
भुवनेश्वर। ओडिशा विजिलेंस ने मलकानगिरी जिले में डिस्ट्रिक्ट रूरल डेवलपमेंट एजेंसी यानी DRDA से जुड़े मैथिली ब्लॉक के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर शिशिर कुमार डैश को आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया है। विजिलेंस की तलाशी में उनकी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में काफी अधिक संपत्ति मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई। गिरफ्तारी के बाद उन्हें मंगलवार को ब्रह्मपुर स्थित विजिलेंस के विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किया जाना है।
ओडिशा विजिलेंस के अनुसार, शिशिर कुमार डैश से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया था। इस दौरान अधिकारियों को अचल और चल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, बैंक जमा राशि और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड मिले। जांच एजेंसी का कहना है कि बरामद संपत्तियों का मूल्य उनकी ज्ञात आय से अधिक प्रतीत हुआ, जिसके बाद उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की गई।
तलाशी के दौरान डैश से जुड़ी दो बहुमंजिला इमारतों का पता चला है। इन दोनों इमारतों का कुल निर्मित क्षेत्र लगभग 9,300 वर्ग फुट बताया गया है। विजिलेंस अब इन इमारतों के निर्माण में हुए खर्च और उनकी खरीद या निर्माण के लिए इस्तेमाल की गई रकम के स्रोत की जांच कर रही है।
इसके अलावा डैश के नाम या उनसे जुड़े लोगों के नाम पर छह महंगे प्लॉट मिलने की बात भी सामने आई है। विजिलेंस अधिकारियों ने इन जमीनों से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि इन प्लॉटों की खरीद कब की गई, इनकी वास्तविक कीमत कितनी थी और भुगतान किस माध्यम से किया गया।
जांच के दौरान लगभग 82 लाख रुपये की बैंक जमा राशि भी सामने आई है। विजिलेंस टीम संबंधित बैंक खातों और लेन-देन का ब्योरा खंगाल रही है। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि यह रकम किस स्रोत से आई और क्या इसका संबंध डैश की घोषित आय से है।
तलाशी में एक चार-पहिया वाहन भी संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया है। इसके अलावा घरों और अन्य ठिकानों से मिले दस्तावेजों, निवेश और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है। विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि संपत्तियों का अंतिम मूल्यांकन जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में विजिलेंस आमतौर पर सरकारी अधिकारी की सेवा अवधि में हुई वैध आय और उनके नाम या परिवार से जुड़ी संपत्तियों की तुलना करती है। यदि संपत्ति का मूल्य ज्ञात आय से काफी अधिक पाया जाता है और उसका संतोषजनक स्रोत नहीं बताया जा पाता, तो भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया जाता है।
शिशिर कुमार डैश मलकानगिरी की DRDA व्यवस्था से जुड़े मैथिली ब्लॉक में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर कार्यरत बताए गए हैं। इस पद पर रहते हुए वे ग्रामीण विकास से जुड़े निर्माण और तकनीकी कार्यों की निगरानी से संबंधित जिम्मेदारियां निभा रहे थे।
विजिलेंस अब यह भी जांच कर रही है कि डैश ने अपने कार्यकाल के दौरान किन-किन परियोजनाओं की निगरानी की और क्या किसी सरकारी काम या ठेके से उनकी निजी संपत्ति में वृद्धि का कोई संबंध है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
जांच एजेंसी संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और उनकी सेवा से जुड़ी आय का भी मिलान कर रही है। इसके लिए वेतन, भत्ते, वैध निवेश, पारिवारिक आय और अन्य घोषित स्रोतों की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके बाद इन आंकड़ों की तुलना तलाशी में सामने आई संपत्तियों से की जाएगी।
विजिलेंस ने डैश से पूछताछ भी की है। उनसे संपत्तियों की खरीद, बैंक जमा और जमीन के लेन-देन के बारे में जानकारी मांगी गई है। एजेंसी यह जानना चाहती है कि इन संपत्तियों के लिए इस्तेमाल की गई रकम कहां से आई और क्या उससे जुड़े सभी लेन-देन वैध तरीके से किए गए।
छह प्लॉटों से जुड़े दस्तावेजों की विशेष जांच की जा रही है। कई बार जमीन की खरीद वास्तविक बाजार कीमत से कम कीमत पर दस्तावेजों में दर्ज की जाती है। इसलिए विजिलेंस संबंधित रजिस्ट्री रिकॉर्ड, भुगतान का तरीका और वास्तविक मूल्य का भी आकलन कर सकती है।
दो बहुमंजिला इमारतों का निर्माण खर्च भी जांच का प्रमुख बिंदु है। करीब 9,300 वर्ग फुट के कुल क्षेत्र वाली इन इमारतों की लागत का तकनीकी मूल्यांकन कराया जा सकता है। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि इनके निर्माण पर वास्तव में कितनी राशि खर्च हुई होगी।
82 लाख रुपये की बैंक जमा राशि को लेकर भी अलग से जांच जारी है। बैंक खातों में रकम जमा होने की तारीख, स्रोत और ट्रांसफर से जुड़ी जानकारी खंगाली जा रही है। यदि किसी खाते में बड़ी रकम जमा हुई है तो उसके पीछे के लेन-देन की भी जांच की जा सकती है।
विजिलेंस की कार्रवाई के बाद डैश की गिरफ्तारी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब अदालत में पेशी के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
एजेंसी जरूरत के अनुसार डैश की हिरासत मांग सकती है ताकि संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सवालों पर विस्तृत पूछताछ की जा सके। हालांकि इस बारे में अंतिम निर्णय अदालत करेगी।
इस मामले में परिवार के सदस्यों या अन्य लोगों के नाम पर मौजूद संपत्तियों की भी जांच की जा सकती है। यदि ऐसी कोई संपत्ति सामने आती है जिसका भुगतान डैश की आय से जुड़ा हुआ हो तो उसे भी जांच के दायरे में शामिल किया जा सकता है।
फिलहाल विजिलेंस ने जो संपत्तियां सामने आने की बात कही है, उनमें दो बहुमंजिला इमारतें, छह महंगे प्लॉट, 82 लाख रुपये की बैंक जमा और एक चार-पहिया वाहन शामिल हैं। इन सभी का विस्तृत मूल्यांकन जारी है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि डैश की कुल संपत्ति कितनी है और ज्ञात आय से उसका अंतर कितना बैठता है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल ओडिशा विजिलेंस ने मामले में आगे की जांच और वित्तीय दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी रखी है।





