
कटक। ओडिशा के कटक स्थित SCB मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में सिक्योरिटी गार्ड्स की कथित पिटाई के बाद एक व्यक्ति की मौत का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान श्रीकांत दास के रूप में हुई है। उसके छोटे भाई बिनोद बिहारी दास ने मलानगाबाग पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि 28 सितंबर को अस्पताल परिसर में मौजूद श्रीकांत को सिक्योरिटी गार्ड्स ने घेरकर बेरहमी से पीटा था।
शिकायत के अनुसार घटना के समय श्रीकांत ने शराब पी रखी थी। इसी दौरान अस्पताल परिसर में उसका सिक्योरिटी गार्ड्स से विवाद हो गया। मृतक के भाई का आरोप है कि इसके बाद कई गार्ड्स ने मिलकर श्रीकांत के साथ मारपीट की।
परिवार का कहना है कि मारपीट के दौरान श्रीकांत को गंभीर चोटें आई थीं। बाद में उसे इलाज के लिए उसी SCB मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। शुरुआती इलाज के बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और धीरे-धीरे स्थिति गंभीर होती चली गई।
आरोप है कि बुधवार को इलाज के दौरान श्रीकांत की मौत हो गई। परिवार का कहना है कि उसकी मौत उन चोटों के कारण हुई जो कथित मारपीट के दौरान लगी थीं। हालांकि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
घटना के बाद मृतक के परिवार में गुस्सा और दुख है। छोटे भाई बिनोद बिहारी दास ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मलानगाबाग पुलिस स्टेशन में शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अस्पताल परिसर में मौजूद सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर सकती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि 28 सितंबर को वास्तव में क्या हुआ था।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि श्रीकांत और सिक्योरिटी गार्ड्स के बीच विवाद किस बात को लेकर शुरू हुआ और क्या मौके पर किसी अन्य व्यक्ति ने पूरी घटना देखी थी।
पुलिस अस्पताल के सिक्योरिटी कर्मचारियों और अन्य कर्मचारियों के बयान भी दर्ज कर सकती है। इसके अलावा घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है।
मृतक के भाई ने अपनी शिकायत में साफ आरोप लगाया है कि श्रीकांत को कई सिक्योरिटी गार्ड्स ने घेर लिया था और उसके साथ गंभीर मारपीट की गई। परिवार का कहना है कि यदि समय पर उचित कार्रवाई और इलाज होता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।
हालांकि अस्पताल प्रशासन या संबंधित सिक्योरिटी एजेंसी की ओर से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। इसलिए परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
घटना के समय श्रीकांत के शराब के नशे में होने की बात भी शिकायत में दर्ज है। पुलिस इस पहलू की भी जांच करेगी कि क्या नशे की स्थिति में उसका किसी व्यक्ति से विवाद हुआ था और इसके बाद मामला मारपीट तक पहुंचा।
मामले में मेडिकल रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। श्रीकांत को अस्पताल में भर्ती करते समय उसकी हालत कैसी थी, शरीर पर किस तरह की चोटें थीं और इलाज के दौरान उसकी स्थिति में क्या बदलाव आया, इन सभी बिंदुओं की जांच की जा सकती है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मौत का कारण सिर, शरीर के अंदरूनी हिस्सों या किसी अन्य चोट से जुड़ा था या नहीं।
यदि जांच में यह साबित होता है कि सिक्योरिटी गार्ड्स की मारपीट के कारण गंभीर चोटें आई थीं और उन्हीं चोटों से मौत हुई, तो संबंधित लोगों के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है।
दूसरी ओर पुलिस को यह भी जांचना होगा कि क्या सिक्योरिटी गार्ड्स ने किसी सुरक्षा स्थिति को नियंत्रित करने के दौरान बल प्रयोग किया था और यदि किया था तो वह आवश्यकता से अधिक था या नहीं।
SCB मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल राज्य के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में से एक है। यहां बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन रोजाना पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर में इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
अस्पतालों में सिक्योरिटी कर्मचारियों की जिम्मेदारी मरीजों, डॉक्टरों, कर्मचारियों और परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है। किसी भी विवाद की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया और कानून के दायरे में कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में सिक्योरिटी कर्मियों के व्यवहार और उनकी जवाबदेही को लेकर भी चर्चा तेज हो सकती है।
पुलिस जांच के दौरान CCTV फुटेज सबसे अहम सबूतों में से एक हो सकती है। यदि घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुई है तो इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि विवाद किस तरह शुरू हुआ और कितने लोग इसमें शामिल थे।
इसके अलावा अस्पताल में मौजूद मरीजों, परिजनों और कर्मचारियों के बयान भी मामले की सच्चाई सामने लाने में मदद कर सकते हैं।
परिवार की ओर से लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन अभी इन्हें जांच के जरिए साबित किया जाना बाकी है। कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति को जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले दोषी नहीं माना जा सकता।
मृतक के भाई ने पुलिस से मांग की है कि घटना में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
फिलहाल श्रीकांत दास की मौत के बाद मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस शिकायत, मेडिकल दस्तावेज, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
अब नजर इस बात पर है कि अस्पताल प्रशासन इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया देता है और पुलिस जांच में सिक्योरिटी गार्ड्स की भूमिका को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।
श्रीकांत की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं और उनका कहना है कि घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।





