ओडिशा

मुख्यमंत्री ने आदिवासी भूमि रिकॉर्ड सहित 10 महत्वपूर्ण मुद्दों पर समीक्षा की

SHIDDHANT
1 Jan 2026 10:52 PM IST
मुख्यमंत्री ने आदिवासी भूमि रिकॉर्ड सहित 10 महत्वपूर्ण मुद्दों पर समीक्षा की
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Odisha ओडिशा: उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने बताया कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 29 दिसंबर को विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारियों के साथ एक व्यापक समीक्षा बैठक की। इस समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने 10 प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए समाधान निकालने के निर्देश दिए। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि समीक्षा और चर्चाओं के आधार पर यह निर्देश जारी किए गए हैं कि इन दस मुद्दों को प्राथमिकता के साथ हल किया जाए। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है आदिवासी समुदाय के लोगों को लंबे समय से लंबित भूमि रिकॉर्ड उपलब्ध कराना। इससे आदिवासी वर्ग के आर्थिक और सामाजिक अधिकारों को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
सिंह देव ने बताया कि इसके अलावा अन्य मुद्दों में सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, अवसंरचना विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच, कृषि और सिंचाई संबंधी सुविधाओं में सुधार, बेरोजगारी और कौशल विकास से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को इन सभी मुद्दों का समयबद्ध समाधान निकालने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आदिवासी समुदाय और अन्य वंचित वर्गों के लिए सरकार की योजनाएं सही समय पर लाभकारी रूप से लागू हों। प्रत्येक विभाग को आवश्यक संसाधन मुहैया कराए जाएंगे ताकि लंबित मामलों और शिकायतों का शीघ्र निपटान हो सके।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकारी कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए अधिकारी नियमित रूप से समीक्षा बैठक में शामिल होंगे। इसके अलावा, स्थानीय जनता और संबंधित हितधारकों की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने के लिए व्यापक स्तर पर संवाद प्रक्रिया को भी तेज किया जाएगा। कनक वर्धन सिंह देव ने बताया कि इस समीक्षा में भूमि रिकॉर्ड, नागरिक सुविधाओं, सामाजिक कल्याण योजनाओं और विकास परियोजनाओं से जुड़े लंबित कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक मुद्दे पर प्रगति की रिपोर्ट साप्ताहिक आधार पर तैयार कर उन्हें प्रस्तुत किया जाए।
इस पहल का उद्देश्य आदिवासी समुदाय और अन्य लाभार्थियों के अधिकारों और कल्याण को सुनिश्चित करना है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी लंबित मामलों का समाधान जल्द से जल्द किया जाए और किसी भी विभागीय देरी या बाधा की स्थिति में तत्काल कदम उठाए जाएं।
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