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भुवनेश्वर: कोटिया पंचायत को लेकर राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। बीजू जनता दल (BJD) ने घोषणा की है कि पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को विवादित सीमावर्ती इलाके का दौरा करेगा। यह दौरा ओडिशा द्वारा दावा किए गए गांवों में आंध्र प्रदेश द्वारा कथित तौर पर चुनाव से जुड़ी गतिविधियां चलाए जाने के विरोध में किया जा रहा है।
यह दौरा BJD अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के निर्देश पर तय किया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग भी की है। गुरुवार को BJD सूत्रों ने बताया कि यह दौरा काफी अहम है, क्योंकि इन कथित गतिविधियों का ओडिशा की क्षेत्रीय अखंडता और प्रशासनिक अधिकार पर गंभीर असर पड़ सकता है। प्रतिनिधिमंडल वहां की जमीनी स्थिति का जायजा लेगा, स्थानीय लोगों से बातचीत करेगा और प्रभावित गांवों में रहने वालों की चिंताओं को समझेगा। पटनायक ने कोटिया के पुराने मुद्दे पर किए गए वादों को पूरा न करने के लिए BJP के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं।
BJD अध्यक्ष ने BJP के उस वादे को याद दिलाया, जिसमें कहा गया था कि 'डबल इंजन सरकार' कोटिया विवाद को हमेशा के लिए सुलझा देगी, ओडिशा की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करेगी और 'ओड़िया स्वाभिमान' को बहाल करेगी। इस नए घटनाक्रम ने सीमा से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर फिर से राजनीतिक ध्यान खींचा है। BJD ने मांग की है कि इस इलाके में ओडिशा और वहां के लोगों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
दौरे के दौरान, BJD का प्रतिनिधिमंडल स्थानीय निवासियों से मिलेगा, मौजूदा हालात का जायजा लेगा और चुनाव से जुड़ी कथित गतिविधियों के बारे में सीधे जानकारी जुटाएगा। यह टीम प्रभावित लोगों की चिंताओं को दर्ज करेगी और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके नवीन पटनायक को सौंपेगी। इस रिपोर्ट पर पार्टी नेतृत्व आगे विचार-विमर्श करेगा और उचित कदम उठाएगा। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व सांसद झिना हिकाका, विधायक मनोहर रंधारी, पूर्व मंत्री जगन्नाथ सारका, रबी नारायण नंदा, प्रदीप माझी और रमेश माझी के साथ-साथ BJD के वरिष्ठ महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता भृगु बक्सीपात्र समेत कई अन्य नेता शामिल होंगे।
BJD का कहना है कि कोटिया के लोगों के हितों और राज्य की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए उचित और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। पार्टी ने इस बात पर जोर दिया है कि स्थानीय निवासियों की चिंताओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही, पार्टी ने राज्य सरकार से राज्य के हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने की अपील की है। इस प्रस्तावित दौरे के जरिए, बीजेडी का मकसद जमीनी हकीकत का पता लगाना, प्रभावित लोगों की बातें सीधे सुनना और अपने निष्कर्षों को पार्टी नेतृत्व के सामने रखना है, ताकि आगे इस पर विचार-विमर्श और कार्रवाई की जा सके।
कोटिया का मुद्दा राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील बना हुआ है। ताजा घटनाक्रम ने राज्य सरकार की उस प्रतिक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया है, जो उसने सीमावर्ती गांवों में आंध्र प्रदेश (AP) की कथित गतिविधियों के संदर्भ में दी है। साथ ही, इससे राज्य के क्षेत्रीय हितों की रक्षा करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता भी सामने आई है।
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