
भुवनेश्वर। ओडिशा में स्कूली पाठ्यपुस्तकों को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गहरा गया है। पहली कक्षा के छात्रों के लिए तैयार की गई एक किताब में कथित तौर पर ओड़िया वर्णमाला को गलत क्रम में प्रस्तुत किए जाने का मामला सामने आया है। यह मामला इंग्लिश मीडियम प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई जा रही किताब ‘झुलना-1’ से जुड़ा है।
जानकारी के अनुसार, किताब में ओड़िया भाषा के अक्षरों को पारंपरिक क्रम के अनुसार नहीं रखा गया है। आरोप है कि इसमें वर्णमाला की शुरुआत स्वर अक्षर ‘ଅ’ (अ) से करने के बजाय व्यंजन ‘ଚ’ (च) से की गई है। इसके बाद अक्षरों का क्रम भी सामान्य भाषा नियमों से अलग दिखाई देता है।
बताया जा रहा है कि किताब में ‘ଚ’ (च) के बाद ‘ଟ’ (ट), ‘ମ’ (म), ‘ଗ’ (ग) और ‘ର’ (र) जैसे अक्षर दिए गए हैं, जबकि ओड़िया वर्णमाला के शुरुआती स्वर अक्षर ‘ଅ’ (अ) और ‘ଆ’ (आ) बाद के हिस्से में रखे गए हैं। इस बदलाव को लेकर अभिभावकों और शिक्षकों ने सवाल उठाए हैं।
शिक्षाविदों का कहना है कि प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों को भाषा की मूल जानकारी देने के लिए अक्षरों का सही क्रम बहुत महत्वपूर्ण होता है। पहली कक्षा में बच्चे पहली बार भाषा की औपचारिक शिक्षा प्राप्त करते हैं, ऐसे में किताबों में किसी भी तरह की गलती उनकी सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
इस मामले के सामने आने के बाद अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि छोटे बच्चों के लिए तैयार की जाने वाली किताबों को जारी करने से पहले विशेषज्ञों द्वारा अच्छी तरह जांच की जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शुरुआती कक्षाओं की किताबों में ही ऐसी गलतियां होंगी तो बच्चों को सही भाषा ज्ञान कैसे मिलेगा।
यह पहली बार नहीं है जब ओडिशा में स्कूली किताबों को लेकर विवाद सामने आया है। इससे पहले भी नई पाठ्यपुस्तकों में भाषा, तथ्य और सामग्री से जुड़ी कुछ गलतियों को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं के बाद शिक्षा व्यवस्था में किताबों की समीक्षा और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया पर चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पाठ्यपुस्तक तैयार करना एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें विषय विशेषज्ञों, भाषा विशेषज्ञों और शिक्षकों की भूमिका अहम होती है। खासकर क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़ी किताबों में अक्षरों, उच्चारण और भाषा संरचना की शुद्धता सुनिश्चित करना जरूरी होता है।
शिक्षकों का कहना है कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में जो जानकारी दी जाती है, उसका प्रभाव लंबे समय तक रहता है। यदि बच्चे गलत क्रम या गलत जानकारी के साथ भाषा सीखना शुरू करते हैं तो बाद में उन्हें सुधारने में परेशानी हो सकती है।
अभिभावकों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग इस मामले की जांच करे और यदि किताब में गलती पाई जाती है तो उसमें जल्द सुधार किया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी त्रुटियां न हों, इसके लिए किताबों की समीक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत बताई गई है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में लागू की जाने वाली किताबों की अंतिम मंजूरी से पहले कई स्तरों पर जांच होनी चाहिए। डिजिटल और प्रिंट दोनों प्रारूपों में प्रकाशित सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि छात्रों तक सही जानकारी पहुंचे।
फिलहाल ‘झुलना-1’ किताब में ओड़िया वर्णमाला के क्रम को लेकर उठे विवाद के बाद सभी की नजर शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर है। अभिभावक और शिक्षक उम्मीद कर रहे हैं कि मामले की जांच कर जल्द आवश्यक सुधार किए जाएंगे, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।





