ओडिशा

कनाडा में ISKCON के रथ यात्रा आयोजन पर विवाद, जगन्नाथ भक्तों ने जताई आपत्ति

Kavita2
24 May 2026 9:59 AM IST
कनाडा में ISKCON के रथ यात्रा आयोजन पर विवाद, जगन्नाथ भक्तों ने जताई आपत्ति
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Odisha ओडिशा: इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (ISKCON) द्वारा 30 मई को कनाडा में रथ यात्रा (रथ उत्सव) आयोजित करने के निर्णय को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भगवान जगन्नाथ के कई भक्तों ने इस फैसले पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए इसे पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के खिलाफ बताया है।

भक्तों का कहना है कि जगन्नाथ रथ यात्रा एक अत्यंत पवित्र और निर्धारित परंपरा पर आधारित उत्सव है, जिसे केवल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के शुभ अवसर पर ही आयोजित किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, निर्धारित तिथि से अलग किसी अन्य दिन इस उत्सव को मनाना धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय नियमों का उल्लंघन है।

भुवनेश्वर के एक भक्त प्रदीप मोहंती ने इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह कदम जगन्नाथ परंपरा से जुड़े स्थापित रीति-रिवाजों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि रथ यात्रा केवल एक आयोजन नहीं बल्कि सदियों पुरानी आस्था और परंपरा का प्रतीक है, जिसे निश्चित नियमों के अनुसार ही मनाया जाना चाहिए।

इसी तरह बालासोर की भक्त रूपा पटनायक ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों और मंदिर परंपराओं के अनुसार रथ यात्रा केवल निर्धारित तिथि पर ही आयोजित की जाती है। उनके अनुसार, समय और तिथि में बदलाव करना धार्मिक भावनाओं और परंपराओं के साथ समझौता करने जैसा है।

आलोचकों ने इस प्रस्तावित आयोजन को लेकर इसे हिंदू धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के निर्णय से सदियों पुरानी जगन्नाथ संस्कृति और परंपरा की पवित्रता प्रभावित होती है। उन्होंने मांग की है कि इस कार्यक्रम को तुरंत रद्द किया जाए या फिर इसे पारंपरिक नियमों के अनुसार ही आयोजित किया जाए।

भक्तों का यह भी तर्क है कि रथ यात्रा केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था और आध्यात्मिकता से जुड़ा हुआ अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। इसलिए इसमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन परंपराओं की मूल भावना को प्रभावित कर सकता है।

विवाद के बाद सोशल और धार्मिक संगठनों में भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का मानना है कि विदेशों में आयोजित धार्मिक आयोजनों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बदलाव किए जाते हैं, लेकिन परंपराओं की मूल भावना को बनाए रखना आवश्यक है।

फिलहाल ISKCON की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं भक्त समुदाय इस आयोजन पर पुनर्विचार की मांग कर रहा है।

यह मामला अब धार्मिक परंपराओं और वैश्विक स्तर पर उनके पालन को लेकर एक बहस का विषय बन गया है, जिसमें परंपरा और अनुकूलन के बीच संतुलन पर सवाल उठ रहे हैं।

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