ओडिशा

CM माझी ने डॉ. हरेकृष्ण महताब की 125वीं जयंती समारोह का उद्घाटन किया

SHIDDHANT
21 Nov 2025 9:27 PM IST
CM माझी ने डॉ. हरेकृष्ण महताब की 125वीं जयंती समारोह का उद्घाटन किया
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Bhubaneshwar भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने रविवार को रवींद्र मंडप में आयोजित एक विशेष समारोह में भाग लिया, जो स्वतंत्रता सेनानी, लेखक और ओडिशा के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. हरेकृष्ण महताब की 125वीं जयंती को समर्पित था। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, साहित्यकार, शोधकर्ता, छात्र और राजनीतिक प्रतिनिधि मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. महताब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके की गई। मुख्यमंत्री माझी ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. हरेकृष्ण महताब वह महान व्यक्तित्व थे, जिन्होंने न सिर्फ स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि आधुनिक ओडिशा के निर्माण की मजबूत नींव भी डाली। उन्होंने कहा

“डॉ. महताब ने ओडिशा की अस्मिता को नई पहचान दिलाई। उनका प्रशासनिक दृष्टिकोण, साहित्यिक योगदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। मुख्यमंत्री ने डॉ. महताब के शासनकाल की उपलब्धियों को याद करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में राज्य में शिक्षा, कृषि, सिंचाई, उद्योग और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उनके विजन को आगे बढ़ाते हुए ओडिशा को एक विकसित और समृद्ध राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में इतिहासकारों और विद्वानों ने भी डॉ. महताब के जीवन, उनके साहित्यिक कार्यों और राजनीतिक योगदान पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि ओडिशा को विशेष राज्य दर्जा दिलाने और राज्य की भाषाई पहचान को मजबूत करने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. महताब पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसमें उनके राजनीतिक जीवन, साहित्यिक प्रतिभा और सामाजिक कार्यों को विस्तार से दिखाया गया। इसके अलावा उनके विचारों और भाषणों पर आधारित प्रदर्शनी ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। समारोह में मुख्यमंत्री माझी ने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे डॉ. महताब के आदर्शों, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति से प्रेरणा लें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए ऐसी ही सोच की आवश्यकता है। कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिनमें ओडिशा की पारंपरिक कला और संगीत की झलक देखने को मिली। समारोह ने न केवल डॉ. महताब के योगदान को याद किया, बल्कि ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त रूप से उजागर किया।
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