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Odisha ओडिशा। बीजेडी (BJD) के उपाध्यक्ष Debi Prasad Mishra ने मल्कानगिरी जिले में पोलावरम परियोजना को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि परियोजना के प्रभाव को समझने और उचित योजना बनाने के लिए सभी हितधारकों की सहमति जरूरी है।
Debi Prasad Mishra ने विशेष रूप से सबेरी-सिलेरी क्षेत्र में पोलावरम परियोजना के संभावित प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “मल्कानगिरी जिले में पोलावरम मुद्दे को लेकर यह चर्चा हुई कि ऊपर के क्षेत्रों से आने वाले जल प्रवाह और वर्षा के आधार पर महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर स्पष्टता की आवश्यकता है। इसे केवल सामान्य नागरिकों के दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि विषय विशेषज्ञों के नजरिए से भी समझना जरूरी है।”
उनका कहना था कि इससे यह स्पष्ट होगा कि किन क्षेत्रों को डूबने की संभावना है और किस तरह की तैयारी और योजना आवश्यक होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल सही आंकड़े और विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही परियोजना का समुचित विकास और प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत प्रबंधन की योजना बनाई जा सकती है।
Debi Prasad Mishra ने यह भी कहा कि पोलावरम परियोजना का विकास इस तरह से होना चाहिए कि इसमें सभी प्रभावित लोगों और स्थानीय समुदायों की सहमति शामिल हो। उनका कहना था कि परियोजना केवल तकनीकी दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी संतुलित होनी चाहिए।
विशेष रूप से उन्होंने यह रेखांकित किया कि जलप्रवाह और वर्षा के आंकड़ों का विश्लेषण करके ही यह निर्णय लिया जाना चाहिए कि किन क्षेत्रों में जलभराव या बाढ़ की समस्या अधिक हो सकती है। इससे प्रभावित नागरिकों को समय पर चेतावनी और राहत प्रदान की जा सकेगी।
साथ ही, उन्होंने कहा कि पोलावरम परियोजना के लिए सभी स्तरों पर पारदर्शिता और खुली चर्चा आवश्यक है। स्थानीय प्रशासन, नागरिक संगठनों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि परियोजना से जुड़े सभी जोखिमों को कम किया जाए और जल प्रबंधन का संतुलन बना रहे।
Debi Prasad Mishra ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना केवल इंफ्रास्ट्रक्चर का मामला नहीं है, बल्कि यह स्थानीय लोगों की आजीविका, कृषि और पर्यावरण से सीधे जुड़ी हुई है। इसलिए योजना बनाते समय सभी हितधारकों की राय और सुझावों को शामिल करना अनिवार्य है।
उन्होंने अंत में कहा, “हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परियोजना का विकास वैज्ञानिक, तकनीकी और सामाजिक दृष्टिकोण से संतुलित हो और प्रभावित नागरिकों के हितों की सुरक्षा हो।”
विशेषज्ञों का कहना है कि पोलावरम परियोजना के लिए यह बहु-स्तरीय दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है, ताकि प्रभावित क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण, कृषि उत्पादन और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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