ओडिशा

ओडिशा में पाठ्यपुस्तक छपाई पर भ्रष्टाचार के आरोप, PMO ने विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए

Kavita2
29 Sept 2026 11:53 AM IST
ओडिशा में पाठ्यपुस्तक छपाई पर भ्रष्टाचार के आरोप, PMO ने विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए
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भुवनेश्वर। ओडिशा में स्कूली पाठ्यपुस्तकों की छपाई और सप्लाई से जुड़ी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मामला अब प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO ने राज्य के स्कूल और जन शिक्षा विभाग को शिकायत में लगाए गए आरोपों पर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई RTI एक्टिविस्ट और व्हिसलब्लोअर प्रदीप प्रधान की शिकायत के बाद शुरू हुई है।

शिकायतकर्ता प्रदीप प्रधान ने पाठ्यपुस्तकों की छपाई और सप्लाई की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और हितों के टकराव के आरोप लगाए हैं। शिकायत में सरकारी अधिकारियों की भूमिका और निजी प्रिंटिंग एजेंसियों के चयन से जुड़े कई सवाल उठाए गए हैं।

शिकायत का मुख्य केंद्र ओडिशा गवर्नमेंट प्रेस में डिप्टी डायरेक्टर टेक्निकल के पद पर कार्यरत शुभ्रजीत नायक की भूमिका बताई गई है। शिकायत के अनुसार नायक वर्ष 2022 से राज्य में पाठ्यपुस्तक छपाई से संबंधित कार्यों की देखरेख कर रहे हैं।

प्रदीप प्रधान ने आरोप लगाया है कि शुभ्रजीत नायक कॉमर्स विभाग से जुड़े अधिकारी हैं, जबकि स्कूली पाठ्यपुस्तकों की छपाई और सप्लाई से जुड़े मामले स्कूल और जन शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसी आधार पर उनकी नियुक्ति और भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यह जांच की जानी चाहिए कि दूसरे विभाग से जुड़े अधिकारी को पाठ्यपुस्तक छपाई से संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई और इस प्रक्रिया में सभी प्रशासनिक नियमों का पालन किया गया या नहीं।

शिकायत में निजी प्रिंटिंग प्रेस और सप्लायरों के चयन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि नायक ने कथित तौर पर कुछ निजी प्रिंटिंग प्रेस और आपूर्तिकर्ताओं के चयन की प्रक्रिया को प्रभावित किया। इसके जरिए कुछ चुनिंदा संस्थाओं को फायदा पहुंचाने का आरोप भी लगाया गया है।

सबसे गंभीर आरोप कथित हितों के टकराव से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि पाठ्यपुस्तक छपाई से संबंधित कुछ कॉन्ट्रैक्ट एक ऐसी निजी एजेंसी के माध्यम से दिए गए, जिसे कथित तौर पर शुभ्रजीत नायक की पत्नी संचालित करती हैं।

यदि इस आरोप की पुष्टि होती है तो सरकारी पद पर रहते हुए निजी संस्था को लाभ पहुंचाने और हितों के टकराव का सवाल खड़ा हो सकता है। हालांकि फिलहाल ये आरोप शिकायत में लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र या विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

PMO के निर्देश के बाद अब स्कूल और जन शिक्षा विभाग से मामले में शिकायत की जांच और नियमानुसार कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है। विभाग को यह देखना होगा कि पाठ्यपुस्तक छपाई से जुड़े टेंडर, सप्लाई ऑर्डर और निजी एजेंसियों के चयन में तय नियमों और पारदर्शिता का पालन हुआ था या नहीं।

जांच के दौरान वर्ष 2022 से अब तक दिए गए प्रिंटिंग कॉन्ट्रैक्ट, सप्लाई ऑर्डर, भुगतान रिकॉर्ड और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा सकती है। साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि किन-किन निजी एजेंसियों को काम मिला और उनके चयन के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई।

पाठ्यपुस्तकों की छपाई राज्य की शिक्षा व्यवस्था से सीधे जुड़ा महत्वपूर्ण काम है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक समय पर किताबें पहुंचाने के लिए हर साल बड़े स्तर पर प्रिंटिंग और वितरण का काम किया जाता है। ऐसे में इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय पर सप्लाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

शिकायतकर्ता ने वित्तीय गड़बड़ियों का भी आरोप लगाया है। अब विभागीय जांच में यह देखा जा सकता है कि किताबों की छपाई के लिए तय कीमत, कागज की खरीद, प्रिंटिंग लागत और सप्लाई से जुड़े खर्च में किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं।

इसके अलावा निजी प्रिंटिंग प्रेस को दिए गए काम की मात्रा और भुगतान से संबंधित दस्तावेज भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं। यदि किसी निजी एजेंसी को नियमों से अलग जाकर लाभ पहुंचाने का मामला सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

हितों के टकराव से जुड़े आरोप की जांच भी इस मामले का अहम हिस्सा हो सकती है। शिकायत में जिस निजी एजेंसी को अधिकारी की पत्नी से जुड़ा बताया गया है, उसके मालिकाना हक, संचालन और सरकारी कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। शुभ्रजीत नायक या संबंधित निजी एजेंसियों की जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। इसलिए शिकायत में किए गए दावों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है।

PMO की ओर से मामले को राज्य के संबंधित विभाग के पास भेजे जाने के बाद शिकायतकर्ता को उम्मीद है कि अब इसकी विस्तृत जांच होगी। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

इस मामले में स्कूल और जन शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर नजर रहेगी। विभाग को न केवल कथित गड़बड़ियों की जांच करनी होगी बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सरकारी स्कूलों के लिए पाठ्यपुस्तकों की छपाई और वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

फिलहाल PMO के निर्देश के बाद ओडिशा में पाठ्यपुस्तक छपाई से जुड़ा यह मामला चर्चा में आ गया है। शिकायत में भ्रष्टाचार, वित्तीय गड़बड़ी और हितों के टकराव जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अब विभागीय जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और किसी अधिकारी या निजी एजेंसी की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।

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