपत्ति जताई है। SJTA ने कहा है कि वार्षिक रथ यात्रा समाप्त होने के बाद एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख हस्तियों से मुलाकात करेगा और इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करेगा।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इस्कॉन द्वारा आयोजित की जा रही असामयिक स्नान यात्राओं और रथ यात्राओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।

SJTA ने एक प्रेस रिलीज जारी कर इस्कॉन के नेशनल कम्युनिकेशंस ऑफिस की ओर से 12 जुलाई को जारी बयान पर आपत्ति जताई है। मंदिर प्रशासन ने आरोप लगाया कि इस्कॉन ने विदेशों में आयोजित होने वाली रथ यात्राओं को लेकर “गलत बयान” दिए हैं।

SJTA ने इस्कॉन के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें कहा गया था कि सालभर अलग-अलग तारीखों पर आयोजित होने वाली उसकी रथ यात्राओं को शास्त्रों और परंपराओं का समर्थन प्राप्त है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की अपनी निश्चित धार्मिक परंपरा और विधि है, जिसका पालन सदियों से किया जाता रहा है।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस मुद्दे पर 20 मार्च 2025 को भुवनेश्वर में एक विशेष बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में धार्मिक विद्वानों, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के प्रतिनिधियों और इस्कॉन से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया था। बैठक में गजपति महाराजा दिव्यसिंह देब और SJTA के मुख्य प्रशासक की मौजूदगी भी रही थी।

SJTA ने बताया कि बैठक के दौरान इस्कॉन के प्रतिनिधियों ने भारत के बाहर अलग-अलग तारीखों पर रथ यात्रा आयोजित करने के पक्ष में तर्क रखे थे। हालांकि, मंदिर प्रशासन से जुड़े विद्वानों ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि यह परंपरागत धार्मिक मान्यताओं और पवित्र ग्रंथों के अनुरूप नहीं है।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है। इसके आयोजन की तारीख, पूजा विधि और अन्य अनुष्ठानों का विशेष महत्व है।

SJTA ने यह भी कहा कि पुरी की रथ यात्रा को धार्मिक परंपराओं के अनुसार आयोजित किया जाता है और इसमें किसी भी तरह का बदलाव स्वीकार्य नहीं हो सकता। प्रशासन का मानना है कि दुनिया के अन्य हिस्सों में होने वाले आयोजनों को भी मूल परंपराओं और धार्मिक नियमों का पालन करना चाहिए।

वहीं, इस्कॉन लंबे समय से दुनिया भर में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का आयोजन करता रहा है। संगठन का कहना है कि विदेशों में आयोजित होने वाले कार्यक्रम भगवान जगन्नाथ की भक्ति और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का माध्यम हैं।

इस्कॉन की ओर से यह भी तर्क दिया जाता रहा है कि अलग-अलग देशों में स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की सुविधा को देखते हुए आयोजन की तारीखों में बदलाव किया जाता है। हालांकि, SJTA इस तर्क से सहमत नहीं है और इसे परंपराओं के विपरीत बता रहा है।

इस विवाद के बीच अब SJTA का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात करने की तैयारी कर रहा है। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य केंद्र सरकार के सामने अपनी आपत्तियां रखना और धार्मिक परंपराओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की मांग करना है।

जगन्नाथ संस्कृति से जुड़े इस मुद्दे पर धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में SJTA और इस्कॉन के बीच यह विवाद और बढ़ सकता है।

फिलहाल सभी की नजर पुरी में होने वाली वार्षिक रथ यात्रा के समापन और उसके बाद होने वाली प्रतिनिधिमंडल की संभावित मुलाकातों पर है। इस बैठक के बाद केंद्र सरकार का रुख भी इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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