ओडिशा

ACF सौम्य रंजन महापात्रा मौत मामले में रसोइया गिरफ्तार, NBW पर हुई कार्रवाई

Kavita2
30 Sept 2026 4:56 PM IST
ACF सौम्य रंजन महापात्रा मौत मामले में रसोइया गिरफ्तार, NBW पर हुई कार्रवाई
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परलखेमुंडी। असिस्टेंट कंज़र्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) सौम्य रंजन महापात्रा की मौत के चर्चित मामले में परलखेमुंडी पुलिस ने उनके रसोइए मनमथ कुंभा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बुधवार तड़के उसके पैतृक गांव से उसे पकड़ा। उसके खिलाफ परलखेमुंडी के सब-डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (SDJM) की अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था।

पुलिस के अनुसार मनमथ कुंभा की मौजूदगी को लेकर पुख्ता सूचना मिलने के बाद एक विशेष टीम उसके गांव पहुंची। वहां आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उसे हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे आगे की कार्रवाई के लिए परलखेमुंडी लाया गया।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मनमथ कुंभा को SDJM अदालत में पेश किया जा रहा था। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-B के तहत दर्ज मामले के सिलसिले में गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था। धारा 302 हत्या से संबंधित है, जबकि धारा 120-B आपराधिक साजिश से जुड़ी है।

यह मामला ACF सौम्य रंजन महापात्रा की जुलाई 2021 में हुई मौत से जुड़ा है। उस समय वह गजपति जिले के परलखेमुंडी में पदस्थ थे। अपने सरकारी आवास पर गंभीर रूप से झुलसने के बाद उन्हें इलाज के लिए कटक ले जाया गया था, जहां बाद में उनकी मौत हो गई थी।

सौम्य रंजन की मौत के बाद उनके परिवार ने मामले को संदिग्ध बताते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। परिवार की ओर से कहा गया था कि यह सामान्य हादसा नहीं है और पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच होनी चाहिए।

इसी मामले में सौम्य रंजन की पत्नी बिद्या भारती पांडा, तत्कालीन DFO संग्राम केशरी बेहरा और रसोइए मनमथ कुंभा के नाम भी जांच और आरोपों के संदर्भ में सामने आए थे।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ओडिशा सरकार ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी थी। इसके बाद लंबे समय तक अलग-अलग स्तर पर जांच, कानूनी कार्रवाई और अदालत में सुनवाई चलती रही।

मनमथ कुंभा की गिरफ्तारी इस मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम मानी जा रही है। पुलिस ने साफ किया है कि गिरफ्तारी अदालत से जारी गैर-जमानती वारंट की तामील के तहत की गई है।

पुलिस अब अदालत में उसकी पेशी के बाद मिलने वाले निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी। यदि अदालत उसे न्यायिक हिरासत में भेजती है तो आगे की प्रक्रिया संबंधित न्यायिक आदेश के मुताबिक होगी।

इस मामले में मनमथ कुंभा की भूमिका को लेकर जांच एजेंसियां पहले भी सवाल उठाती रही हैं। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया से कुछ नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

हालांकि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होती। मामले में आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलों के आधार पर होगा।

सौम्य रंजन महापात्रा की मौत के बाद से ही यह मामला ओडिशा में लगातार चर्चा में रहा है। उनके परिवार ने शुरुआत से ही हत्या और साजिश की आशंका जताई थी, जबकि जांच एजेंसियों के निष्कर्षों को लेकर अलग-अलग समय पर सवाल भी उठे।

कानूनी प्रक्रिया के दौरान अदालतों में कई याचिकाएं दायर की गईं। मामले में अलग-अलग आरोपियों की भूमिका, जांच की दिशा और आपराधिक कार्यवाही को लेकर भी सुनवाई होती रही है।

मनमथ कुंभा के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट से यह स्पष्ट था कि अदालत उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना चाहती थी। पुलिस द्वारा उसके गांव से गिरफ्तारी के बाद अब उसे न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा।

गैर-जमानती वारंट आमतौर पर उस स्थिति में जारी किया जाता है जब आरोपी की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करना जरूरी हो और पहले जारी प्रक्रिया पर्याप्त साबित न हो।

पुलिस की टीम ने गिरफ्तारी से पहले उसकी मौजूदगी की पुष्टि की और इसके बाद गांव में कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत की गई।

अब जांच एजेंसियां यह देख सकती हैं कि मनमथ कुंभा से पूछताछ के जरिए घटना के समय की परिस्थितियों और उस दिन सरकारी आवास पर मौजूद लोगों से जुड़ी जानकारी में कोई नई बात सामने आती है या नहीं।

सौम्य रंजन महापात्रा की मौत के मामले में सबसे बड़ा सवाल शुरू से यही रहा है कि वह किन परिस्थितियों में झुलसे और घटना के समय सरकारी आवास पर वास्तव में क्या हुआ था।

मामले से जुड़े कई पहलुओं पर पहले ही जांच की जा चुकी है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया जारी रहने के कारण अलग-अलग आरोपों का अंतिम परीक्षण अदालत में होना बाकी है।

मनमथ कुंभा की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में एक बार फिर कानूनी गतिविधियां तेज हो गई हैं। अदालत में उसकी पेशी के बाद आगे की दिशा तय होगी।

पुलिस की ओर से फिलहाल इतना ही स्पष्ट किया गया है कि गिरफ्तारी गैर-जमानती वारंट के आधार पर हुई है और आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।

मामले में यदि अदालत पूछताछ, हिरासत या अन्य किसी प्रक्रिया की अनुमति देती है तो पुलिस उसी आधार पर आगे बढ़ेगी।

सौम्य रंजन महापात्रा की मौत के बाद उनके परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई ने इस मामले को लंबे समय तक सुर्खियों में बनाए रखा है।

अब रसोइए मनमथ कुंभा की गिरफ्तारी से एक बार फिर इस मामले पर ध्यान केंद्रित हो गया है। आगे की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि उसके खिलाफ दर्ज आरोपों पर अदालत किस प्रकार की कार्रवाई करती है।

फिलहाल पुलिस ने वारंट की तामील करते हुए मनमथ कुंभा को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

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