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Bhubaneswar भुवनेश्वर। रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को ओडिशा में एक नए संवैधानिक अध्याय की शुरुआत हुई। झारखंड के पलामू से तीन बार लोकसभा सांसद रहे वरिष्ठ भाजपा नेता ब्रज मोहन राम ने ओडिशा के नए राज्यपाल के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राजधानी भुवनेश्वर के लोक भवन स्थित अभिषेक हॉल में आयोजित एक समारोह में, ओडिशा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हरीश टंडन ने उन्हें शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम, विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। ब्रज मोहन राम ने डॉ. हरि बाबू कंभमपति का स्थान लिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर को यह नियुक्ति की थी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया। राष्ट्रपति भवन से जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कई राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति और स्थानांतरण की घोषणा की गई थी। इसी क्रम में, ब्रज मोहन राम को ओडिशा की जिम्मेदारी सौंपी गई।
उनकी नियुक्ति संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार की गई और रविवार को शपथ ग्रहण समारोह के साथ उन्होंने औपचारिक रूप से अपना कार्यभार संभाल लिया। राज्यपाल के रूप में, अब वह राज्य के संवैधानिक प्रमुख की जिम्मेदारी निभाएंगे। राज्यपाल के तौर पर उन्हें कई महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। ओडिशा के राज्यपाल के रूप में, ब्रज मोहन राम के पास कई महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारियां होंगी। भारतीय संविधान के अनुसार, राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है।
राज्यपाल के मुख्य कार्यों में राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप निर्णय लेना, विधानसभा सत्र बुलाने और स्थगित करने से जुड़ी औपचारिक जिम्मेदारियां निभाना, तथा संवैधानिक संस्थाओं की प्रक्रियाओं में अपनी भूमिका निभाना शामिल है। इसके अलावा, राज्यपाल राज्य के विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों में भी उन जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं, जो संबंधित कानूनों में निर्धारित की गई हैं।
नए कार्यकाल से जुड़ी उम्मीदें
ओडिशा में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, औद्योगिक विकास, जनजातीय कल्याण और बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) जैसे क्षेत्र सार्वजनिक नीति के महत्वपूर्ण विषय हैं। इन क्षेत्रों में नीतिगत निर्णय मुख्य रूप से चुनी हुई सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जबकि राज्यपाल संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार अपनी भूमिका निभाते हैं।
ब्रज मोहन राम के शपथ लेने के साथ ही ओडिशा में राज्यपाल के पद का औपचारिक हस्तांतरण पूरा हो गया है। लंबे राजनीतिक अनुभव के बाद, अब वे एक नई भूमिका में नज़र आएंगे।
संवैधानिक नियमों का पालन, राज्य सरकार के साथ संस्थागत समन्वय और निष्पक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन उनके कार्यकाल के मुख्य बिंदु होंगे।
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