ओडिशा

MMDR संशोधन कानून के खिलाफ सुंदरगढ़ में BJD की आर्थिक नाकेबंदी

Kavita2
7 Oct 2026 3:25 PM IST
MMDR संशोधन कानून के खिलाफ सुंदरगढ़ में BJD की आर्थिक नाकेबंदी
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सुंदरगढ़। बीजू जनता दल (BJD) ने बुधवार को ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के हेमगिर कोयला खनन क्षेत्र में Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2026 के विरोध में आर्थिक नाकेबंदी की। प्रदर्शन के कारण खनन और खनिज परिवहन का काम प्रभावित हुआ। पार्टी के अनुसार, बड़ी संख्या में भारी वाहन सड़कों और खनन क्षेत्रों में फंसे रहे। BJD पिछले कई सप्ताह से इस संशोधित कानून का विरोध कर रही है और सितंबर में उसने राज्यव्यापी आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी भी दी थी।

इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई सुंदरगढ़ विधायक और जिला BJD अध्यक्ष जोगेश कुमार सिंह ने की। नाकेबंदी में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इनमें नयागढ़ के विधायक अरुण साहू, पूर्व मंत्री सुदाम मारंडी और अतनु सब्यसाची नायक, पूर्व सांसद प्रदीप माझी, पूर्व मंत्री स्नेहलता छुरिया, पूर्व विधायक वर्षा सिंह बारीहा और रोमा रंजन बिस्वाल सहित कई नेता शामिल रहे।

प्रदर्शन के दौरान खनन क्षेत्र से आने-जाने वाले भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि नाकेबंदी के कारण करीब 10 हजार भारी वाहन विभिन्न सड़कों और खनन क्षेत्रों में फंसे रहे। हालांकि इस संख्या की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

हेमगिर क्षेत्र सुंदरगढ़ जिले के प्रमुख खनन इलाकों में शामिल है। यहां बड़ी मात्रा में कोयला खनन और परिवहन होता है। ऐसे में आर्थिक नाकेबंदी का सीधा असर खदानों से निकलने वाले कोयले और उससे जुड़े परिवहन पर पड़ा।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए BJD नेताओं ने केंद्र सरकार की खनन नीति की आलोचना की। पार्टी नेताओं का आरोप है कि MMDR संशोधन कानून से खनिज संपदा पर राज्यों के अधिकार और राजस्व हित प्रभावित हो सकते हैं। BJD पहले भी आरोप लगा चुकी है कि संशोधन से खनन क्षेत्र में राज्यों की भूमिका कमजोर होगी।

BJD ने ओडिशा सरकार पर भी इस मुद्दे पर पर्याप्त विरोध नहीं करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने कहा कि खनिज संपदा ओडिशा की अर्थव्यवस्था का अहम आधार है और इससे जुड़े किसी भी नीतिगत बदलाव पर राज्य सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

BJD अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक भी MMDR संशोधन कानून के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। सितंबर में भुवनेश्वर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि संशोधित कानून ओडिशा के खनिज अधिकारों और आर्थिक हितों को प्रभावित करेगा। पार्टी ने इस कानून को वापस लेने की मांग की है।

इससे पहले BJD नेता अरुण साहू ने भी कहा था कि यदि संशोधन वापस नहीं लिया गया तो पार्टी खनन और खनिज परिवहन रोकने के लिए आर्थिक नाकेबंदी करेगी। बुधवार का हेमगिर प्रदर्शन उसी आंदोलन की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

BJD का दावा है कि ओडिशा को खनन क्षेत्र से मिलने वाला राजस्व राज्य की कई विकास योजनाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत संरचना के लिए महत्वपूर्ण है। पार्टी का आरोप है कि नए प्रावधान राज्य के वित्तीय हितों पर असर डाल सकते हैं।

हालांकि इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ भाजपा ने BJD के आरोपों को खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य खनन नियमों में एकरूपता और पारदर्शिता लाना है और इससे ओडिशा के मौजूदा रॉयल्टी तथा जिला खनिज फाउंडेशन से मिलने वाले राजस्व पर असर नहीं पड़ेगा।

भाजपा की ओर से यह भी तर्क दिया गया है कि आर्थिक नाकेबंदी से राज्य की आर्थिक गतिविधियों को ही नुकसान हो सकता है। पार्टी का कहना है कि नए प्रावधान लंबी अवधि में निवेश और खनन क्षेत्र की स्थिरता को बढ़ावा दे सकते हैं।

इस तरह MMDR संशोधन कानून को लेकर राज्य में राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। एक ओर BJD इसे ओडिशा के आर्थिक और खनिज अधिकारों से जोड़ रही है, वहीं भाजपा संशोधन को खनन प्रशासन में सुधार की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है।

हेमगिर में बुधवार को हुए प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। खनन क्षेत्र में जाने वाले मार्गों पर प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी के कारण ट्रकों की आवाजाही रुक गई।

कोयला परिवहन बाधित होने के कारण खदानों के आसपास भारी वाहनों की कतारें लग गईं। स्थानीय स्तर पर खनन से जुड़े कारोबार और परिवहन व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ा।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक केंद्र सरकार संशोधित कानून पर पुनर्विचार नहीं करती, तब तक पार्टी अपना विरोध जारी रखेगी। BJD नेताओं ने इसे राज्य के संसाधनों और आर्थिक अधिकारों की लड़ाई बताया।

पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि ओडिशा खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां की खदानों से मिलने वाला राजस्व राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में खनन नीति में बड़े बदलाव से पहले राज्य के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

विरोध प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने राज्य सरकार से भी मांग की कि वह केंद्र के सामने इस मुद्दे को मजबूती से उठाए और संशोधन के संभावित वित्तीय प्रभावों पर विस्तृत स्थिति स्पष्ट करे।

BJD ने इससे पहले विशेष विधानसभा सत्र और सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग भी की थी। पार्टी का कहना है कि खनन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा होनी चाहिए।

दूसरी ओर भाजपा BJD पर इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगा रही है। भाजपा नेताओं ने पूर्व BJD सरकार के दौरान जिला खनिज फाउंडेशन फंड के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं और CAG रिपोर्ट का हवाला देकर विपक्ष पर पलटवार किया है।

इस विवाद के कारण राज्य में खनन नीति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। सुंदरगढ़ और अन्य खनन जिलों में इसका प्रभाव अधिक दिखाई दे रहा है क्योंकि इन क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था काफी हद तक खनन और परिवहन गतिविधियों पर निर्भर है।

फिलहाल हेमगिर में हुई आर्थिक नाकेबंदी से खनन और परिवहन पर असर पड़ा है। BJD ने साफ संकेत दिया है कि वह MMDR संशोधन कानून के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखेगी।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकार और केंद्र इस विरोध पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या BJD आगे अन्य खनन क्षेत्रों में भी इस तरह की नाकेबंदी करती है।

MMDR संशोधन कानून को लेकर BJD और भाजपा के बीच जारी विवाद ने अब सड़क पर आंदोलन का रूप ले लिया है। सुंदरगढ़ की आर्थिक नाकेबंदी इसी राजनीतिक संघर्ष का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है।

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