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ओडिशा के VIMSAR में कैंसर मरीजों की बढ़ी मुश्किलें, कीमोथेरेपी की जरूरी दवाओं की कमी

Kavita2
13 Aug 2026 11:00 AM IST
ओडिशा के VIMSAR में कैंसर मरीजों की बढ़ी मुश्किलें, कीमोथेरेपी की जरूरी दवाओं की कमी
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संबलपुर। ओडिशा के संबलपुर जिले के बुर्ला स्थित वीर सुरेंद्र साई इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (VIMSAR) में इलाज करा रहे कैंसर मरीजों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। अस्पताल में कीमोथेरेपी के लिए इस्तेमाल होने वाली दो बेहद जरूरी दवाएं सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण मरीजों को मजबूरी में बाहर से महंगी कीमतों पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।

दवाओं की कमी का सबसे ज्यादा असर उन मरीजों पर पड़ रहा है, जो सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और मुफ्त इलाज की सुविधा पर निर्भर हैं। कई मरीजों के लिए अचानक दवाओं का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बीच दवाओं की कमी ने उनकी आर्थिक और मानसिक परेशानियां बढ़ा दी हैं।

ओडिशा स्टेट मेडिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (OSMCL) के अनुसार, इन दोनों दवाओं की सप्लाई प्रभावित होने के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। OSMCL ने बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण दवाओं की आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ा है, जिसके चलते अस्पतालों में इन दवाओं की उपलब्धता कम हुई है।

सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन कैंसर उपचार में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दवाएं हैं। कई प्रकार के कैंसर के इलाज में इनका इस्तेमाल किया जाता है। समय पर कीमोथेरेपी नहीं मिलने या दवाओं की कमी होने से मरीजों के इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

VIMSAR में इलाज करा रही एक महिला कैंसर मरीज ने बताया कि वह अपने हेल्थ कार्ड के कारण इलाज का खर्च उठा पा रही थीं। सरकारी सुविधा के तहत उन्हें अस्पताल से मुफ्त इलाज मिल रहा था, लेकिन अब जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं।

महिला मरीज के अनुसार, हाल ही में उन्हें कार्बोप्लैटिन खरीदने के लिए करीब 3,500 रुपये और सिस्प्लैटिन के लिए करीब 4,500 रुपये खर्च करने पड़े। कैंसर उपचार पहले से ही महंगा होता है, ऐसे में अतिरिक्त दवाओं का खर्च मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त या कम खर्च में इलाज की उम्मीद लेकर वे पहुंचते हैं। लेकिन जरूरी दवाओं की कमी के कारण उन्हें निजी मेडिकल दुकानों से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। कई गरीब परिवारों के लिए यह खर्च उठाना आसान नहीं है।

दवाओं की कमी को लेकर अस्पताल प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने भी चुनौती बढ़ गई है। अस्पताल में बड़ी संख्या में कैंसर मरीज कीमोथेरेपी के लिए आते हैं और इलाज की नियमितता बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर उपचार में दवाओं की उपलब्धता लगातार बनी रहना जरूरी है। कीमोथेरेपी के तय चक्र में देरी होने से मरीजों के इलाज पर असर पड़ सकता है। इसलिए ऐसी दवाओं की सप्लाई व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना आवश्यक है।

OSMCL और स्वास्थ्य विभाग की ओर से सप्लाई बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कारणों से आई समस्या को दूर करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर काम किया जा रहा है।

वहीं मरीजों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से जल्द से जल्द दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि कैंसर मरीजों को इलाज के दौरान किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

यह मामला एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में जरूरी दवाओं की सप्लाई चेन को मजबूत करने की जरूरत को सामने लाता है। गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना मरीजों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

फिलहाल VIMSAR में कैंसर मरीजों की परेशानी जारी है और सभी की नजर इस बात पर है कि अस्पताल में सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की आपूर्ति कब तक सामान्य हो पाती है।

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