
Odisha ओडिशा: स्कूल शिक्षा प्रणाली से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं के मामले में राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इनमें SCERT के पूर्व निदेशक भी शामिल हैं। यह कार्रवाई स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में पाई गई व्यापक गलतियों की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
यह निर्णय उस समय लिया गया जब डेवलपमेंट कमिश्नर की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में स्कूल की किताबों में कई गंभीर त्रुटियों और लापरवाहियों का उल्लेख किया गया था, जिनका असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ सकता था। रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कदम उठाया।
मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, टीचर्स ट्रेनिंग और SCERT के पूर्व निदेशक मनोज पाधी को निलंबित किए गए अधिकारियों में शामिल किया गया है। इसके अलावा तीन सहायक निदेशकों—प्रलिप्ता मिश्रा, दिलीप कुमार साहू और भारती टुडू—को भी सस्पेंड कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इन अधिकारियों की भूमिका के कारण शैक्षणिक सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं।
इस कार्रवाई के साथ ही राज्य सरकार ने आगे की जिम्मेदारी तय करने के लिए छह अन्य सहायक निदेशकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है। इनमें बंदिता पटनायक, मानस रंजन राउत, मनोरंजन महापात्रा, डॉ. प्रशांत कुमार साहू, मानस कुमार नायक और डॉ. सुदर्शन संतारा के नाम शामिल हैं। इन सभी पर जांच के दायरे में लापरवाही और प्रशासनिक विफलता के आरोप हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्कूल शिक्षा व्यवस्था में सुधार और भविष्य में इस तरह की गलतियों को रोकने के लिए समिति की सभी 14 सिफारिशों को लागू किया जाएगा। इन सिफारिशों का उद्देश्य पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता को बेहतर बनाना, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना है।
अधिकारियों के अनुसार, समिति की रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि पाठ्यक्रम और किताबों की तैयारी प्रक्रिया में अधिक विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि सामग्री में किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना कम हो सके। इसके साथ ही समीक्षा तंत्र को और मजबूत करने की सिफारिश भी की गई है।
शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों में पाई गई गलतियां लंबे समय से चिंता का विषय थीं, लेकिन इस बार मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने तत्काल और कठोर कदम उठाया है। सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि शिक्षा प्रणाली में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।
इस घटना के बाद राज्य में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से सिस्टम में सुधार की दिशा में सकारात्मक संदेश जाएगा और भविष्य में ऐसी गलतियों की संभावना कम होगी।
फिलहाल निलंबित अधिकारियों से संबंधित आगे की जांच प्रक्रिया जारी है और सरकार ने संकेत दिया है कि दोष सिद्ध होने पर और भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।





