
Odisha ओडिशा: ओडिशा के कटक स्थित चौद्वार सर्कल जेल में एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां एक अंडरट्रायल कैदी पर जेल के अंदर ही एक दोषी कैदी द्वारा कथित रूप से यौन उत्पीड़न किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में आरोपी कैदी का नाम कहना नायक बताया जा रहा है, जो एक हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया है और वर्तमान में जेल में सजा काट रहा है। उसे जेल के रूम नंबर 23 में रखा गया था। वहीं पीड़ित कैदी 18 वर्षीय अंडरट्रायल है, जो जगतसिंहपुर जिले का निवासी है और उस पर चोरी के एक मामले में आरोप है।
बताया जाता है कि यह कथित घटना 21 जून को दोपहर लगभग 1:30 बजे हुई। आरोप है कि कहना नायक ने अंडरट्रायल कैदी को जेल परिसर के किचन के पास स्थित एक टॉयलेट में ले जाकर कथित रूप से नशीला पदार्थ पिलाया और उसके बाद उसके साथ यौन उत्पीड़न किया।
सूत्रों के मुताबिक, यह कथित घटना लगभग 30 मिनट तक चली। घटना के बाद एक वार्डर को इसकी जानकारी मिली, जिसके बाद वह मौके पर पहुंचा और दोनों कैदियों को जेल अधिकारियों के सामने पेश किया गया।
इसके बाद जेल प्रशासन द्वारा दोनों कैदियों के लिखित बयान दर्ज किए गए। नियमों के अनुसार इस प्रकार के गंभीर मामलों में मामले की सूचना चौद्वार पुलिस स्टेशन को दी जानी चाहिए थी और औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए थी। हालांकि आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के बजाय मामले को आंतरिक स्तर पर ही संभालने का प्रयास किया गया।
घटना के बाद जेल प्रशासन ने आरोपी कैदी कहना नायक को रूम नंबर 23 से स्थानांतरित कर रूम नंबर 46 में शिफ्ट कर दिया है। सुरक्षा कारणों के तहत यह कदम उठाया गया है।
जानकारी के अनुसार, आरोपी कैदी के खिलाफ पहले भी जेल के अंदर अन्य कैदियों के साथ यौन शोषण के आरोप लग चुके हैं। इसके अलावा जेल स्टाफ के कुछ सदस्यों ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं कि वह जेल के अंदर अवैध गतिविधियों में शामिल रहा है।
आरोपों के मुताबिक, कहा जा रहा है कि वह एक जेल कर्मचारी की मदद से गांजा, ब्राउन शुगर, शराब और तंबाकू जैसे नशीले पदार्थों की जेल के भीतर अवैध बिक्री में शामिल था। यह भी दावा किया गया है कि इन नशीले पदार्थों को कथित तौर पर जेल के किचन क्षेत्र में छिपाकर रखा जाता था और वहीं से कैदियों को सप्लाई किया जाता था।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मानवाधिकार और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जेल के अंदर इस तरह की घटनाएं बेहद गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर चिंता जताई जा रही है और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठने लगी है। यह भी कहा जा रहा है कि यदि एफआईआर दर्ज नहीं की गई है तो यह कानूनी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।
फिलहाल जेल प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। वहीं, पुलिस और संबंधित अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे पूरे मामले की जांच करेंगे और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला अब जेल सुरक्षा, कैदियों के अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में और कार्रवाई की संभावना है।





