
Odisha ओडिशा: ओडिशा सरकार ने राज्य के चार प्रमुख मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में प्रशासनिक सुधार के तहत नए अधिकारियों की नियुक्ति की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने इस संबंध में गुरुवार को आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें कई वरिष्ठ डॉक्टरों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
जारी आदेश के अनुसार, हरिकृष्ण दलेई को बरहमपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का डीन एवं प्रिंसिपल नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे कोरापुट स्थित एसएलएन मेडिकल कॉलेज में डीन एवं प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत थे। सरकार ने उन्हें एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी है।
इसी मेडिकल कॉलेज में एक और बदलाव करते हुए एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी (FMT) विभाग की प्रोफेसर सुदीपा दास को संस्थान का सुपरिंटेंडेंट नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति से अस्पताल प्रशासन को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बारीपदा स्थित पीआरएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भी प्रशासनिक बदलाव किया गया है। यहां ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी (O&G) विभाग की प्रोफेसर रीतांजलि बेहरा को अस्पताल का सुपरिंटेंडेंट बनाया गया है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि उनके अनुभव से अस्पताल के प्रबंधन और सेवाओं में सुधार होगा।
इसके अलावा कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के O&G विभाग की प्रोफेसर सस्मिता स्वैन को कोरापुट स्थित एसएलएन मेडिकल कॉलेज का डीन एवं प्रिंसिपल नियुक्त किया गया है। यह बदलाव चिकित्सा शिक्षा और अस्पताल प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
इसी क्रम में भुवनेश्वर स्थित पीजीआईएमईआर और कैपिटल अस्पताल के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर लीना दास को बालासोर स्थित एफएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का सुपरिंटेंडेंट नियुक्त किया गया है। सरकार का मानना है कि उनके अनुभव से बालासोर मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन सभी नियुक्तियों का उद्देश्य राज्य के प्रमुख मेडिकल संस्थानों में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। सरकार का यह कदम मेडिकल कॉलेजों के प्रबंधन को मजबूत करने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के प्रशासनिक बदलावों से न केवल संस्थानों की कार्यप्रणाली में सुधार आता है, बल्कि मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। साथ ही इससे राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने में मदद मिलती है।
इन नियुक्तियों के बाद संबंधित मेडिकल कॉलेजों में नए प्रशासनिक ढांचे को लेकर कामकाज शुरू होने की संभावना है। राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी स्वास्थ्य संस्थानों में सुधार के लिए इस तरह के कदम उठाए जाते रहेंगे।





