
Odisha ओडिशा: गंजम जिले में समुद्री कटाव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। पोदमपेटा क्षेत्र में चिंताजनक स्थिति के बाद अब छत्रपुर के पास आर्यपल्ली समुद्र तट पर भी इसी तरह का कटाव देखने को मिल रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल बन गया है। ग्रामीणों के अनुसार समुद्र धीरे-धीरे बस्ती की ओर बढ़ रहा है और कई स्थानों पर तटीय भूमि का तेजी से क्षरण हो रहा है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि समुद्र अब पहले की तुलना में बहुत करीब आ गया है और कुछ जगहों पर वह मात्र 50 मीटर की दूरी पर रह गया है। इस स्थिति ने आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। निवासियों का कहना है कि यदि लगातार बारिश और समुद्री हलचल जारी रही, तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है और बस्तियों पर सीधा खतरा उत्पन्न हो सकता है।
आर्यपल्ली पंचायत में लगभग 3,000 मछुआरे और अन्य समुदायों के लोग रहते हैं, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से समुद्र पर निर्भर है। ऐसे में समुद्री कटाव न केवल उनके घरों के लिए बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और रोजगार के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि वे लंबे समय से सरकार से तटरेखा को सुरक्षित करने के लिए स्थायी उपायों की मांग कर रहे हैं, जिसमें सुरक्षा दीवार और पत्थर के खंभों का निर्माण शामिल है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
समुद्री कटाव की बढ़ती गंभीरता को देखते हुए छत्रपुर के विधायक कृष्ण चंद्र नायक ने आर्यपल्ली का दौरा किया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। विधायक ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और समुद्री कटाव की वास्तविक स्थिति का आकलन किया।
ग्रामीणों ने विधायक को बताया कि यदि समय रहते स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में कई घर और जमीन समुद्र में समा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर वर्ष मानसून के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाने से समस्या जस की तस बनी हुई है।
विधायक ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि इस मुद्दे को संबंधित विभागों के समक्ष उठाया जाएगा ताकि तट संरक्षण के लिए प्रभावी योजना तैयार की जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि समुद्री कटाव से प्रभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी, जिससे आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
विशेषज्ञों के अनुसार समुद्री कटाव तटीय इलाकों के लिए एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है, जो प्राकृतिक और मानवीय दोनों कारणों से बढ़ती है। लगातार बारिश, समुद्र की लहरों की तीव्रता और तटीय प्रबंधन की कमी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। आर्यपल्ली जैसे क्षेत्र, जहां बड़ी संख्या में मछुआरे समुदाय रहते हैं, इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही तट संरक्षण के लिए मजबूत दीवारें और अन्य संरचनात्मक उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले समय में उन्हें अपने घरों और गांवों को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इस स्थिति ने पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता और डर का माहौल पैदा कर दिया है।
कुल मिलाकर आर्यपल्ली में समुद्री कटाव की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है, और स्थानीय प्रशासन तथा सरकार के सामने इसे रोकने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की बड़ी चुनौती है।





