ओडिशा

महिला सब-इंस्पेक्टर की बहाली मामले में पूर्व DGP पर अवमानना कार्रवाई

Kavita2
27 Aug 2026 5:02 PM IST
महिला सब-इंस्पेक्टर की बहाली मामले में पूर्व DGP पर अवमानना कार्रवाई
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ओडिशा : हाई कोर्ट ने महिला सब-इंस्पेक्टर सागरिका परिडा को नौकरी पर वापस रखने के आदेश का कथित रूप से पालन नहीं करने के मामले में राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) योगेश बहादुर खुराना के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील को भी खारिज कर दिया, जिसमें पूर्व DGP के खिलाफ चल रही कार्रवाई को रोकने की मांग की गई थी।

मामला महिला सब-इंस्पेक्टर सागरिका परिडा की सेवा बहाली से जुड़ा हुआ है। परिडा को कथित तौर पर अपने आपराधिक रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी छिपाने के आरोप में पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हाई कोर्ट ने दिया था बहाली का आदेश

जानकारी के अनुसार, सागरिका परिडा की याचिका पर सुनवाई करते हुए ओडिशा हाई कोर्ट ने 25 सितंबर 2025 को उन्हें दोबारा नौकरी पर रखने का आदेश दिया था।

कोर्ट के आदेश के बाद भी जब उनकी बहाली नहीं हुई तो परिडा ने अवमानना याचिका दाखिल की। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने जानबूझकर आदेश का पालन नहीं किया।

याचिका में कहा गया कि हाई कोर्ट के आदेश की अनदेखी न्यायिक प्रक्रिया की अवमानना है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

पूर्व DGP पर लगाए गए आरोप

परिडा की ओर से दायर अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया कि तत्कालीन DGP योगेश बहादुर खुराना ने हाई कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित नहीं किया।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय कुमार मिश्रा ने इस पर विचार किया और पूर्व DGP के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने का निर्णय लिया।

कोर्ट ने माना कि अदालत के आदेशों का पालन करना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है और किसी भी अधिकारी द्वारा जानबूझकर आदेश की अनदेखी नहीं की जा सकती।

सरकार ने की थी कार्रवाई रोकने की मांग

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि योगेश बहादुर खुराना 16 अगस्त 2026 को पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसी आधार पर सरकार ने उनके खिलाफ शुरू की गई अवमानना कार्यवाही को रोकने का अनुरोध किया था।

हालांकि, हाई कोर्ट ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल सेवानिवृत्ति के कारण किसी अधिकारी की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती, यदि उनके कार्यकाल के दौरान अदालत के आदेश की अवहेलना का आरोप है।

न्यायिक आदेशों के पालन पर जोर

हाई कोर्ट की इस कार्रवाई को अदालत के आदेशों की गंभीरता से जोड़कर देखा जा रहा है। कोर्ट ने संकेत दिया कि न्यायिक आदेशों का पालन प्रशासनिक व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा है।

अदालत ने कहा कि अगर अधिकारी अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करेंगे तो इससे न्याय व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करना जरूरी है।

सागरिका परिडा का पक्ष

सागरिका परिडा ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्हें नौकरी से हटाने की कार्रवाई उचित नहीं थी। उन्होंने हाई कोर्ट के समक्ष अपनी स्थिति रखी, जिसके बाद अदालत ने उनकी बहाली का आदेश जारी किया था।

लेकिन आदेश के बाद भी सेवा में वापस नहीं लिए जाने पर उन्होंने अवमानना याचिका दायर की। उनका कहना है कि अदालत के आदेश के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला।

आगे की सुनवाई में मांगा जा सकता है जवाब

अब पूर्व DGP योगेश बहादुर खुराना को हाई कोर्ट की अवमानना कार्यवाही का सामना करना होगा। कोर्ट आगे की सुनवाई में उनसे यह जानना चाहेगा कि आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया।

मामले में आगे की कार्रवाई के दौरान यह तय होगा कि क्या अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की गई थी या नहीं।

प्रशासनिक अधिकारियों के लिए संदेश

ओडिशा हाई कोर्ट की इस कार्रवाई को प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक आदेशों को लागू करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

फिलहाल सागरिका परिडा की बहाली से जुड़े इस मामले में पूर्व DGP के खिलाफ अवमानना प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आने वाली सुनवाई में इस मामले की दिशा और स्पष्ट होगी।

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