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ओडिशा के बरगढ़ में एक्सपायर्ड दवा देने का आरोप

Kavita2
4 Aug 2026 12:56 PM IST
ओडिशा के बरगढ़ में एक्सपायर्ड दवा देने का आरोप
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बरगढ़। ओडिशा के बरगढ़ जिले के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में संचालित ‘निरामय’ दवा केंद्र को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि केंद्र से एक 15 वर्षीय किशोर को एक्सपायर हो चुकी एंटीबायोटिक दवा दे दी गई। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और दवा वितरण प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, नीलिबंधा पाड़ा निवासी चोबन साहू के 15 वर्षीय बेटे मुकेश साहू की उंगली कट गई थी। चोट लगने के बाद परिवार उसे इलाज के लिए बरगढ़ कम्युनिटी हेल्थ सेंटर लेकर पहुंचा। डॉक्टर की जांच के बाद किशोर को संक्रमण से बचाव के लिए एंटीबायोटिक दवा लेने की सलाह दी गई।

बताया जा रहा है कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार मुकेश के परिवार ने अस्पताल परिसर में स्थित ‘निरामय’ दवा केंद्र से ‘सेफपोडॉक्सिम प्रॉक्सेटिल’ (Cefpodoxime Proxetil) नाम की एंटीबायोटिक दवा ली। परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने दवा के पैकेट को ध्यान से देखा तो उसकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी थी।

परिजनों के मुताबिक, दवा लेने के बाद उन्हें इसकी जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत की और संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की। परिवार ने आरोप लगाया कि मरीजों की सेहत से जुड़े मामले में इस तरह की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में दवाओं की गुणवत्ता और उनकी वैधता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। एक्सपायर हो चुकी दवा का सेवन मरीज के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है और इलाज की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। खासतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं के मामले में सावधानी बरतना जरूरी होता है।

मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का ध्यान इस ओर गया है। अधिकारियों की ओर से पूरे प्रकरण की जांच किए जाने की बात कही जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि दवा केंद्र में एक्सपायर दवा कैसे पहुंची और वितरण प्रक्रिया में कहां लापरवाही हुई।

‘निरामय’ योजना के तहत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसका उद्देश्य लोगों को अस्पतालों में मुफ्त या कम लागत पर जरूरी दवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि दवा वितरण केंद्र से एक्सपायर दवा मिलने का आरोप सही साबित होता है, तो यह योजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले मरीज अक्सर भरोसे के साथ दवाएं लेते हैं। इसलिए दवाओं की जांच, स्टॉक प्रबंधन और वितरण व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता और सावधानी बरतनी चाहिए।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी दवा को इस्तेमाल से पहले उसकी निर्माण और समाप्ति तिथि की जांच करना जरूरी है। वहीं, स्वास्थ्य केंद्रों की जिम्मेदारी होती है कि मरीजों तक पहुंचने वाली हर दवा सुरक्षित और मानकों के अनुरूप हो।

मुकेश साहू के परिवार ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। परिवार यह भी चाहता है कि भविष्य में किसी अन्य मरीज को ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े।

फिलहाल यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दवा केंद्र से वास्तव में एक्सपायर्ड दवा जारी की गई थी या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

यह घटना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में दवा प्रबंधन की अहमियत को एक बार फिर सामने लाती है। अस्पतालों और दवा केंद्रों में दवाओं के रखरखाव, स्टॉक की नियमित जांच और समय पर एक्सपायर्ड दवाओं को हटाने की प्रक्रिया को मजबूत करना जरूरी है।

बरगढ़ के इस मामले ने मरीजों की सुरक्षा और सरकारी दवा वितरण प्रणाली की निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर स्वास्थ्य विभाग की जांच और आगे की कार्रवाई पर है।

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